रक्षा

Sheshnaag-150 Drone: स्वार्म अटैक, लॉन्ग-रेंज UAV और AI

Sheshnaag-150 Drone: स्वार्म अटैक, लॉन्ग-रेंज UAV और AI

चर्चा में क्यों?

भारत ने शेषनाग-150 (Sheshnaag‑150) के नाम से जाने जाने वाले एक नए लंबी दूरी (long‑range) के स्वार्म अटैक मानवरहित हवाई सिस्टम (swarm attack unmanned aerial system) का विकास किया है। मार्च 2026 की रिपोर्टों से पता चला है कि स्वायत्त ड्रोन (autonomous drone) 1,000 किमी से अधिक की यात्रा कर सकता है और छोटे हथियारों के झुंड (swarm of smaller munitions) का उपयोग करके सटीक हमले कर सकता है।

पृष्ठभूमि

स्वार्म ड्रोन (Swarm drones) में कई छोटे, कम लागत वाले (low‑cost) ड्रोन होते हैं जो भारी संख्या और समन्वित युद्धाभ्यास (coordinated manoeuvres) के माध्यम से वायु-रक्षा प्रणालियों (air‑defence systems) को प्रभावित कर सकते हैं। वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (artificial intelligence) द्वारा निर्देशित होते हैं और सामूहिक रूप से (collectively) निर्णय ले सकते हैं। रक्षा अनुसंधान एजेंसियों (defence research agencies) के समर्थन से एक निजी भारतीय स्टार्ट-अप (Indian start‑up) द्वारा विकसित शेषनाग-150 (Sheshnaag‑150) प्रणाली को 25-40 किलोग्राम पेलोड (payload) ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

कथित तौर पर यह ड्रोन उन्नत दृश्य नेविगेशन (advanced visual navigation) और सुरक्षित संचार (secure communication) का उपयोग करके अपने घूमने वाले हथियारों के झुंड को लक्ष्य तक निर्देशित करता है। यह ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान सीखे गए सबक से उभरा है, जब भारत ने कठिन हिमालयी इलाके (Himalayan terrain) में दूर से संचालित वाहनों का इस्तेमाल किया था। शेषनाग-150 स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी (indigenous defence technology) के लिए भारत के प्रयास का हिस्सा है और इसका उद्देश्य कम लागत (lower cost) के साथ लंबी दूरी की सटीकता (long‑range precision) की पेशकश करके बैलिस्टिक मिसाइलों (ballistic missiles) और पारंपरिक ड्रोन (conventional drones) के पूरक के रूप में कार्य करना है।

मुख्य बिंदु और महत्व

  • रेंज और पेलोड (Range and payload): 1,000 किमी से अधिक की विज्ञापित रेंज (advertised range) और 40 किलोग्राम तक के पेलोड के साथ, ड्रोन शत्रुतापूर्ण क्षेत्र (hostile territory) के अंदर गहरे लक्ष्यों पर हमला कर सकता है।
  • स्वार्म क्षमताएं (Swarm capabilities): एक मदर ड्रोन दर्जनों छोटे हथियारों (smaller munitions) को छोड़ता है जो उनके हमले का समन्वय करते हैं, जिससे दुश्मन की हवाई सुरक्षा के लिए अवरोधन (interception) मुश्किल हो जाता है।
  • AI नेविगेशन: ऑनबोर्ड एल्गोरिदम (Onboard algorithms) और दृश्य नेविगेशन (visual navigation) झुंड को बाधाओं और जाम हुए संचार (jammed communications) के अनुकूल होने की अनुमति देते हैं।
  • स्वदेशीकरण (Indigenisation): घरेलू स्तर पर ऐसी प्रणालियों को विकसित करने से आयात (imports) पर निर्भरता कम होती है और भारत के रक्षा निर्यात (defence exports) को बढ़ावा मिल सकता है।

स्रोत: Business Standard

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