समाचार में क्यों?
Research and Analysis Wing (RAW) अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चाओं में शामिल रहता है। September 2026 में इसकी 58वीं वर्षगांठ है, जो इसकी उत्पत्ति, भूमिका और समकालीन प्रासंगिकता पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
पृष्ठभूमि
RAW भारत की बाह्य खुफिया एजेंसी (external intelligence agency) है। 1968 तक, घरेलू Intelligence Bureau (IB) आंतरिक और बाहरी दोनों खुफिया जानकारियों को संभालता था। हालाँकि, चीन के साथ 1962 के युद्ध और पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध के दौरान खुफिया विफलताओं ने एक समर्पित विदेशी खुफिया सेवा की आवश्यकता को उजागर किया। 21 September 1968 को सरकार ने RAW की स्थापना की, जिसमें एक अनुभवी खुफिया अधिकारी रामेश्वर नाथ काव (Rameshwar Nath Kao) को इसका पहला प्रमुख नियुक्त किया गया।
उत्पत्ति और प्रारंभिक इतिहास
- गठन – रणनीतिक आवश्यकता से उत्पन्न, RAW ने शुरुआत में चीन और पाकिस्तान की निगरानी पर ध्यान केंद्रित किया। इसे लगभग 250 कर्मियों और मामूली बजट के साथ स्थापित किया गया था, लेकिन जल्द ही विदेशी राजधानियों में इसके नेटवर्क का विस्तार हुआ।
- जनादेश (Mandate) – IB के विपरीत, जो गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) को रिपोर्ट करता है, RAW सीधे Prime Minister’s Office को रिपोर्ट करता है। यह स्वायत्तता उसे अन्य मंत्रालयों की विशिष्ट निगरानी के बिना गुप्त संचालन और विदेशी खुफिया जानकारी जुटाने की अनुमति देती है।
- प्रारंभिक सफलताएँ – विश्लेषकों का श्रेय है कि RAW ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम (Bangladesh Liberation War) के दौरान खुफिया सहायता प्रदान की, 1975 में भारत में सिक्किम के विलय को सुविधाजनक बनाया और भारत के परमाणु कार्यक्रम की रक्षा की। इसने शीत युद्ध (Cold War) के दौरान अफ्रीकी मुक्ति आंदोलनों की भी सहायता की।
संरचना और कार्य
- संगठन – RAW का स्टाफिंग और बजट वर्गीकृत (classified) रहता है। एजेंसी Research and Analysis Service—एक समर्पित संवर्ग—के साथ-साथ Indian Police Service, सेना और अन्य सरकारी विभागों से भर्ती करती है। RAW का प्रमुख Cabinet Secretariat में सचिव (रिसर्च) का पद धारण करता है।
- संचालन – प्रमुख कार्यों में पड़ोसी देशों में राजनीतिक और सैन्य विकास की निगरानी करना, विदेशी सरकारों के इरादों का आकलन करना, और आतंकवाद तथा अवैध हथियारों के प्रवाह जैसे खतरों का मुकाबला करना शामिल है। यह शत्रुतापूर्ण राज्यों को सैन्य हार्डवेयर की आपूर्ति को सीमित करने और विदेशों में भारत के रणनीतिक हितों की रक्षा करने पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
- विदेशी संपर्क – RAW आतंकवाद का मुकाबला करने और क्षेत्रीय खुफिया जानकारी पर विशेषज्ञता साझा करने के लिए इज़राइल की मोसाद (Mossad) सहित कई विदेशी खुफिया एजेंसियों के साथ गुप्त संपर्क बनाए रखता है।
- चुनौतियाँ – आलोचकों का तर्क है कि RAW में विधायी निगरानी (legislative oversight) और घरेलू एजेंसियों के साथ समन्वय का अभाव है। विदेश नीति पर इसके प्रभाव के बारे में बहस जारी है, लेकिन अधिकांश लोग इस बात से सहमत हैं कि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी खुफिया जानकारी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
पाँच दशकों में, Research and Analysis Wing एक छोटे संगठन से विकसित होकर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र का एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है। चीन-भारत (Sino‑Indian) और भारत-पाकिस्तान (Indo‑Pakistani) युद्धों के बाद इसका गठन संप्रभुता की रक्षा में समय पर खुफिया जानकारी के महत्व को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे भारत एक जटिल अंतरराष्ट्रीय माहौल से गुज़र रहा है—जहाँ सीमा-पार आतंकवाद से लेकर साइबर जासूसी तक के खतरे हैं—रणनीतिक आकलन और प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करने में RAW की भूमिका अपरिहार्य (indispensable) बनी हुई है। लोकतांत्रिक जवाबदेही (democratic accountability) का सम्मान करते हुए इसकी प्रभावशीलता को अधिकतम करने के लिए पारदर्शिता और अंतर-एजेंसी समन्वय (inter‑agency coordination) महत्वपूर्ण होगा।