पर्यावरण

Sharavathi Pumped Storage: कर्नाटक वन्यजीव और जलविद्युत

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चर्चा में क्यों?

कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने प्रस्तावित शरावती पंप स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (Sharavathi Pumped Storage Hydroelectric Project) को दी गई मंजूरी को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के उल्लंघन में मंजूरी दी गई थी क्योंकि यह परियोजना शरावती वन्यजीव अभयारण्य (Sharavathi Wildlife Sanctuary) के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (eco-sensitive zone) के अंतर्गत आती है।

पृष्ठभूमि

शरावती पंप-भंडारण परियोजना का लक्ष्य विभिन्न ऊंचाइयों पर पानी का भंडारण करके और पीक डिमांड (peak demand) के दौरान टर्बाइनों के माध्यम से इसे छोड़कर लगभग 2,000 मेगावाट बिजली पैदा करना है। कर्नाटक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की योजना शरावती नदी पर दो मौजूदा जलाशयों के बीच परियोजना बनाने की है: तलकलले (Talakalale) बांध ऊपरी जलाशय बनाएगा जबकि गेरुसोप्पा (Gerusoppa) बांध निचले जलाशय के रूप में कार्य करेगा। ऑफ-पीक घंटों (off-peak hours) के दौरान पानी को ऊपर की ओर पंप किया जाएगा और मांग बढ़ने पर बिजली पैदा करने के लिए नीचे की ओर छोड़ा जाएगा। ऐसी प्रणालियां अतिरिक्त शक्ति (excess power) का भंडारण करके नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को एकीकृत करने में मदद करती हैं।

यह परियोजना पश्चिमी घाट का हिस्सा शरावती घाटी (Sharavathi Valley) के भीतर स्थित है, जो शेर-पूंछ वाले मकाक (lion-tailed macaque), हॉर्नबिल (hornbills) और किंग कोबरा (king cobras) जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों सहित समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। उच्च न्यायालय का नोटिस एक जनहित याचिका के बाद आया जिसमें तर्क दिया गया था कि राज्य वन्यजीव बोर्ड (State Wildlife Board) और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (National Board for Wildlife) से अनुमोदन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा 29 (Section 29) के साथ असंगत थे, जो अभयारण्यों के भीतर गतिविधियों को प्रतिबंधित करता है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अनुमोदन प्रक्रिया ने अभयारण्य के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र को नजरअंदाज कर दिया और वन्यजीवों की रक्षा के लिए दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया।

मुख्य बिंदु

  • परियोजना पैमाना: 2 गीगावाट की नियोजित क्षमता, जो इसे भारत की सबसे बड़ी पंप-भंडारण परियोजनाओं में से एक बनाती है।
  • भौगोलिक सेटिंग: कर्नाटक के शिवमोगा जिले (Shivamogga district) में शरावती नदी बेसिन में स्थित है। यह नदी पश्चिम की ओर बहती है और अरब सागर में गिरने से पहले प्रसिद्ध जोग फॉल्स (Jog Falls) का निर्माण करती है।
  • पर्यावरणीय चिंताएं: साइट शरावती वन्यजीव अभयारण्य के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के अंतर्गत आती है। आलोचकों की चेतावनी है कि निर्माण से आवास (habitats) बाधित हो सकते हैं और दुर्लभ प्रजातियों को खतरा हो सकता है।
  • जनहित याचिका का कानूनी आधार: याचिकाकर्ताओं ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा 29 का हवाला दिया, जो अभयारण्यों के अंदर वन्यजीव आवासों के विनाश, शोषण या विचलन को रोकता है।
  • सरकार की प्रतिक्रिया: उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला ऊर्जा बुनियादी ढांचे और जैव विविधता संरक्षण के बीच तनाव को उजागर करता है।

स्रोत: The Hindu

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