Economy (अर्थव्यवस्था)

RoSCTL Scheme: कपड़ा निर्यात, ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स और मेक इन इंडिया

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चर्चा में क्यों?

कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) ने परिधानों (apparel) और मेड-अप्स (made‑ups) के निर्यात के लिए RoSCTL योजना को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। इस विस्तार से यह सुनिश्चित होगा कि कपड़ा निर्यातकों (garment exporters) को राज्य और केंद्रीय करों व लेवी (State and Central taxes and levies) पर छूट (rebate) मिलती रहे, जिससे उन्हें वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी (competitive) बने रहने में मदद मिलेगी।

पृष्ठभूमि

निर्यात किए गए कपड़ों की लागत में शामिल करों को वापस करने के लिए भारत ने 2016 में राज्यों के करों पर छूट (Rebate of State Levies - RoSL) योजना शुरू की थी। हालांकि, RoSL में केवल राज्य के कर (state levies) ही शामिल थे। मार्च 2019 में सरकार ने RoSL की जगह राज्य और केंद्रीय करों एवं लेवी पर छूट (Rebate of State and Central Taxes and Levies - RoSCTL) योजना लागू की, ताकि निर्यातकों को राज्य और केंद्रीय दोनों करों की वापसी (refund) मिल सके। यह योजना ड्यूटी ड्रॉबैक (duty drawback) तंत्र की पूरक है और वैट (VAT), बिजली शुल्क (electricity duty) तथा मंडी टैक्स (mandi tax) जैसे करों की भरपाई करती है जो ड्रॉबैक के माध्यम से वापस नहीं किए जाते हैं।

प्रमुख विशेषताएं

  • ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स (Duty credit scrips): निर्यातकों को ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स के रूप में छूट मिलती है, जिसका उपयोग आयातित इनपुट (imported inputs) पर बुनियादी सीमा शुल्क (basic customs duty) चुकाने के लिए किया जा सकता है। ये स्क्रिप्स सीमा शुल्क प्रणाली पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किए जाते हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से ट्रांसफर (freely transferable) किया जा सकता है।
  • वैधता (Validity): प्रत्येक ई-स्क्रिप (e‑scrip) जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक वैध रहता है, भले ही इसे किसी अन्य संस्था को ट्रांसफर किया गया हो या नहीं।
  • पात्रता (Eligibility): विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade) की डिनाइड एंटिटी लिस्ट (Denied Entity List) में शामिल संस्थाओं को छोड़कर, भारत में निर्मित परिधानों और मेड-अप्स के सभी निर्यातक इस योजना के पात्र हैं।
  • कार्यान्वयन एजेंसी (Implementing agency): इस योजना को कपड़ा मंत्रालय के समन्वय से वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के राजस्व विभाग (Department of Revenue) द्वारा लागू किया जाता है।
  • उद्देश्य: योजना का उद्देश्य अंतर्निहित करों और लेवी (embedded taxes and levies) की पूरी तरह से वापसी सुनिश्चित करना है, ताकि भारतीय परिधान और मेड-अप उत्पाद उन देशों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें जहां उत्पादन लागत में ऐसे कर शामिल नहीं होते हैं।

RoSL और RoSCTL के बीच अंतर

RoSL योजना के तहत निर्यातक केवल राज्य के करों (state taxes) पर ही रिफंड का दावा कर सकते थे। RoSCTL योजना ने इस छूट का दायरा बढ़ाकर इसमें ईंधन पर उत्पाद शुल्क (excise duty) और इनपुट में शामिल केंद्रीय जीएसटी (central GST) जैसे केंद्रीय करों को भी शामिल कर लिया है। परिणामस्वरूप, यह योजना करों की अधिक व्यापक वापसी (comprehensive remission) प्रदान करती है और निर्यात की प्रभावी लागत (effective cost) को कम करती है।

महत्व

  • प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि (Enhanced competitiveness): सभी अंतर्निहित करों और लेवी को वापस करके, यह योजना उत्पादन लागत को कम करती है और भारतीय कपड़ा निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने उत्पादों का मूल्य अधिक प्रतिस्पर्धी रूप से तय करने में सक्षम बनाती है।
  • निर्यात को प्रोत्साहन (Encouraging exports): RoSCTL को सितंबर 2026 तक बढ़ाने से निर्यातकों को नीतिगत निश्चितता (policy certainty) मिलती है, जिससे वे लंबे समय के ऑर्डर और निवेश की योजना बना सकते हैं।
  • रोजगार को समर्थन (Supporting employment): कपड़ा और परिधान क्षेत्र श्रम-गहन (labour‑intensive) है; निर्यात को समर्थन देने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विशेषकर महिलाओं के लिए लाखों नौकरियां बनी रहती हैं।

निष्कर्ष

RoSCTL योजना परिधानों और मेड-अप्स के लिए भारत के निर्यात प्रोत्साहन ढांचे (export incentive framework) का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसका विस्तार इस श्रम-गहन क्षेत्र को समर्थन देने, विदेशी मुद्रा आय (foreign exchange earnings) बढ़ाने और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के सरकार के इरादे को दर्शाता है।

स्रोत: PIB

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