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रतले जलविद्युत परियोजना: चिनाब नदी बांध और बिजली क्षमता

रतले जलविद्युत परियोजना: चिनाब नदी बांध और बिजली क्षमता

समाचार में क्यों?

भारी बारिश ने Ratle प्रोजेक्ट के पास चिनाब (Chenab) नदी के जलस्तर को तेज़ी से बढ़ा दिया। उच्च प्रवाह (high flow) ने निर्माण स्थल पर एक अस्थायी cofferdam को क्षतिग्रस्त कर दिया। श्रमिकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया, और किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। यह क्षतिग्रस्त बैरियर (barrier) इस परियोजना का स्थायी मुख्य बांध (dam) नहीं था।

पृष्ठभूमि

Ratle Hydroelectric Project का निर्माण जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ (Kishtwar) ज़िले में चिनाब नदी पर किया जा रहा है।

यह स्थल दुलहस्ती (Dulhasti) के अनुप्रवाह (downstream) और बगलिहार (Baglihar) के ऊर्ध्वप्रवाह (upstream) में स्थित है, जो मानचित्र-आधारित प्रश्नों के लिए एक उपयोगी क्रम है।

Ratle एक 850-megawatt run-of-river project है जो मुख्य रूप से प्राकृतिक प्रवाह और उपलब्ध ऊंचाई के अंतर का उपयोग करता है।

महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण: "Run-of-river" का मतलब यह नहीं है कि कोई बांध मौजूद नहीं है। इसका आमतौर पर मतलब एक बड़ी भंडारण जलाशय (storage-reservoir) परियोजना की तुलना में बहुत कम जल भंडारण है।

Cofferdam और मुख्य बांध अलग-अलग हैं

cofferdam एक अस्थायी बैरियर है जो पानी को रोकता या मोड़ता है जबकि इसके कार्य क्षेत्र के अंदर निर्माण जारी रहता है।

श्रमिक बाद में इसे हटा सकते हैं या छोड़ सकते हैं, इसलिए cofferdam का क्षतिग्रस्त होना स्थायी बांध की विफलता को साबित नहीं करता है।

Ratle की मुख्य संरचना एक 133-मीटर ग्रेविटी बांध (gravity dam) होगी, जिसका कंक्रीट का वजन पानी के दबाव का विरोध करता है।

प्रमुख सत्यापित परियोजना तथ्य

विशेषता आधिकारिक विवरण
नदी और स्थान यह किश्तवाड़ ज़िले में चिनाब पर स्थित है।
परियोजना का प्रकार यह एक run-of-river hydroelectric योजना है।
स्थापित क्षमता (Installed capacity) इसकी कुल नियोजित क्षमता 850 megawatts है।
उत्पादन इकाइयाँ (Generating units) इसमें चार 205-megawatt की इकाइयाँ और एक 30-megawatt की इकाई है।
मुख्य बांध नियोजित कंक्रीट ग्रेविटी बांध 133 मीटर ऊंचा है।
पावरहाउस (Powerhouse) मुख्य पावरहाउस भूमिगत (underground) होगा और इसमें Francis टर्बाइन का उपयोग किया जाएगा।
डिज़ाइन ऊर्जा (Design energy) आधिकारिक डिज़ाइन ऊर्जा सालाना 3,136.76 million units है।
लागत अनुमान नवम्बर 2018 की कीमतों पर अनुमान ₹5,281.94 करोड़ है।
अपेक्षित संचालन (Expected operation) NHPC को नवम्बर 2028 के दौरान वाणिज्यिक संचालन (commercial operation) की उम्मीद है।

एक "90 per cent dependable year" दस वर्षों में से नौ वर्षों में डिज़ाइन प्रवाह (design flow) को पूरा करता है।

चूंकि एक बिजली यूनिट एक kilowatt-hour के बराबर होती है, इसलिए 3,136.76 million units 3,136.76 gigawatt-hours के बराबर हैं।

परियोजना को कौन लागू कर रहा है?

Ratle Hydroelectric Power Corporation Limited इस परियोजना को लागू करती है।

National Hydroelectric Power Corporation, जिसे अब NHPC Limited कहा जाता है, के पास 51 प्रतिशत इक्विटी (equity) है।

Jammu and Kashmir State Power Development Corporation के पास 49 प्रतिशत हिस्सा है। इसलिए, NHPC Limited बहुमत वाली भागीदार है।

परियोजना का कालक्रम (Chronology)

  1. 3 फ़रवरी 2019: भागीदारों ने Ratle को विकसित करने के लिए एक त्रिपक्षीय (tripartite) समझौता ज्ञापन (memorandum) पर हस्ताक्षर किए।
  2. जून 2021: वर्तमान संयुक्त-उद्यम (joint-venture) कंपनी को 51:49 स्वामित्व (ownership) के साथ शामिल किया गया था।
  3. 18 जनवरी 2022: कंपनी ने टर्नकी (turnkey) निर्माण अनुबंध (contract) प्रदान किया।
  4. 27 जनवरी 2024: इंजीनियरों ने चिनाब नदी के मोड़ (diversion) को सफलतापूर्वक हासिल किया।
  5. जुलाई 2026: मानसूनी प्रवाह ने एक अस्थायी निर्माण cofferdam को क्षतिग्रस्त कर दिया।
  6. 28 नवम्बर 2028: India Investment Grid इस परियोजना के पूरा होने की तिथि को सूचीबद्ध करता है।

बिजली कैसे उत्पन्न होगी?

  1. यह बांध नियंत्रित मोड़ (controlled diversion) के लिए आवश्यक जल स्तर बनाएगा।
  2. Intake संरचनाएँ पानी को भूमिगत दबाव शाफ्ट (pressure shafts) की ओर भेजेंगी।
  3. गिरता हुआ पानी पावरहाउस के अंदर Francis टर्बाइन को घुमाएगा।
  4. जनरेटर (Generators) टर्बाइन की यांत्रिक ऊर्जा (mechanical energy) को बिजली में बदल देंगे।
  5. टेलरेस सुरंगें (Tailrace tunnels) उपयोग किए गए पानी को वापस चिनाब नदी में लौटा देंगी।

Indus Waters Treaty का संदर्भ

विश्व बैंक (World Bank) समर्थित वार्ताओं के बाद भारत और पाकिस्तान ने 1960 में Indus Waters Treaty पर हस्ताक्षर किए।

संधि ने सिंधु (Indus), झेलम (Jhelum) और चिनाब को पश्चिमी नदियों (western rivers) के रूप में समूहीकृत किया, जबकि भारत को सीमित उपयोग की अनुमति दी।

पाकिस्तान ने Ratle और Kishenganga डिज़ाइनों पर आपत्ति जताई, जबकि भारत ने संधि की तटस्थ विशेषज्ञ (Neutral Expert) प्रक्रिया को प्राथमिकता दी।

भारत ने अप्रैल 2025 के दौरान संधि को स्थगित (abeyance) कर दिया और जुलाई 2026 में इस अपरिवर्तित स्थिति को दोहराया।

Prelims focus: Ratle चिनाब पर स्थित है, झेलम पर नहीं। Kishenganga झेलम की एक सहायक नदी से जुड़ी एक अलग परियोजना है।

मानसून प्रबंधन क्यों मायने रखता है

तीव्र बारिश के बाद पहाड़ी नदियाँ तेज़ी से बढ़ती हैं, जबकि निर्माण स्थलों को भी तलछट (sediment), मलबे (debris) और अचानक प्रवाह परिवर्तन का सामना करना पड़ता है।

अस्थायी संरचनाएँ पूर्ण हो चुके कार्यों की तुलना में संकीर्ण उद्देश्यों की पूर्ति करती हैं, लेकिन उनके क्षतिग्रस्त होने पर भी निर्माण फिर से शुरू होने से पहले निरीक्षण की आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष

जुलाई की घटना एक अस्थायी बैरियर से संबंधित थी, जिसकी सुरक्षित रिकवरी के लिए निरीक्षण, प्रवाह की निगरानी और सावधानीपूर्वक मानसून योजना की आवश्यकता होती है।

स्रोत

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