अंतर्राष्ट्रीय संबंध

Red Sea Cables: समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल, बाब अल-मंडब और भू-राजनीति

Red Sea Cables: समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल, बाब अल-मंडब और भू-राजनीति

खबरों में क्यों?

पश्चिम एशिया (West Asia) में तनाव बढ़ने के साथ ही, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लाल सागर (Red Sea) से गुजरने वाले सबमरीन संचार केबल (submarine communication cables) क्षेत्रीय संघर्ष में निशाना (targets) बन सकते हैं या उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। ईरानी समर्थित उग्रवादियों के हालिया सोशल मीडिया संदेशों ने केबलों को काटने की धमकी दी है, और सितंबर 2025 में एक आकस्मिक कट (accidental cut) की यादों ने भारत और अन्य देशों को प्रभावित करने वाले इंटरनेट आउटेज (internet outages) के बारे में चिंताओं को बढ़ा दिया है।

पृष्ठभूमि

लाल सागर अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप के बीच स्थित एक संकीर्ण (narrow), लम्बा जल निकाय है। यह स्वेज नहर (Suez Canal) के माध्यम से भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab el‑Mandeb Strait) के माध्यम से अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) से जुड़ता है, जिससे यह दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग मार्गों में से एक बन जाता है। यह समुद्र अपनी उच्च लवणता (high salinity) और फलते-फूलते प्रवाल भित्तियों (coral reefs) के लिए भी उल्लेखनीय है जो गर्म तापमान के प्रति असामान्य रूप से सहनशील हैं। इसके पानी के नीचे यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच डेटा ले जाने वाले फाइबर-ऑप्टिक केबलों (fibre‑optic cables) का एक घना नेटवर्क है।

प्रमुख चिंताएं

  • केबल भेद्यता (Cable vulnerability): वैश्विक इंटरनेट ट्रैफ़िक का लगभग 95 प्रतिशत अंडरसी केबल्स (undersea cables) के माध्यम से यात्रा करता है। लाल सागर में चार प्रमुख केबल - SEA‑ME‑WE 4, India–Middle East–Western Europe, FALCON और Europe‑India Gateway - सितंबर 2025 में क्षतिग्रस्त हो गए थे जब एक वाणिज्यिक जहाज (commercial ship) ने अपना लंगर (anchor) घसीट दिया था।
  • तबाही की धमकियां (Threats of sabotage): यमन में ईरानी समर्थित हौथी विद्रोहियों (Houthi militants) ने पश्चिमी नौसैनिक नाकेबंदी (Western naval blockades) के प्रतिशोध में जानबूझकर केबलों को काटने का संकेत दिया है। इस तरह के कृत्यों से एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच संचार लिंक बाधित हो सकते हैं।
  • भारत पर प्रभाव: भारत मुंबई, चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और तिरुवनंतपुरम में लैंडिंग स्टेशनों पर 17 अंतरराष्ट्रीय पनडुब्बी केबलों (international submarine cables) की मेजबानी करता है। लाल सागर केबलों को नुकसान पहुंचने से इंटरनेट धीमा हो सकता है, डिजिटल भुगतान और क्लाउड सेवाएं (cloud services) प्रभावित हो सकती हैं, और आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।
  • भू-रणनीतिक चोकपॉइंट (Geostrategic chokepoint): लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab el‑Mandeb Strait), वैश्विक व्यापार और ऊर्जा लदान (energy shipments) के लिए एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है। क्षेत्र में अस्थिरता न केवल डेटा प्रवाह को खतरे में डालती है बल्कि शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम (insurance premiums) भी बढ़ाती है।

महत्व

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा: यह प्रकरण बेहतर निगरानी, अतिरेक (redundancy) और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से पनडुब्बी केबलों की मजबूत सुरक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
  • रणनीतिक विविधीकरण (Strategic diversification): भारत जैसे देशों को व्यवधानों के प्रभाव को कम करने के लिए वैकल्पिक मार्गों और उपग्रह लिंक (satellite links) में निवेश करना पड़ सकता है।
  • पर्यावरण जागरूकता: भू-राजनीतिक जोखिमों (geopolitical risks) के साथ, लाल सागर के अद्वितीय प्रवाल पारिस्थितिक तंत्र (coral ecosystems) समुद्री संरक्षण (marine conservation) के साथ बुनियादी ढांचे के विकास को संतुलित करने के महत्व को रेखांकित करते हैं।

स्रोत: NDTV

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