अर्थव्यवस्था

SMDI योजना: उप-योजनाएँ, वित्त पोषण सीमा और महत्व

SMDI योजना: उप-योजनाएँ, वित्त पोषण सीमा और महत्व
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समाचार में क्यों?

Department of Pharmaceuticals ने घरेलू विनिर्माण (domestic manufacturing) को बढ़ावा देने के लिए जून 2026 में Scheme for Strengthening of Medical Device Industry (SMDI) के तहत आवेदन आमंत्रित किए। प्रस्तावों के लिए आह्वान में ऐसी उप-योजनाएं शामिल हैं जो प्रमुख घटकों को बनाने के लिए पूंजीगत सब्सिडी (capital subsidies) और नैदानिक अध्ययन (clinical studies) के लिए धन की पेशकश करती हैं। यह योजना आयातित चिकित्सा उपकरणों पर निर्भरता कम करने के भारत के व्यापक लक्ष्य का समर्थन करती है。

पृष्ठभूमि

भारत के चिकित्सा उपकरण बाजार (medical device market) का मूल्य लगभग US$14 billion है और 2030 तक यह दोगुना हो सकता है। हालांकि, घरेलू विनिर्माण अभी भी आयातित घटकों पर काफी हद तक निर्भर है और इसमें साझा बुनियादी ढांचे (common infrastructure) का अभाव है। इसे दूर करने के लिए, Union Minister for Chemicals and Fertilizers ने ₹500 crore के कुल परिव्यय (outlay) के साथ नवंबर 2024 में SMDI लॉन्च किया। यह योजना विनिर्माण, कौशल विकास, नैदानिक अनुसंधान और प्रचार (promotion) सहित उद्योग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को लक्षित करती है।

SMDI के प्रमुख घटक

  • समूहों के लिए साझा सुविधाएं (₹110 crore): सरकार R&D प्रयोगशालाओं, डिजाइन और परीक्षण केंद्रों तथा पशु प्रयोगशालाओं जैसे साझा बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। साझा सुविधाओं के लिए ₹20 crore तक और परीक्षण सुविधाओं के लिए ₹5 crore तक का अनुदान (Grants) उपलब्ध है।
  • सीमान्त निवेश योजना (Marginal Investment Scheme) (₹180 crore): यह उप-योजना प्रमुख घटकों, कच्चे माल और सहायक उपकरण के निर्माताओं को 10-20% (₹10 crore प्रति परियोजना तक) की एकमुश्त पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करती है। इसका उद्देश्य आयात निर्भरता को कम करना और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।
  • क्षमता निर्माण और कौशल विकास (₹100 crore): चिकित्सा उपकरणों को डिजाइन करने और उनका उत्पादन करने में सक्षम कुशल कार्यबल विकसित करने के लिए सहायता प्रदान की जाती है। फंडिंग में केंद्रीय संस्थानों में मास्टर कोर्स के लिए ₹21 crore तक और तकनीकी प्रशिक्षण में शॉर्ट-टर्म तथा डिप्लोमा कोर्स के लिए वजीफा (stipends) शामिल है।
  • Medical Device Clinical Studies Support Scheme (₹100 crore): वित्तीय सहायता कंपनियों को पशु अध्ययन, नैदानिक जांच (clinical investigations) और पोस्ट-मार्केट फॉलो-अप अध्ययन करने में मदद करती है। अनुदान पशु अध्ययन के लिए ₹2.5 crore से लेकर नैदानिक जांच के लिए ₹5 crore और इन-विट्रो डायग्नोस्टिक (in-vitro diagnostic) उत्पादों के नैदानिक प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए ₹1 crore तक है। इस सहायता का उद्देश्य मजबूत डेटा तैयार करना और विनियामक अप्रूवल (regulatory approvals) को सुविधाजनक बनाना है।
  • Medical Device Promotion Scheme (₹10 crore): उद्योग संघों और निर्यात परिषदों के लिए सम्मेलन आयोजित करने, सर्वेक्षण करने और क्षेत्र के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग उपलब्ध है। यह सहयोग और ज्ञान साझा करने को प्रोत्साहित करता है।

प्रस्तावों के लिए हालिया निमंत्रण

जून 2026 में Department of Pharmaceuticals ने निर्माताओं को सीमान्त निवेश और नैदानिक अध्ययन सहायता उप-योजनाओं के तहत आवेदन करने के लिए आमंत्रित किया। योग्य परियोजनाएं विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए ₹10 crore तक या नैदानिक अनुसंधान के लिए ₹5 crore तक प्राप्त कर सकती हैं। आवेदन एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जुलाई 2026 तक जमा किए जाने हैं। इस निमंत्रण का उद्देश्य भारत में आत्मनिर्भर चिकित्सा उपकरण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में तेजी लाना है।

निष्कर्ष

Scheme for Strengthening of Medical Device Industry भारत को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपकरणों का केंद्र बनाने का एक व्यापक प्रयास है। साझा बुनियादी ढांचे का वित्तपोषण करके, पूंजीगत सब्सिडी देकर, कौशल विकसित करके और नैदानिक अनुसंधान का समर्थन करके, सरकार को आयात निर्भरता कम करने और नवाचार को बढ़ावा देने की उम्मीद है। योजना की सफलता के लिए निर्माताओं और शोधकर्ताओं की समय पर भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।

स्रोत: Press Information Bureau

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