पर्यावरण

Simbalbara National Park: कर्नल शेर जंग, हिमाचल प्रदेश और इको-ज़ोन

Simbalbara National Park: कर्नल शेर जंग, हिमाचल प्रदेश और इको-ज़ोन

चर्चा में क्यों?

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में राज्य सरकार की उस अधिसूचना (notification) को रद्द कर दिया है, जिसमें कर्नल शेर जंग राष्ट्रीय उद्यान (Col. Sher Jung National Park - जिसे सिंबलबारा - Simbalbara भी कहा जाता है) के आसपास की पंचायत भूमि को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (eco-sensitive zone) के रूप में नामित किया गया था। स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि इस प्रक्रिया ने सार्वजनिक परामर्श (public consultation) को दरकिनार कर दिया और सामुदायिक वनों (community forests) का उपयोग करने के उनके अधिकारों को सीमित कर दिया। यह निर्णय संरक्षण और आस-पास के ग्रामीणों की आजीविका के बीच नाजुक संतुलन को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

सिंबलबारा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की शिवालिक तलहटी (Shiwalik foothills) में एक छोटा राष्ट्रीय उद्यान है, जो हरियाणा के कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (Kalesar National Park) से सटा है। इस क्षेत्र को 1958 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था और 2010 में राष्ट्रीय उद्यान के रूप में अपग्रेड किया गया था। लगभग 28 वर्ग किलोमीटर में फैले इस पार्क का नाम एक स्वतंत्रता सेनानी और संरक्षणवादी (conservationist) कर्नल शेर जंग के नाम पर रखा गया है। साल (Sal) के पेड़ों के वर्चस्व वाले इसके नम पर्णपाती वन (moist deciduous forests) उत्तराखंड में राजाजी राष्ट्रीय उद्यान (Rajaji National Park) को हरियाणा के कालेसर से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे (wildlife corridor) का हिस्सा बनते हैं।

पार्क की विशेषताएं

  • वनस्पति: पार्क के घने जंगलों में साल (शोरिया रोबस्टा - Shorea robusta) और टर्मिनलिया प्रजातियों (Terminalia species) का वर्चस्व है, जिसमें धाराओं के साथ जामुन और यूकेलिप्टस के पैच हैं। खुले घास के मैदान शाकाहारी जीवों के लिए चराई प्रदान करते हैं।
  • वन्यजीव: सिंबलबारा नीलगाय (ब्लू बुल), सांभर और चित्तीदार हिरण (spotted deer), गोरल (goral), बार्किंग डियर (barking deer), जंगली सूअर, साही (porcupine) और रीसस मकाक (rhesus macaque) का समर्थन करता है। बाघों और तेंदुओं के कभी-कभार दिखाई देने से एक गलियारे के रूप में इसकी भूमिका पर प्रकाश पड़ता है।
  • पक्षी जीवन: एवियन (Avian) निवासियों में इंडियन रोलर (Indian roller), डॉलर बर्ड, विभिन्न किंगफिशर (kingfishers) और हॉर्नबिल (hornbills) के साथ-साथ क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल (crested serpent eagle) और ब्राह्मणी काइट (Brahminy kite) जैसे रैप्टर शामिल हैं।
  • हाइड्रोलॉजी: एक बारहमासी जलधारा (perennial stream) पार्क से होकर गुजरती है, जो नमी की स्थिति बनाए रखती है जो समृद्ध अंडरस्टोरी वनस्पति (understorey vegetation) का समर्थन करती है। कोमल पहाड़ियाँ और उथली घाटियाँ इस भूभाग को वन्यजीवों और पर्यटकों के लिए सुलभ बनाती हैं।

महत्व

  • वन्यजीव गलियारा: सिंबलबारा राजाजी-कालेसर परिदृश्य को जोड़ता है, जिससे हाथियों, तेंदुओं और अन्य जानवरों को बड़े भंडार (reserves) के बीच जाने की अनुमति मिलती है।
  • इकोटूरिज्म (Ecotourism): यह पार्क साल के जंगलों के माध्यम से शांत पैदल यात्रा ट्रेल्स (walking trails) प्रदान करता है और बर्डवॉचिंग (birdwatching) के लिए लोकप्रिय है। जिम्मेदार पर्यटन (Responsible tourism) स्थानीय आजीविका का समर्थन कर सकता है।
  • समुदाय की निर्भरता: पार्क के आसपास के ग्रामीण वनोपज (forest produce) और चराई पर निर्भर हैं। पर्यावरण-संवेदनशील ज़ोनिंग (Eco-sensitive zoning) को प्रथागत अधिकारों (customary rights) के साथ पारिस्थितिक सुरक्षा को संतुलित करना चाहिए।

निष्कर्ष

इको-सेंसिटिव जोन की अधिसूचना को रद्द करने से कर्नल शेर जंग राष्ट्रीय उद्यान का पारिस्थितिक महत्व कम नहीं होता है। इसके बजाय यह समावेशी संरक्षण नीतियों (inclusive conservation policies) की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है जो नाजुक शिवालिक परिदृश्य में वन्यजीव गलियारों को संरक्षित करते हुए स्थानीय समुदायों का सम्मान करते हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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