चर्चा में क्यों?
थडौ जनजाति (Thadou tribe) के नेताओं ने हाल ही में असम के गुवाहाटी (Guwahati) में दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया। उन्होंने अपनी विशिष्ट जातीय पहचान (distinct ethnic identity) की रक्षा करने और यह स्पष्ट करने के लिए कि वे बड़े कुकी समूह (Kuki group) का हिस्सा नहीं हैं, 10-सूत्रीय घोषणा (10-point declaration) और 9-सूत्रीय प्रस्ताव (9-point resolution) जारी किया। यह बयान मणिपुर (Manipur) और पड़ोसी राज्यों में चल रहे जातीय तनाव (ethnic tensions) के बीच आया है।
पृष्ठभूमि
थडौ (Thadou) भारत के 1956 के राष्ट्रपति आदेश (Presidential Order of India) के तहत मणिपुर में मान्यता प्राप्त 29 स्वदेशी जनजातियों (indigenous tribes) में से एक हैं। वे थडौ भाषा बोलते हैं, कबीले-आधारित सामाजिक संगठन (clan-based social organisation) का अभ्यास करते हैं और अन्य चिन-कुकी-मिज़ो (Chin-Kuki-Mizo) समूहों से अलग सांस्कृतिक परंपराएं (cultural traditions) रखते हैं। ऐतिहासिक रिकॉर्ड (Historical records) बताते हैं कि थडौ समुदाय सदियों से वर्तमान मणिपुर और आसपास के क्षेत्रों की पहाड़ियों में रह रहे हैं। समय के साथ, राजनीतिक विकास (political developments) और प्रशासनिक वर्गीकरण (administrative classifications) के कारण विभिन्न आदिवासी पहचानों (tribal identities) के बीच भ्रम पैदा हुआ। हालिया सम्मेलन ने आत्म-पहचान (self-identification) का दावा करने और गलत लेबलिंग (mislabeling) को दूर करने का प्रयास किया।
घोषणा के मुख्य अंश
- विशिष्ट पहचान (Distinct identity): घोषणा में कहा गया है कि थडौ (Thadou) कुकी (Kuki) का पर्याय (synonymous) नहीं है और इसे किसी अन्य आदिवासी नाम से पहले या बाद में (prefixed or suffixed) नहीं जोड़ा जाना चाहिए। यह इस बात पर जोर देता है कि थडौ की अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराएं और इतिहास है।
- जनगणना के आंकड़े (Census figures): घोषणा के अनुसार, 1881 की पहली जनगणना के बाद से थडौस की अलग से गिनती की गई है और वे मणिपुर में सबसे बड़ी एकल जनजाति (single largest tribe) बने हुए हैं। 2011 की जनगणना में 2,15,913 थडौ लोगों को दर्ज किया गया था, जबकि "एनी कुकी ट्राइब्स (Any Kuki Tribes)" श्रेणी (category) के तहत वर्गीकृत लगभग 28,000 लोग थे।
- नए निकाय और परिषदें (New bodies and councils): प्रतिनिधियों ने थडौ इनपी मिजोरम (Thadou Inpi Mizoram), थडौ चीफ्स काउंसिल (Thadou Chiefs’ Council), थडौ ह्यूमन राइट्स एडवोकेसी (Thadou Human Rights Advocacy), थडौ अकादमिक सोसाइटी (Thadou Academic Society) और थडौ एल्डर्स एसोसिएशन (Thadou Elders’ Association) जैसे संगठन बनाने पर सहमति व्यक्त की। राज्य स्तर पर जनजाति का प्रतिनिधित्व करने के लिए थडौ इनपी मणिपुर (Thadou Inpi Manipur - TIM) नामक एक एकीकृत निकाय (unified body) की स्थापना की जाएगी।
- मांगें (Demands): सम्मेलन असम, मिजोरम और नागालैंड में थडौ को एक अलग अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) के रूप में मान्यता देने की मांग करता है। यह अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) की सूची से "एनी कुकी ट्राइब्स (Any Kuki Tribes)" श्रेणी को हटाने का आह्वान करता है, यह तर्क देते हुए कि श्रेणी उचित परामर्श (proper consultation) के बिना बनाई गई थी और गलत पहचान (misidentification) में योगदान करती है।