Environment

Subarnarekha River Sand Mining: MoEFCC, ओडिशा और अवैध निष्कर्षण

Subarnarekha River Sand Mining: MoEFCC, ओडिशा और अवैध निष्कर्षण

चर्चा में क्यों?

बालासोर जिले के निवासियों की शिकायतों के बाद, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने मार्च 2026 में ओडिशा सरकार को सुवर्णरेखा नदी (Subarnarekha River) में बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध रेत खनन (illegal sand mining) के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मंत्रालय ने राज्य से अनाधिकृत निष्कर्षण को रोकने और नदी के किनारों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा।

पृष्ठभूमि

सुवर्णरेखा (शाब्दिक अर्थ "सोने की लकीर") झारखंड में रांची के पास छोटा नागपुर पठार (Chota Nagpur plateau) से निकलती है। यह ओडिशा में प्रवेश करने और बंगाल की खाड़ी में खाली होने से पहले झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों के माध्यम से लगभग 470 किमी पूर्व की ओर बहती है। यह नदी खनिज-समृद्ध क्षेत्रों से होकर गुजरती है—कभी इसकी रेत में सोने के कण पाए जाते थे—और सिंचाई और उद्योग के लिए पानी उपलब्ध कराती है। प्रमुख सहायक नदियों में कांची (Kanchi) और करकरी (Karkari) नदियां शामिल हैं। इसके मार्ग में अत्यधिक रेत खनन बैंक कटाव, आवास विनाश और अशांति (turbidity) में वृद्धि का कारण बनता है।

निवासियों द्वारा उठाए गए मुद्दे

  • पर्यावरणीय क्षति: स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध रेत निष्कर्षण (sand extraction) ने नदी के किनारों को अस्थिर कर दिया है, जिससे भूस्खलन और संपत्ति का नुकसान हुआ है। तलछट (Sediment) हटाने से जलीय आवास भी बाधित होते हैं।
  • प्रदूषण और सुरक्षा संबंधी चिंताएं: विषम समय में चलने वाले भारी ट्रक और उत्खननकर्ता शोर और धूल प्रदूषण पैदा करते हैं। ग्रामीण बालू खनन ऑपरेटरों के साथ दुर्घटनाओं और टकराव की रिपोर्ट करते हैं।
  • निगरानी की मांग: याचिकाकर्ताओं ने अधिकारियों से असुरक्षित हिस्सों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और अवैध खनन को रोकने के लिए पुलिस तैनात करने का आग्रह किया।

सरकार की प्रतिक्रिया

  • ओडिशा को निर्देश: MoEFCC ने राज्य के मुख्य सचिव, जिला अधिकारियों और पुलिस को 15 दिनों के भीतर "दृश्य कार्रवाई (visible action)" करने और मंत्रालय को प्रगति की रिपोर्ट करने का निर्देश दिया।
  • प्रवर्तन (Enforcement) को मजबूत करना: यह मामला अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए नदी में रेत निष्कर्षण की बेहतर निगरानी, सख्त लाइसेंसिंग और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

सुवर्णरेखा की रक्षा करना क्यों मायने रखता है

  • जल सुरक्षा: यह नदी हजारों घरों को पीने का पानी और सिंचाई की सुविधा प्रदान करती है। गिरावट मानव स्वास्थ्य और फसल की पैदावार को प्रभावित कर सकती है।
  • पारिस्थितिक संतुलन: रेत और बजरी मछली और अकशेरूकीय (invertebrates) जीवों के लिए निवास स्थान बनाते हैं। अनियमित खनन इन आवासों को बाधित करता है और कटाव को तेज करता है।
  • क्षेत्रीय विरासत: इसकी चमकती रेत के लिए नामित, सुवर्णरेखा पूर्वी भारत के सांस्कृतिक और आर्थिक ताने-बाने का हिस्सा है। इसके स्वास्थ्य को संरक्षित करने से लोगों और वन्यजीवों दोनों को लाभ होता है।

निष्कर्ष

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय का निर्देश सुवर्णरेखा जैसी नदियों पर अवैध रेत खनन के प्रभावों को लेकर बढ़ती चिंता का संकेत देता है। नदी की अखंडता और इस पर निर्भर लोगों की भलाई की रक्षा के लिए प्रभावी प्रवर्तन, सामुदायिक सतर्कता और स्थायी निष्कर्षण (sustainable extraction) प्रथाएं आवश्यक होंगी।

स्रोत: NIE

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