Defence (रक्षा)

Sanshodhak Survey Vessel: भारतीय नौसेना, GRSE और हाइड्रोग्राफिक मैपिंग

Sanshodhak Survey Vessel: भारतीय नौसेना, GRSE और हाइड्रोग्राफिक मैपिंग

चर्चा में क्यों?

कोलकाता में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (Garden Reach Shipbuilders & Engineers - GRSE) द्वारा निर्मित चौथा और अंतिम सर्वे वेसल (लार्ज) [Survey Vessel (Large)] संशोधक (Sanshodhak), 30 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को वितरित किया गया था। यह जहाज जल्द ही भारत के जल क्षेत्र का विस्तृत हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण (hydrographic surveys) करने के लिए बेड़े (fleet) में शामिल होगा।

पृष्ठभूमि (Background)

अक्टूबर 2018 में, रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के पुराने हाइड्रोग्राफिक बेड़े (hydrographic fleet) को बदलने के लिए चार बड़े सर्वेक्षण जहाजों को डिजाइन और निर्माण करने के लिए GRSE के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। यह परियोजना यह सुनिश्चित करके आत्मनिर्भर भारत मिशन का समर्थन करती है कि 80 प्रतिशत से अधिक उपकरण घरेलू स्तर पर प्राप्त किए गए हैं। पहले तीन जहाज — संधायक (Sandhayak), निर्देशक (Nirdeshak) और इक्षक (Ikshak) — पहले ही वितरित किए जा चुके हैं।

संशोधक की विशेषताएं (Features of Sanshodhak)

  • आकार और प्रदर्शन (Size and performance): जहाज लगभग 110 मीटर लंबा है और इसका विस्थापन 3,400 टन है। ट्विन डीजल इंजन इसे 18 समुद्री मील (knots) से अधिक की शीर्ष गति (top speed) देते हैं।
  • हाइड्रोग्राफिक उपकरण (Hydrographic equipment): यह एक आधुनिक डेटा अधिग्रहण प्रणाली (data acquisition system), स्वायत्त पानी के नीचे के वाहन (autonomous underwater vehicles - AUVs), दूर से संचालित वाहन (remotely operated vehicles - ROVs), लंबी दूरी के अंतर जीपीएस पोजिशनिंग सिस्टम (long‑range differential GPS positioning systems) और डिजिटल साइड-स्कैन सोनार (digital side‑scan sonar) ले जाता है। ये उपकरण सीबेड स्थलाकृति (seabed topography) का नक्शा बनाते हैं और नेविगेशनल चार्ट (navigational charts) तैयार करते हैं।
  • सर्वेक्षण क्षमता (Survey capability): संशोधक तटीय और गहरे पानी के सर्वेक्षण (deep‑water surveys) के साथ-साथ समुद्र संबंधी (oceanographic) और भूभौतिकीय (geophysical) अध्ययन कर सकता है। यह उन क्षेत्रों के लिए छोटी सर्वेक्षण नावें भी तैनात कर सकता है जहां मुख्य जहाज प्रवेश नहीं कर सकता है।
  • बहु-भूमिका उपयोगिता (Multi‑role utility): मैपिंग (mapping) के अलावा, जहाज खोज और बचाव मिशनों में सहायता कर सकता है, सीमित रक्षा सहायता प्रदान कर सकता है और मानवीय सहायता (humanitarian assistance) और आपदा राहत अभियानों (disaster relief operations) में योगदान कर सकता है।

महत्व (Significance)

  • सुरक्षित नेविगेशन (Safe navigation): सर्वेक्षण जहाजों द्वारा उत्पादित सटीक चार्ट वाणिज्यिक और नौसेना दोनों जहाजों को लाभान्वित करते हुए भारतीय जल क्षेत्र में नेविगेट करने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
  • समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime domain awareness): उन्नत हाइड्रोग्राफिक डेटा (Enhanced hydrographic data) भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (exclusive economic zone) की निगरानी करने की क्षमता को मजबूत करता और संसाधन प्रबंधन और तटीय विकास में सहायता करता है।
  • स्वदेशी क्षमता (Indigenous capability): चार-जहाज परियोजना को पूरा करना भारत की विशेष जहाजों को डिजाइन करने और बनाने में बढ़ती दक्षता (growing proficiency) को प्रदर्शित करता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

संशोधक की डिलीवरी के साथ, नौसेना के पास अब अपने जल क्षेत्र को चार्ट करने (chart) के लिए सर्वेक्षण जहाजों का एक आधुनिक बेड़ा है। ये जहाज समुद्री व्यापार, रक्षा कार्यों और वैज्ञानिक अनुसंधान (scientific research) का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

स्रोत: Press Information Bureau

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