पर्यावरण

Sambhar Lake: नमक निष्कर्षण, रामसर साइट और पारिस्थितिकी

Sambhar Lake: नमक निष्कर्षण, रामसर साइट और पारिस्थितिकी

समाचार में क्यों?

28 अप्रैल 2026 को राजस्थान उच्च न्यायालय ने Sambhar Lake के पास 100 MW की सौर परियोजना पर रोक हटा दी। अदालत ने इस शर्त पर परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति दी कि सोलर पैनल जमीन से कम से कम 1.5 मीटर ऊपर उठाए जाएं, काटे गए पेड़ों की तुलना में तीन गुना पेड़ लगाए जाएं और बारिश के पानी के प्रवाह को अवरुद्ध न किया जाए। यह फैसला भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय (inland) खारे पानी की झील में प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के साथ नवीकरणीय ऊर्जा विकास को संतुलित करने का प्रयास करता है。

पृष्ठभूमि

राजस्थान में जयपुर से लगभग 60 किमी पश्चिम में स्थित Sambhar Lake, देश की सबसे बड़ी खारे पानी की अंतर्देशीय झील है। मानसून के दौरान यह 230 वर्ग किलोमीटर तक फैल जाती है लेकिन गर्मियों में अक्सर सूख जाती है। मौसमी धाराएँ उथले बेसिन को भर देती हैं, और अंग्रेजों द्वारा बनाया गया 5 किलोमीटर का पत्थर का बांध इसके पूर्वी हिस्से को नमक के पैन (salt pans) में विभाजित करता है। झील के नमक के कारखाने एक हजार साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं और अब हिंदुस्तान साल्ट्स (Hindustan Salts) और राजस्थान सरकार द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं。

पारिस्थितिक महत्व

  • Ramsar स्थल: Sambhar अंतरराष्ट्रीय महत्व का एक आर्द्रभूमि (wetland) है। इसका उथला, क्षारीय (alkaline) पानी विशेष शैवाल और बैक्टीरिया को आश्रय देता है जो झील को आकर्षक रंग देते हैं और ग्रेटर व लेसर राजहंस (flamingos) सहित हजारों प्रवासी पक्षियों के लिए भोजन प्रदान करते हैं।
  • मिथक और इतिहास: स्थानीय विद्या के अनुसार, झील का निर्माण तब हुआ था जब देवी शाकंभरी ने छठी शताब्दी सीई में सूखे को समाप्त करने के लिए एक जंगल को खारे पानी के तालाब में बदल दिया था। बाद में मुगल सम्राटों ने नमक के पैन को नियंत्रित किया, और इसका स्वामित्व जयपुर और जोधपुर के राजकुमारों को चला गया।
  • नमक उत्पादन: मानसून के पानी के वाष्पित होने के बाद, नमक की एक मोटी परत बन जाती है। इस प्राकृतिक संसाधन ने सदियों से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन किया है।

अदालत का फैसला और उसके निहितार्थ

  • परियोजना का स्थान: प्रस्तावित सोलर पार्क झील से लगभग 2.25 किमी दूर है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इसने आर्द्रभूमि पर अतिक्रमण किया है, लेकिन एक विशेषज्ञ रिपोर्ट में साइट पर कोई जल निकाय नहीं पाया गया।
  • अदालत द्वारा निर्धारित शर्तें: पैनल ऊंचे होने चाहिए ताकि पक्षी नीचे घोंसला बना सकें और घूम सकें; काटे गए प्रत्येक पेड़ के लिए, तीन पौधे लगाने होंगे; और वर्षा जल चैनलों को अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है।
  • पारिस्थितिकी और विकास में संतुलन: पीठ ने सतत विकास (sustainable development) और एहतियाती दृष्टिकोण (precautionary approach) के सिद्धांतों पर भरोसा किया। इसने जोर दिया कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं आर्द्रभूमि और प्रवासी पक्षियों के आवासों की कीमत पर नहीं आनी चाहिए।

महत्व

Sambhar Lake पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक गतिविधियों में सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता का एक ज्वलंत उदाहरण है। नमक निष्कर्षण और नवीकरणीय ऊर्जा नौकरियां व राजस्व लाते हैं, लेकिन आर्द्रभूमि की पारिस्थितिक अखंडता की रक्षा के लिए उनकी योजना सावधानीपूर्वक बनाई जानी चाहिए। उच्च न्यायालय की शर्तें संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र के पास भविष्य की सौर परियोजनाओं के लिए एक मिसाल कायम करती हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि झील सतत विकास का समर्थन करते हुए प्रवासी पक्षियों के लिए एक अभयारण्य बनी रहे, निरंतर निगरानी और सामुदायिक भागीदारी आवश्यक होगी。

स्रोत

Times of India

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