समाचार में क्यों?
तमिलनाडु में संरक्षण समूहों ने Thamirabarani नदी में एक मछली गणना और ऊदबिलावों (otters) के लिए जागरूकता अभियान आयोजित किया। सर्वेक्षणों ने समृद्ध जलीय जीवन का खुलासा किया लेकिन यह भी दिखाया कि ऊदबिलाव देखे जाने की संख्या कम हो रही है। क्षेत्र में समुदायों और जैव विविधता के लिए नदी का स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
Thamirabarani पश्चिमी घाट (Western Ghats) की अगस्त्यकूडम (Agastyarkoodam) चोटी से निकलती है और मन्नार की खाड़ी (Gulf of Mannar) में गिरने से पहले तिरुनेलवेली (Tirunelveli) और थूथुकुडी (Thoothukudi) जिलों से होकर बहती है। लगभग 128 किलोमीटर लंबी, यह तमिलनाडु की एकमात्र बारहमासी नदी है। नदी के नाम का अर्थ "तांबे के रंग का पत्ता" है, और इसने सदियों से कृषि, मंदिरों और व्यापार का समर्थन किया है।
मुख्य निष्कर्ष
- 2024 के मछली सर्वेक्षण में 36 प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें 31 देशी प्रजातियां, दो पेश की गई प्रजातियां और तीन आक्रामक प्रजातियां शामिल हैं।
- स्थानिक मछलियाँ (Endemic fish) जैसे Thamirabarani Barb, Mahseer, Half Beak fish और Torrent Catfish देखी गईं।
- स्वयंसेवकों ने पापनासम (Papanasam) में दुर्लभ स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव देखे; नदी एशियन स्मॉल-क्लॉड (Asian small-clawed) और यूरेशियन ऊदबिलाव (Eurasian otters) की भी मेजबानी करती है।
- पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि आवास विनाश, रेत खनन और प्रदूषण ऊदबिलाव की आबादी को कम कर रहे हैं।
- नदी दर्जनों मछली प्रजातियों का समर्थन करती है (2024 के एक सर्वेक्षण में 36 दर्ज किए गए; सबसे व्यापक सहकर्मी-समीक्षित अध्ययन में लगभग 125 दस्तावेज़ हैं), जिनमें स्थानीय अध्ययनों के अनुसार स्नेकहेड (snakeheads), कैटफ़िश और कार्प (carp) शामिल हैं।
निष्कर्ष
Thamirabarani दक्षिणी तमिलनाडु के लिए एक जीवन रेखा है। पानी निकालने, अपशिष्ट निर्वहन और रेत खनन का सावधानीपूर्वक प्रबंधन इसकी विविध मछली और ऊदबिलाव आबादी की रक्षा कर सकता है। जन जागरूकता कार्यक्रम नदी संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
स्रोत: ETV Bharat