समाचारों में क्यों?
मार्च 2026 में किए गए कैमरा-ट्रैप सर्वेक्षणों (Camera-trap surveys) ने चंडीगढ़ के पास सुखना वन्यजीव अभयारण्य (Sukhna Wildlife Sanctuary) में तेंदुए (leopard) की आबादी की पुष्टि की। यह खोज शिवालिक की तलहटी (Shivalik foothills) में दशकों तक चले पारिस्थितिक बहाली के प्रयासों (ecological restoration efforts) की सफलता को उजागर करती है और अभयारण्य की जैव विविधता (biodiversity) की ओर नए सिरे से ध्यान आकर्षित करती है।
पृष्ठभूमि
चंडीगढ़ के लिए पानी और मनोरंजन प्रदान करने के लिए मौसमी सुखना चोए (Sukhna Choe) जलधारा पर बांध बनाकर 1958 में सुखना झील (Sukhna Lake) का निर्माण किया गया था। इसके तुरंत बाद, जलग्रहण क्षेत्र (catchment) से भारी गाद (heavy siltation) ने झील के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया। 1962 में अधिकारियों ने जलग्रहण क्षेत्र के लगभग 25.4 वर्ग किलोमीटर का अधिग्रहण किया और मृदा संरक्षण (soil-conservation) और वनीकरण (afforestation) परियोजनाएं शुरू कीं। सीढ़ीदार खेती (Terracing), गली प्लगिंग (gully plugging) और सैकरम मुंजा (Saccharum munja) जैसी कठोर घासों के साथ-साथ बबूल (Acacia), शीशम (Shisham), नीलगिरी (Eucalyptus) और प्रोसोपिस (Prosopis) जैसी पेड़ों की प्रजातियों को लगाने से यह बंजर ढलान एक वनाच्छादित परिदृश्य (forested landscape) में बदल गई।
पारिस्थितिक परिवर्तन (Ecological transformation)
- यह जलग्रहण क्षेत्र कई तालाबों (ponds) के साथ एक मिश्रित पर्णपाती वन (mixed deciduous forest) के रूप में परिपक्व हुआ और 1998 में इसे सुखना वन्यजीव अभयारण्य (Sukhna Wildlife Sanctuary) के रूप में अधिसूचित किया गया।
- चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार, यह अभयारण्य सांभर (sambar), चित्तीदार हिरण (spotted deer), काकड़ (barking deer), साही (porcupine), पैंगोलिन (pangolin), जंगली सूअर (wild boar), सियार (jackal) और अब तेंदुओं (leopards) सहित कई स्तनधारियों का समर्थन करता है। अजगर (python) और मॉनिटर छिपकली (monitor lizard) जैसे सरीसृप (Reptiles) और मोर, हॉर्नबिल, किंगफिशर और जलपक्षी (waterfowl) जैसे पक्षी यहां पनपते हैं।
- शीर्ष शिकारियों (apex predators) की उपस्थिति एक स्वस्थ शिकार आधार (healthy prey base) का संकेत देती है और सफल आवास बहाली (habitat restoration) को इंगित करती है।
महत्व
- अभयारण्य का पुनरुद्धार (revival) दर्शाता है कि कैसे दीर्घकालिक पारिस्थितिक बहाली (long-term ecological restoration) क्षरित पहाड़ियों (degraded hillsides) को जैव-विविध वनों (biodiverse forests) में बदल सकती है।
- यह चंडीगढ़ के लिए एक ग्रीन लंग (green lung) प्रदान करता है और इको-टूरिज्म तथा पर्यावरण शिक्षा के अवसर प्रदान करता है।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया (Times of India) · चंडीगढ़ प्रशासन (Chandigarh Administration)