चर्चा में क्यों?
रूस के कमचटका प्रायद्वीप (Kamchatka Peninsula) में स्थित शिवेलुच (Shiveluch - या शेवेलुच) ज्वालामुखी का जून 2026 की शुरुआत में विस्फोट का चरण (eruptive phase) जारी रहा, जिससे राख के गुबार (ash plumes) आकाश में 10.8 किलोमीटर तक फैल गए। निगरानी एजेंसियों ने विमानन रंग कोड (aviation colour code) को 'ऑरेंज' (Orange) पर रखा, जो बढ़ी हुई गतिविधि का संकेत देता है。
पृष्ठभूमि
शिवेलुच कुरील-कमचटका (Kuril-Kamchatka) ज्वालामुखी चाप (volcanic arc) के उत्तरी छोर पर स्थित एक स्ट्रैटोवोल्केनो (stratovolcano) है। लगभग 3,283 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, यह लगभग 60-70 हजार साल पहले बना था और प्रायद्वीप पर सबसे बड़े और सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। इसका शिखर एक 9 किलोमीटर चौड़े काल्डेरा (caldera) द्वारा कटा हुआ है, जिसके भीतर 1999 से लावा डोम (lava dome) विकसित हो रहा है。
भूवैज्ञानिक विशेषताएं और विस्फोट
- बार-बार विस्फोट (Frequent eruptions): पिछले 10,000 वर्षों में शिवेलुच ने कम से कम 60 बड़े विस्फोटों का अनुभव किया है। इसके मैग्मा पानी और गैसों से भरपूर होते हैं, जो उन्हें अत्यधिक विस्फोटक (explosive) बनाते हैं।
- काल्डेरा और लावा डोम (Caldera and lava dome): 1964 में एक विनाशकारी दक्षिणी-पार्श्व (south-flank) पतन ने एक गहरा क्रेटर बनाया और पायरोक्लास्टिक प्रवाह (pyroclastic flows) उत्पन्न किया जो लगभग 100 किलोमीटर तक फैल गया। काल्डेरा के भीतर चल रहा डोम (dome) का विकास समय-समय पर ढह जाता है, जिससे राख के गुबार और मलबे का हिमस्खलन (debris avalanches) होता है।
- हाल की गतिविधि (Recent activity): अगस्त 1999 से ज्वालामुखी लगातार सक्रिय है। जून 2026 में साप्ताहिक रिपोर्टों में 8-10 किमी तक उठने वाले और सैकड़ों किलोमीटर तक बहने वाले राख के गुबार का उल्लेख किया गया है। अप्रैल 2023 में एक शक्तिशाली विस्फोट ने राख को 16-17 किमी तक भेज दिया, जिससे गांवों में ज्वालामुखी की धूल (volcanic dust) छा गई।
वैज्ञानिक महत्व और खतरे
शिवेलुच सबडक्शन-ज़ोन (subduction-zone) ज्वालामुखी और विस्फोटक मैग्मा (explosive magmas) उत्पन्न करने में पानी की भूमिका के बारे में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। इसके विस्फोट से आस-पास के समुदायों, विमानन (aviation) और जलवायु को खतरा होता है, क्योंकि राख के गुबार हवाई मार्गों को बाधित कर सकते हैं और बड़े क्षेत्रों में राख जमा कर सकते हैं。
निष्कर्ष
शिवेलुच की निरंतर गतिविधि हमें याद दिलाती है कि ज्वालामुखी गतिशील प्रणालियां हैं जिन्हें निरंतर निगरानी की आवश्यकता है। रिमोट सेंसिंग (remote sensing) और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (early-warning systems) में प्रगति ऐसे विशाल ज्वालामुखियों की छाया में रहने वाले समुदायों के लिए जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक है。