चर्चा में क्यों?
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के वैज्ञानिकों ने मार्च 2026 की शुरुआत में घोषणा की कि उन्होंने ओवम पिक-अप, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो ट्रांसफर (ovum pick‑up, in vitro fertilisation and embryo transfer - OPU–IVF–ET) के रूप में जानी जाने वाली उन्नत प्रजनन तकनीक का उपयोग करके सफलतापूर्वक पांच स्वस्थ साहीवाल बछड़ों का उत्पादन किया है। बछड़ों का जन्म 28 फरवरी और 4 मार्च 2026 के बीच हुआ था। यह स्वदेशी डेयरी नस्ल पर इस तकनीक को लागू करने में भारत की पहली बड़ी सफलता है।
पृष्ठभूमि
साहीवाल पंजाब क्षेत्र से उत्पन्न एक बेशकीमती ज़ेबू (zebu) मवेशी नस्ल है। अपनी उच्च दूध उपज, गर्मी सहनशीलता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाने वाली यह नस्ल, भारत की डेयरी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पारंपरिक प्रजनन के माध्यम से आनुवंशिक सुधार धीरे-धीरे होता है क्योंकि एक गाय अपने जीवनकाल में केवल कुछ ही बछड़ों को जन्म देती है। सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकियां (Assisted reproductive technologies) कुलीन (elite) जानवरों से कई भ्रूण उत्पन्न करके और उन्हें सरोगेट माताओं (surrogate mothers) में प्रत्यारोपित करके इस प्रक्रिया को तेज करती हैं।
OPU–IVF–ET कैसे काम करता है
- ओवम पिक-अप (OPU): पशु चिकित्सक अल्ट्रासाउंड-निर्देशित आकांक्षा (ultrasound-guided aspiration) का उपयोग करके उच्च-आनुवंशिक-योग्यता वाली गायों के अंडाशय से अनिषेचित अंडे (oocytes) एकत्र करते हैं। यह न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया एक ही सत्र में कई ओसाइट्स (oocytes) एकत्र कर सकती है।
- इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF): सिद्ध दूध-उत्पादन वंश वाले सांडों के वीर्य का उपयोग करके प्रयोगशाला में ओसाइट्स को परिपक्व और निषेचित किया जाता है। विभाजन के बाद, भ्रूण को कई दिनों तक संवर्धित किया जाता है।
- एम्ब्रियो ट्रांसफर (ET): व्यवहार्य भ्रूणों को सरोगेट गायों (प्राप्तकर्ता) के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है जो गर्भावस्था को अवधि तक ले जाती हैं। यह एक दाता (donor) गाय को एक वर्ष में कई संतान पैदा करने की अनुमति देता है।
इस सफलता का महत्व
- आनुवंशिक सुधार: संभ्रांत (elite) साहीवाल गायों के जीन को गुणा करके, OPU-IVF-ET राष्ट्रीय झुंड में दूध की उपज, रोग प्रतिरोध और प्रजनन लक्षणों को तेजी से बढ़ा सकता है।
- स्वदेशी नस्लों का संरक्षण: यह तकनीक आयातित मवेशियों और क्रॉस-ब्रीड पर निर्भरता कम करती है, जिससे भारत के मूल डेयरी जर्मप्लाज्म (germplasm) को संरक्षित करने में मदद मिलती है।
- क्षमता निर्माण: IVRI इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए पशु चिकित्सकों और किसानों को प्रशिक्षित करने की योजना बना रहा है। सफल क्षेत्र-स्तरीय अनुप्रयोग भैंसों और अन्य स्वदेशी मवेशियों के लिए प्रजनन कार्यक्रमों को बदल सकता है।
निष्कर्ष
OPU-IVF-ET के माध्यम से पांच साहीवाल बछड़ों का जन्म भारतीय डेयरी विज्ञान के लिए एक मील का पत्थर है। यह दर्शाता है कि आधुनिक प्रजनन प्रौद्योगिकियां स्वदेशी नस्लों को कम किए बिना पारंपरिक प्रजनन को बढ़ा सकती हैं। उचित प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे के साथ, ऐसी तकनीकें भारत की समृद्ध गोजातीय (bovine) विरासत की रक्षा करते हुए दूध की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद कर सकती हैं।
स्रोत: Down to Earth