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Sahariya Tribe: भूगोल, संस्कृति और PVTG की चुनौतियाँ

Sahariya Tribe: भूगोल, संस्कृति और PVTG की चुनौतियाँ

ख़बरों में क्यों?

जून 2026 में समाचार रिपोर्टों में मध्य प्रदेश के गुना जिले की रहने वाली एक महिला भूरी बाई सहरिया (Bhuri Bai Saharia) की मौत पर प्रकाश डाला गया, जो सब्सिडी वाले यूरिया के लिए घंटों कतार में इंतजार करने के बाद बेहोश हो गई थी। इस घटना ने भारत के विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (Particularly Vulnerable Tribal Groups - PVTGs) में से एक, सहरिया (Sahariya) समुदाय के सामने आने वाली कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित किया।

पृष्ठभूमि

सहरिया मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के पहाड़ी जंगलों में रहते हैं। परंपरागत रूप से वे सहराना (Seharana) नामक बस्तियों में छोटे पत्थर और मिट्टी के घर बनाते हैं और झूम खेती (shifting agriculture) करते हैं। वे जलाऊ लकड़ी, औषधीय पौधे और छोटे वनोपज (minor forest produce) इकट्ठा करते हैं और खैर के पेड़ों से कत्था (catechu) बनाने में कुशल होते हैं। सहरिया स्वांग (Sahariya Swang) त्योहारों के दौरान किया जाने वाला एक रंगीन नृत्य है। मानवविज्ञानी सहरियाओं को एक PVTG के रूप में पहचानते हैं क्योंकि उनमें साक्षरता कम है, भूमि तक सीमित पहुंच है और जनसंख्या स्थिर है। सरकार 75 समुदायों को PVTGs के रूप में सूचीबद्ध करती है, जिन्हें पूर्व-कृषि प्रौद्योगिकी, आर्थिक पिछड़ेपन और जंगलों पर निर्भरता जैसे लक्षणों द्वारा परिभाषित किया गया है।

वर्तमान चुनौतियां

  • गरीबी और कुपोषण: अध्ययनों से सहरिया बच्चों में कुपोषण और एनीमिया (anaemia) की उच्च दर का पता चलता है। स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा तक पहुंच खराब बनी हुई है।
  • भूमि असुरक्षा: कई परिवारों के पास अपनी कृषि भूमि के कानूनी अधिकार नहीं हैं। विकास परियोजनाओं और वन्यजीव अभयारण्यों द्वारा विस्थापन ने आजीविका को अनिश्चित बना दिया है।
  • सीमित सार्वजनिक सेवाएं: पानी, जलाऊ लकड़ी और राशन इकट्ठा करने के लिए महिलाओं को अक्सर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। हाल की त्रासदी में, ग्रामीण छाया या आराम सुविधाओं के बिना घंटों तक उर्वरक के लिए कतार में खड़े रहे।
  • सांस्कृतिक क्षरण (Cultural erosion): आधुनिक प्रभाव और प्रवास (migration) पारंपरिक प्रथाओं जैसे स्वांग नृत्य और मौखिक कहानी कहने के लिए खतरा हैं।

निष्कर्ष

सहरियाओं की दुर्दशा लक्षित कल्याण कार्यक्रमों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। सुरक्षित भूमि अधिकार, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील शिक्षा इस समुदाय को अपनी समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए फलने-फूलने में मदद कर सकती है।

स्रोत

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