Environment (पर्यावरण)

Snowy Owl Conservation: आर्कटिक टुंड्रा, CMS COP15 और जलवायु परिवर्तन संकेतक

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चर्चा में क्यों?

मार्च 2026 में ब्राजील के कैम्पो वर्डे (Campo Verde) में आयोजित कन्वेंशन ऑन द कंज़र्वेशन ऑफ माइग्रेटरी स्पीशीज़ ऑफ वाइल्ड एनिमल्स (Convention on the Conservation of Migratory Species of Wild Animals - CMS) के COP15 शिखर सम्मेलन में, सदस्य देशों ने 40 नई प्रजातियों को अंतरराष्ट्रीय संरक्षण (international protection) की सूची में शामिल करने पर सहमति व्यक्त की। इसमें बर्फीला उल्लू (snowy owl - बुबो स्कैंडियाकस) भी शामिल है। इस फैसले के बाद CMS के सदस्य देशों के लिए इस प्रजाति और इसके आवास का संरक्षण करना अनिवार्य हो गया है।

पृष्ठभूमि

बर्फीला उल्लू एक बड़ा और मुख्य रूप से सफेद रंग का उल्लू है, जो उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया के आर्कटिक टुंड्रा (Arctic tundra) का मूल निवासी (native) है। अधिकांश उल्लुओं के विपरीत, यह दिन के समय सक्रिय (active during the day) रहता है, जो आर्कटिक की गर्मियों में लगातार रहने वाले दिन के प्रकाश के अनुकूल है। ये पक्षी खानाबदोश (nomadic) होते हैं और उन जगहों पर प्रजनन करते हैं जहां इनके शिकार - मुख्य रूप से लेमिंग (lemmings) और अन्य छोटे स्तनधारी - प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं।

शारीरिक विशेषताएं (Physical characteristics)

  • आकार (Size): बर्फीले उल्लू के पंखों का फैलाव (wingspan) 4-5 फीट होता है और वजन लगभग 1.6 किलोग्राम होता है, जो इन्हें उल्लू की सबसे भारी प्रजातियों में से एक बनाता है।
  • पंख (Plumage): नर (Males) जैसे-जैसे बड़े होते हैं, वे लगभग पूरी तरह से सफेद हो जाते हैं, जबकि मादाओं (females) के पंखों पर गहरे रंग की धारियां (dark bars) बनी रहती हैं। पंखों से ढके पैर, घने पंख और रोएं (down) की एक मोटी परत इन्हें शून्य से नीचे के तापमान (sub‑zero temperatures) में भी गर्म रखती है।
  • देखने और सुनने की तीव्र क्षमता: इन उल्लुओं की चोंच पर वस्तुओं का पता लगाने के लिए ब्रिसल्स (bristles) होते हैं। इनकी देखने और सुनने की तीव्र क्षमता बर्फीले परिदृश्यों में शिकार का पता लगाने में मदद करती है।

व्यवहार और पारिस्थितिकी (Behaviour and ecology)

  • दिन के शिकारी (Diurnal hunters): बर्फीले उल्लू दिन और रात दोनों समय शिकार करते हैं। शिकार को देखने और उस पर झपटने के लिए ये "बैठो-और-इंतजार करो (sit‑and‑wait)" की रणनीति अपनाते हैं। ये छोटे जानवरों को पूरा निगल (swallow whole) सकते हैं और बाद में न पचने वाली हड्डियों और फर को उगल (regurgitating) देते हैं।
  • खानाबदोश प्रजनन (Nomadic breeding): ये हर साल एक ही स्थान पर घोंसला (nest) नहीं बनाते हैं; इनका प्रजनन लेमिंग (lemmings) की प्रचुरता पर निर्भर करता है। जिन वर्षों में शिकार अधिक होता है, जोड़े बड़ी संख्या में बच्चों को पाल सकते हैं, कभी-कभी 10 से अधिक चूजे (chicks)।
  • क्षेत्राधिकार (Territoriality): बर्फीले उल्लू अपने बड़े क्षेत्रों की रक्षा करते हैं और चील (eagles) व बाज (hawks) सहित अन्य शिकारियों को भी भगा सकते हैं।

खतरे और संरक्षण की स्थिति (Threats and conservation status)

  • जलवायु परिवर्तन (Climate change): आर्कटिक के बढ़ते तापमान से लेमिंग की आबादी कम हो जाती है और प्रजनन के अनुकूल आवास (breeding habitat) सिकुड़ जाता है। बर्फ पिघलने से इनके प्रवास मार्ग (migration routes) भी प्रभावित होते हैं।
  • मानवीय हस्तक्षेप (Human disturbance): वाहनों और विमानों से टक्कर, मछली पकड़ने के जाल (fishing gear) में फंसना और प्रदूषकों (pollutants) के संपर्क में आने से इन्हें काफी खतरा है।
  • अंतरराष्ट्रीय संरक्षण (International protection): 2026 के CMS फैसले के अनुसार सदस्य देशों को बर्फीले उल्लुओं की रक्षा करने, उनके आवासों का संरक्षण व पुनर्स्थापन करने, प्रवास की बाधाओं को रोकने और अनुसंधान में समन्वय (coordinate research) स्थापित करने की आवश्यकता है।
  • IUCN स्थिति: इस प्रजाति को वर्तमान में IUCN रेड लिस्ट में सुभेद्य (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

निष्कर्ष

बर्फीला उल्लू आर्कटिक का एक करिश्माई शिकारी (charismatic predator) होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन का एक संवेदनशील संकेतक (sensitive indicator) भी है। CMS के तहत इसे अंतरराष्ट्रीय सूची में शामिल किया जाना समन्वित संरक्षण (coordinated conservation) की आवश्यकता को रेखांकित करता है। इस प्रतिष्ठित प्रजाति को बचाने के लिए टुंड्रा पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करना, जलवायु परिवर्तन को कम करना और मानवीय हस्तक्षेप का प्रबंधन करना बेहद आवश्यक है।

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