चर्चा में क्यों?
29-30 मार्च 2026 को सूर्य की सतह से एक तीव्र सौर ज्वाला (solar flare) प्रस्फुटित हुई। नासा (NASA) द्वारा X1.4-श्रेणी के फ्लेयर के रूप में वर्गीकृत, इस घटना ने मजबूत रेडियो उत्सर्जन और एक बड़ा कोरोनल मास इजेक्शन (coronal mass ejection - CME) उत्पन्न किया। अंतरिक्ष मौसम एजेंसियों (Space weather agencies) ने दक्षिण पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र के कुछ हिस्सों में एक अस्थायी रेडियो ब्लैकआउट की सूचना दी, जिससे संचार और नेविगेशन प्रणालियों के लिए सौर गतिविधि से उत्पन्न खतरों की ओर ध्यान आकर्षित हुआ।
पृष्ठभूमि (Background)
सौर ज्वालाएं सूर्य के वायुमंडल से ऊर्जा का अचानक निकलना हैं, जो सनस्पॉट (sunspots) के आसपास चुंबकीय ऊर्जा की रिहाई के कारण होती हैं। उन्हें तीव्रता द्वारा वर्गीकृत किया जाता है; X-श्रेणी की ज्वालाएं सबसे शक्तिशाली होती हैं और बड़ी मात्रा में एक्स-रे (X-rays) और पराबैंगनी विकिरण (ultraviolet radiation) उत्सर्जित कर सकती हैं। ये उत्सर्जन पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल को आयनित (ionise) कर सकते हैं, जिससे रेडियो ब्लैकआउट हो सकता है और उपग्रह संचालन बाधित हो सकता है।
29-30 मार्च 2026 को क्या हुआ?
- समय और वर्गीकरण (Timing and classification): नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (Solar Dynamics Observatory) ने 30 मार्च 2026 को 03:19 UTC पर अपने चरम पर पहुंचने वाले एक X1.4 सौर फ्लेयर को दर्ज किया। अमेरिकी स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर (U.S. Space Weather Prediction Center - SWPC) ने इस घटना को R3 (मजबूत) रेडियो ब्लैकआउट के रूप में वर्गीकृत किया।
- रेडियो उत्सर्जन (Radio emission): लगभग 1,872 किमी/सेकेंड के वेग के साथ टाइप II रेडियो बर्स्ट का पता चला था, जो सूर्य के कोरोना (corona) के माध्यम से फैलने वाली शॉक वेव का संकेत देता है। दस-सेंटीमीटर (10 सेमी) रेडियो बर्स्ट लगभग 1,800 सौर फ्लक्स इकाइयों (solar flux units) के चरम फ्लक्स तक पहुंच गया, जिससे तीव्र "रेडियो शोर" (radio noise) पैदा हुआ जो पूर्वी एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में रडार, जीपीएस (GPS) और संचार प्रणालियों में हस्तक्षेप कर सकता है।
- कोरोनल मास इजेक्शन (Coronal mass ejection): फ्लेयर ने एक आंशिक-प्रभामंडल कोरोनल मास इजेक्शन (partial-halo CME) लॉन्च किया। अंतरिक्ष मौसम के पूर्वानुमानकर्ताओं ने भविष्यवाणी की कि CME 31 मार्च के आसपास पृथ्वी को एक हल्का झटका देगा, जिससे संभावित रूप से उच्च अक्षांशों पर भू-चुंबकीय तूफान (geomagnetic storms) और ऑरोरा (auroras) पैदा होंगे।
प्रभाव और प्रतिक्रिया (Impacts and response)
R3 ब्लैकआउट ने समुद्री महाद्वीप (Maritime Continent - दक्षिण पूर्व एशिया और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया) पर उच्च-आवृत्ति (high‑frequency) संचार को कुछ समय के लिए बाधित कर दिया। एयरलाइंस और नाविक बैकअप आवृत्तियों पर स्विच कर गए, और उपग्रह ऑपरेटरों ने विसंगतियों के लिए अपने सिस्टम की निगरानी की। नासा ने स्पष्ट किया कि फ्लेयर ने उसके आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के लिए कोई खतरा पैदा नहीं किया, लेकिन पावर ग्रिड और नेविगेशन सिग्नलों पर संभावित प्रभावों के लिए SWPC पूर्वानुमानों का पालन करने की सलाह दी। शौकिया खगोलविदों और आकाश पर नजर रखने वालों ने CME के आने के बाद उत्तरी अक्षांशों में ऑरोरा गतिविधि में वृद्धि की सूचना दी।