समाचारों में क्यों?
असम के बिहू त्योहारों में सबसे जीवंत रोंगाली बिहू (Rongali Bihu) या बोहाग बिहू (Bohag Bihu), 14 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ। इस वर्ष के उत्सव आम चुनावों के प्रचार के साथ मेल खाते हैं, जिससे समय से पहले उत्सव शुरू हो गए और असमिया पहचान (Assamese identity) में इस त्योहार की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
पृष्ठभूमि
बिहू असम में मनाए जाने वाले तीन कृषि त्योहारों (agrarian festivals) को संदर्भित करता है: अप्रैल में रोंगाली, अक्टूबर में कोंगाली और जनवरी में भोगाली। रोंगाली बिहू असमिया नव वर्ष और बुवाई के मौसम (sowing season) की शुरुआत का प्रतीक है। इसकी उत्पत्ति बोडो, कछारी और मिसिंग लोगों जैसे जातीय समुदायों (ethnic communities) के औपनिवेशिक काल से पूर्व के (pre-colonial) वसंत त्योहारों में निहित है, और यह जाति और धर्म से परे एकता (unity) के प्रतीक के रूप में विकसित हुआ है।
इसे कैसे मनाया जाता है
- चैत्र महीने के अंतिम दिन गोरू बिहू (Goru Bihu) में मवेशियों (cattle) को नहलाना, उन्हें मालाओं से सजाना और उनके श्रम (labour) के लिए कृतज्ञता (gratitude) के रूप में उन्हें विशेष चारा (fodder) खिलाना शामिल है।
- बोहाग के पहले दिन मानुह बिहू (Manuh Bihu) के दिन लोग अनुष्ठानिक स्नान (ritual baths) करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं。 इस दिन दावत, बिहू नृत्य और ढोल, पेपा तथा ताल के साथ संगीत प्रदर्शन शुरू होते हैं।
- अगले दिनों में गोसाईं बिहू (पारिवारिक देवताओं की पूजा), सेनेही बिहू (प्रियजन का दिन जब युवा उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं) और मुकोली बिहू (पारंपरिक नृत्य और गीतों के साथ खुले आसमान के नीचे सामुदायिक जमावड़ा) शामिल हैं।
महत्व
- रोंगाली बिहू उर्वरता (fertility), प्रचुरता (abundance) और नवीनीकरण (renewal) का जश्न मनाता है, जिससे एक नए कृषि चक्र (agricultural cycle) की शुरुआत होती है।
- यह त्योहार सांप्रदायिक सद्भाव (communal harmony) को बढ़ावा देता है और असमिया सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है, जिसमें दुनिया भर के प्रवासी समुदाय (diaspora communities) उत्सव में शामिल होते हैं।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) · ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio)