पर्यावरण

Sharavathi Sanctuary: शेर की पूंछ वाला मकाक और पश्चिमी घाट

Sharavathi Sanctuary: शेर की पूंछ वाला मकाक और पश्चिमी घाट

चर्चा में क्यों?

कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने राज्य सरकार को शरावती लायन-टेल्ड मैकाक अभयारण्य (Sharavathi Lion-Tailed Macaque Sanctuary) और इसके पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (eco-sensitive zone) के भीतर सभी निर्माण और जमीनी गतिविधियों को रोकने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ताओं (Petitioners) ने तर्क दिया कि प्रस्तावित 2,000-MW पंप स्टोरेज परियोजना (pumped storage project) नाजुक जंगलों (fragile forests) को नुकसान पहुंचाएगी और वन्यजीव संरक्षण कानूनों (wildlife protection laws) का उल्लंघन करेगी। अदालत का निर्देश ऊर्जा विकास (energy development) और संरक्षण (conservation) के बीच तनाव को उजागर करता है।

पृष्ठभूमि

यह अभयारण्य कर्नाटक के पश्चिमी घाट (Western Ghats) में स्थित है, जो अपनी असाधारण जैव विविधता (exceptional biodiversity) के लिए यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) के रूप में मान्यता प्राप्त एक पर्वत श्रृंखला है। 1972 में शरावती घाटी वन्यजीव अभयारण्य (Sharavathi Valley Wildlife Sanctuary) के रूप में स्थापित, संरक्षित क्षेत्र ने मूल रूप से शरावती नदी (Sharavathi River) बेसिन के साथ 431 वर्ग किलोमीटर को कवर किया था। 2019 में राज्य ने अघनाशिनी लायन-टेल्ड मैकाक कंजर्वेशन रिजर्व (Aghanashini Lion-Tailed Macaque Conservation Reserve - 299 किमी²) और आसन्न आरक्षित वनों (adjacent reserve forests) का विलय करके इसका विस्तार किया और इसका नाम बदलकर शरावती लायन-टेल्ड मैकाक अभयारण्य कर दिया, जिससे कुल क्षेत्रफल लगभग 930 किमी² हो गया। इसकी दक्षिणी सीमा मूकाम्बिका वन्यजीव अभयारण्य (Mookambika Wildlife Sanctuary) से सटी हुई है।

यह भूभाग अत्यधिक लहरदार (undulating) है, जो समुद्र तल से लगभग 94 मीटर से लेकर 1,100 मीटर से अधिक तक है। वनस्पति उष्णकटिबंधीय सदाबहार (tropical evergreen) और अर्ध-सदाबहार जंगलों (semi-evergreen forests) से लेकर नम पर्णपाती वुडलैंड (moist deciduous woodland), घास के मैदानों (grasslands) और सवाना (savanna) तक है। जंगलों में धूप (Dhoopa - Vateria indica), गुलमावू (Gulmavu - Drypetes roxburghii), सुरहोन्ने (Surahonne - Calophyllum tomentosum), मावु (Mavu - Mangifera indica) और नंदी (Nandi - Garcinia gummi-gutta) जैसी प्रजातियां शामिल हैं। यह क्षेत्र मिरिस्टिका दलदलों (Myristica swamps) के लिए भी जाना जाता है - जायफल जैसे पेड़ों (nutmeg-like trees) के प्रभुत्व वाले प्राचीन मीठे पानी के दलदल वाले जंगल (freshwater swamp forests)।

अभयारण्य का नाम, लायन-टेल्ड मैकाक (lion-tailed macaque) (Macaca silenus), एक लुप्तप्राय प्राइमेट (endangered primate) है जो केवल भारत के पश्चिमी घाटों (Western Ghats) में पाया जाता है। वयस्कों के शरीर की लंबाई 40-61 सेंटीमीटर होती है, जिसमें नर का वजन 5-10 किलोग्राम और मादा का वजन 3-6 किलोग्राम होता है। उनके पास काले फर (black fur), सिर के चारों ओर एक चांदी-ग्रे अयाल (silver-grey mane) और एक गुच्छेदार पूंछ (tail tipped with a tuft) होती है, जो शेर की पूंछ जैसा दिखता है। ये मैकाक सदाबहार (evergreen) और मानसूनी जंगलों (monsoon forests) की ऊपरी छतरी (upper canopy) में रहते हैं और बड़े, अबाधित वन पैच (undisturbed forest patches) पर अत्यधिक निर्भर हैं। अभयारण्य के अन्य वन्यजीवों (wildlife) में बाघ, तेंदुए, जंगली कुत्ते, सियार, भालू, चित्तीदार हिरण (spotted deer), सांभर, भौंकने वाले हिरण (barking deer) और माउस हिरण शामिल हैं।

मुद्दे और महत्व

  • न्यायालय का निर्देश (Court directive): उच्च न्यायालय का आदेश कानूनी (legal) और पर्यावरणीय चिंताओं (environmental concerns) को दूर किए जाने तक प्रस्तावित शरावती पंप स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना (Sharavathi pumped storage hydroelectric project) से संबंधित जमीनी गतिविधियों (ground activities) को निलंबित कर देता है। याचिकाकर्ताओं (Petitioners) का तर्क है कि परियोजना आवासों को विखंडित (fragment habitats) कर सकती है और लुप्तप्राय प्रजातियों (endangered species) को खतरे में डाल सकती है।
  • जैव विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity hotspot): यह अभयारण्य लायन-टेल्ड मैकाक (lion-tailed macaques) की कुछ अंतिम व्यवहार्य आबादी (viable populations) और कई अन्य वनस्पतियों और जीवों (flora and fauna) की रक्षा करता है। इसके सदाबहार वन (evergreen forests) वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट (global biodiversity hotspot) का हिस्सा हैं और जल नियमन (water regulation) और कार्बन पृथक्करण (carbon sequestration) जैसी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं (ecosystem services) प्रदान करते हैं।
  • विकास और संरक्षण को संतुलित करना: कर्नाटक का लक्ष्य अक्षय ऊर्जा क्षमता (renewable energy capacity) को बढ़ाना है, लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों (sensitive areas) में बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं (infrastructure projects) अपूरणीय पारिस्थितिक क्षति (irreversible ecological damage) का कारण बन सकती हैं। अदालत का हस्तक्षेप इस तरह की परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले पर्यावरणीय प्रभावों (environmental impacts) का सावधानीपूर्वक आकलन करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
  • सामुदायिक भागीदारी (Community involvement): स्थानीय समुदायों और पर्यावरण समूहों ने निर्णय लेने में अधिक पारदर्शिता (transparency) और परामर्श (consultation) का आह्वान किया है, इस बात पर जोर देते हुए कि टिकाऊ आजीविका (sustainable livelihoods) और पारिस्थितिक अखंडता (ecological integrity) साथ-साथ चलनी चाहिए।

निष्कर्ष

शरावती लायन-टेल्ड मैकाक अभयारण्य पश्चिमी घाट (Western Ghats) की पारिस्थितिक समृद्धि (ecological richness) और ऊर्जा मांगों (energy demands) के साथ संरक्षण (conservation) को संतुलित करने की चुनौतियों (challenges) का उदाहरण देता है। इस अभयारण्य की रक्षा करना लुप्तप्राय प्रजातियों (endangered species) और वन संसाधनों (forest resources) पर निर्भर समुदायों की भलाई को सुरक्षित करता है। इसकी सीमाओं (boundaries) के भीतर किसी भी विकास को पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) की पवित्रता (sanctity) का सम्मान करना चाहिए और वन्यजीवों (wildlife) और पर्यावरण कानूनों (environmental laws) का पालन करना चाहिए।

स्रोत: The Indian Express

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