चर्चा में क्यों?
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भू-राजनीति (geopolitics) और भू-अर्थशास्त्र (geo-economics) पर भारत के प्रमुख सम्मेलन रायसीना डायलॉग (Raisina Dialogue) के 11वें संस्करण का उद्घाटन किया। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (Observer Research Foundation) और विदेश मंत्रालय द्वारा सह-मेजबानी में तीन दिवसीय कार्यक्रम, दुनिया भर के नेताओं, नीति निर्माताओं और विद्वानों को वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक साथ लाता है। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब (Alexander Stubb) ने मुख्य भाषण दिया।
पृष्ठभूमि
2016 में स्थापित, रायसीना डायलॉग म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference) और सिंगापुर के शांगरी-ला डायलॉग (Shangri-La Dialogue) जैसे मंचों पर आधारित है। इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों, व्यापार जगत के नेताओं, मीडिया पेशेवरों और शिक्षाविदों को शामिल करके अंतरराष्ट्रीय मामलों पर खुली चर्चा को बढ़ावा देना है। सम्मेलन का नाम रायसीना हिल से लिया गया है, जो नई दिल्ली में भारत सरकार की सीट है। यह एशिया के प्रमुख रणनीतिक संवादों में से एक बन गया है।
2026 संस्करण, विषय "संस्कार - जोर, आवास, उन्नति (Saṁskāra – Assertion, Accommodation, Advancement)," यह अन्वेषण करता है कि कैसे समाज बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के बीच खुद को ढालते हैं और खुद को स्थापित करते हैं। 110 से अधिक देशों के 2,700 से अधिक प्रतिभागियों के छह विषयगत स्तंभों के तहत आयोजित सत्रों में भाग लेने की उम्मीद है: चुनाव लड़ रहे सीमांत; वैश्विक आम की मरम्मत; सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को आगे बढ़ाना; जलवायु, संघर्ष और संकट का प्रबंधन; प्रौद्योगिकी संचालित भविष्य को आकार देना; और टैरिफ (tariffs) के युग में व्यापार।
मुख्य आकर्षण
- अपने मुख्य भाषण में, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने बहुध्रुवीय (multipolar) दुनिया को आकार देने में भारत की भूमिका पर जोर दिया और सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन पर यूरोप-भारत सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।
- प्रधान मंत्री मोदी ने नियम-आधारित (rules-based) अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया।
- पैनल और साइड इवेंट साइबर सुरक्षा (cybersecurity) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लेकर इंडो-पैसिफिक में समुद्री सुरक्षा (maritime security) तक के विषयों को संबोधित करेंगे।
- सम्मेलन यंग फेलो योजना (Young Fellows scheme) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उभरते नेताओं और विद्वानों के लिए नेटवर्किंग के अवसर प्रदान करता है।
स्रोत: News On Air