पर्यावरण

Silent Valley Bird Survey: पश्चिमी घाट और संरक्षण

Silent Valley Bird Survey: पश्चिमी घाट और संरक्षण

चर्चा में क्यों?

फरवरी 2026 में केरल के साइलेंट वैली नेशनल पार्क (Silent Valley National Park) में आयोजित एक व्यापक पक्षी सर्वेक्षण (comprehensive bird survey) में 192 प्रजातियों (species) को दर्ज किया गया, जिनमें कई प्रवासी (migrants) और स्थानिक प्रजातियां (endemic species) शामिल हैं जो इस क्षेत्र में शायद ही कभी देखी जाती हैं। 85 पक्षी देखने वालों (birdwatchers) को शामिल करने वाला यह सर्वेक्षण, पार्क की पूरी सीमा (entire extent) को कवर करने वाला पहला सर्वेक्षण था।

पृष्ठभूमि

साइलेंट वैली नेशनल पार्क नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व (Nilgiri Biosphere Reserve) में लगभग 237 वर्ग किमी को कवर करता है। पश्चिमी घाट (Western Ghats) में स्थित, इसमें अबाधित उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (tropical evergreen forests) और मोंटेन घास के मैदान (montane grasslands) शामिल हैं। इस क्षेत्र ने 1970 और 1980 के दशक में राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया जब पर्यावरणविदों (environmentalists) ने एक जलविद्युत बांध (hydroelectric dam) के निर्माण का सफलतापूर्वक विरोध किया जो घाटी को जलमग्न (submerged) कर देता। "सेव साइलेंट वैली (Save Silent Valley)" आंदोलन के कारण 1984 में इस क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान (national park) घोषित किया गया।

फरवरी 2026 के सर्वेक्षण के दौरान, टीमों (teams) ने विभिन्न ऊँचाइयों (elevations) और आवासों (habitats) में 31 मार्गों (routes) को पार किया। मुख्य आकर्षण (Highlights) में एशियन हाउस मार्टिंस (Asian house martins - केरल में शायद ही कभी दर्ज किया गया एक प्रवासी निगल - migratory swallow) और स्थानिक प्रजातियां (endemic species) जैसे नीलगिरि वुड पिजन (Nilgiri wood pigeon) और मालाबार ट्रोगोन (Malabar trogon) को देखा गया। अभ्यास ने एवियन विविधता (avian diversity) की निगरानी और पार्क के पारिस्थितिक स्वास्थ्य (ecological health) का आकलन करने के लिए बेसलाइन डेटा (baseline data) प्रदान किया।

मुख्य बिंदु और महत्व

  • जैव विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity hotspot): साइलेंट वैली यूनेस्को-सूचीबद्ध (UNESCO‑listed) पश्चिमी घाट का हिस्सा है, जिसे स्थानिकता (endemism) और प्रजातियों की समृद्धि (species richness) के उच्च स्तर के लिए मान्यता प्राप्त है।
  • नागरिक विज्ञान (Citizen science): सर्वेक्षण स्वयंसेवकों (volunteers), पार्क अधिकारियों (park officials) और पक्षीविज्ञानियों (ornithologists) को एक साथ लाया, यह प्रदर्शित करता है कि नागरिक भागीदारी (citizen participation) वैज्ञानिक डेटा संग्रह (scientific data collection) को कैसे बढ़ाती है।
  • संरक्षण जागरूकता (Conservation awareness): दुर्लभ पक्षियों (rare birds) को उजागर करना संरक्षण प्रयासों (conservation efforts) और जिम्मेदार इकोटूरिज्म (responsible ecotourism) को प्रोत्साहित करता है।
  • दीर्घकालिक निगरानी (Long‑term monitoring): समान मार्गों के साथ सर्वेक्षण (surveys) को दोहराने से जलवायु परिवर्तन (climate change) या आवास की गड़बड़ी (habitat disturbance) के कारण पक्षियों की आबादी (bird populations) में होने वाले बदलावों (changes) का पता लगाने में मदद मिलेगी।

स्रोत: The Hindu, Kerala Tourism

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