चर्चा में क्यों?
कर्नाटक के शिवमोगा (Shivamogga) के पास राष्ट्रकवि कुवेम्पु हवाई अड्डे (Rashtrakavi Kuvempu Airport) के परिसर में आठ साल की एक मादा स्लॉथ भालू (sloth bear) अपनी रिहाई की जगह (release site) से लगभग 50 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद भटक कर आ गई। वन्यजीव अधिकारियों ने जानवर को शांत किया (tranquilised) और उसे एक चिड़ियाघर में स्थानांतरित (relocated) कर दिया, जिससे भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष (human–wildlife conflict) की ओर ध्यान आकर्षित हुआ।
पृष्ठभूमि (Background)
स्लॉथ भालू (मेलर्सस उर्सिनस - Melursus ursinus) भारतीय उपमहाद्वीप (Indian subcontinent) का मूल निवासी है। इसके झबरा काले फर (shaggy black fur), लंबे घुमावदार पंजे (long curved claws) और चींटियों और दीमकों (termites) को चूसने के लिए अनुकूलित एक लचीला थूथन (flexible snout) होता है। वयस्क मादाओं का वजन लगभग 55-95 किलोग्राम होता है और वे एक या दो शावकों (cubs) को जन्म देती हैं।
स्लॉथ भालू पूरे भारत, श्रीलंका और नेपाल में जंगलों, घास के मैदानों (grasslands) और स्क्रब भूमि (scrublands) में निवास करते हैं। निवास स्थान के नुकसान, अवैध शिकार और मनुष्यों के साथ संघर्ष के कारण उन्हें IUCN रेड लिस्ट (IUCN Red List) में सुभेद्य (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। कभी-कभी गांवों या औद्योगिक स्थलों (industrial sites) से समस्याग्रस्त व्यक्तियों को हटाने के लिए ट्रांसलोकेशन (Translocation) का उपयोग किया जाता है।
शिवमोगा की घटना (The Shivamogga incident)
- ट्रांसलोकेशन (Translocation): भालू को इससे पहले अशांति पैदा करने के बाद एक खनन शहर (mining town) तोरणागल्लू (Toranagallu) में पकड़ा गया था। वन अधिकारियों ने उसे जीपीएस कॉलर (GPS collar) लगाया और भद्रावती (Bhadravathi) के पास एक जंगल में छोड़ दिया।
- लंबी यात्रा (Long journey): कुछ ही दिनों में भालू ने लगभग 50 किलोमीटर की यात्रा की, संभवतः अपनी होमिंग वृत्ति (homing instinct) का पालन करते हुए, और हवाई अड्डे की परिधि (airport perimeter) में प्रवेश कर गया। अधिकारियों ने जीपीएस कॉलर का उपयोग करके इसके आवागमन पर नजर रखी।
- सुरक्षित पकड़ (Safe capture): पशु चिकित्सकों (veterinarians) की एक टीम ने जानवर को शांत किया और उसे शिवमोगा के प्राणी उद्यान (zoological park) में ले गई, जहां निगरानी में इसकी देखभाल की जाएगी।
सबक और चुनौतियां (Lessons and challenges)
- निवास स्थान का विखंडन (Habitat fragmentation): सड़कों, खदानों और बस्तियों (settlements) के विस्तार से वन आवरण (forest cover) कम हो जाता है, जिससे भालू और अन्य वन्यजीव मानव स्थानों में आ जाते हैं।
- अप्रभावी स्थानांतरण (Ineffective relocation): कई जानवर स्थानांतरण (translocation) के बाद अपनी होम रेंज (home ranges) में लौटने की कोशिश करते हैं। निवास स्थान की गुणवत्ता और कनेक्टिविटी (connectivity) को संबोधित किए बिना, ऐसे प्रयास केवल अस्थायी समाधान प्रदान कर सकते हैं।
- जन जागरूकता (Public awareness): समुदायों को संघर्षों से बचने पर शिक्षा की आवश्यकता है, जैसे कि सुरक्षित अपशिष्ट निपटान (secure waste disposal) और वन्यजीवों को उकसाने या खिलाने से बचना।
निष्कर्ष (Conclusion)
एक हवाई अड्डे पर स्लॉथ भालू की अप्रत्याशित यात्रा (unexpected visit) उन दबावों को उजागर करती है जो मानवीय गतिविधियों के विस्तार के रूप में वन्यजीवों का सामना करते हैं। दीर्घकालिक संरक्षण के लिए सुरक्षित सह-अस्तित्व (coexistence) सुनिश्चित करने के लिए आवासों की रक्षा करने, गलियारे (corridors) बनाने और स्थानीय समुदायों को शामिल करने की आवश्यकता होगी।
स्रोत: The Hindu