चर्चा में क्यों?
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार (interim government) ने तीस्ता नदी के जल बंटवारे को लेकर भारत के साथ फिर से बातचीत शुरू करने की इच्छा व्यक्त की है। यह मुद्दा एक दशक से अधिक समय से लंबित (pending) है और यह दोनों देशों में किसानों और पारिस्थितिक तंत्र (ecosystems) को प्रभावित करता है।
पृष्ठभूमि
तीस्ता नदी पूर्वी सिक्किम में पाहुनरी पर्वत (mountain of Pahunri) के पास तीस्ता खांग्त्से ग्लेशियर (Teesta Khangtse glacier) से निकलती है। यह बांग्लादेश में प्रवेश करने से पहले सिक्किम और पश्चिम बंगाल के माध्यम से दक्षिण की ओर बहती है, जहां यह ब्रह्मपुत्र (स्थानीय रूप से जमुना के रूप में जाना जाता है) में मिलती है। नदी लगभग 414 किलोमीटर की यात्रा करती है और सिंचाई (irrigation) और पनबिजली (hydropower) के लिए पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
मुख्य बिंदु
- 2011 में भारत और बांग्लादेश ने जल-बंटवारे की संधि (water-sharing treaty) का मसौदा तैयार किया, जिसमें प्रस्ताव दिया गया कि भारत को 42.5% और बांग्लादेश को 37.5% तीस्ता के शुष्क-मौसम प्रवाह (dry-season flow) को प्राप्त करना चाहिए, बाकी नदी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए छोड़ देना चाहिए। उत्तरी जिलों में सिंचाई की जरूरतों का हवाला देते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने इसका विरोध किया, जिससे समझौता रुक गया।
- सिक्किम और पश्चिम बंगाल ने नदी के किनारे कई पनबिजली परियोजनाएं बनाई हैं। इनमें से सबसे बड़ा तीस्ता III बांध (Teesta III dam), अक्टूबर 2023 में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था जब भारी बारिश के कारण दक्षिण ल्होनक झील (South Lhonak Lake) से हिमनद झील का प्रकोप (glacial lake outburst flood) हुआ था। बाढ़ के पानी ने पुलों को बहा दिया और बहाव (downstream) वाले क्षेत्रों में जल स्तर बढ़ा दिया।
- जलवायु परिवर्तन हिमनदों के पिघलने और अत्यधिक वर्षा को तेज कर रहा है, जिससे नदी प्रबंधन (river management) अधिक जटिल हो गया है। दोनों देशों को एक व्यापक संधि (comprehensive treaty) की आवश्यकता है जो कृषि, बिजली उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को संतुलित करे।
- एक न्यायसंगत साझेदारी (equitable sharing arrangement) व्यवस्था गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिन के प्रबंधन सहित नदी के मुद्दों पर भारत और बांग्लादेश के बीच विश्वास और व्यापक सहयोग का निर्माण करेगी।