समाचार में क्यों?
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) का राजकीय पशु, जंगली जल भैंसा (wild water buffalo), मध्य भारत में विलुप्त होने के कगार पर है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (Udanti-Sitanadi Tiger Reserve - USTR) में केवल "छोटू" (Chhotu) नाम का एक शुद्ध नर बचा है। अधिकारियों और स्थानीय समुदायों ने प्रजातियों और इसके आवास को बहाल करने के लिए कार्यक्रम शुरू किए हैं।
पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ में USTR उदंती और सीतानदी नदी जलग्रहण क्षेत्रों (catchments) में फैला है। यह बाघों, तेंदुओं और जंगली जल भैंसों को आश्रय देता है। पिछले एक दशक में शिकार और घरेलू भैंसों के साथ संकरण (hybridisation) ने शुद्ध नस्ल की आबादी को कम कर दिया है। 2012 में एक मादा और उसके नर बछड़े को एक सुरक्षित बोमा (boma) में रखा गया था, लेकिन प्रजनन से पहले ही दोनों की मृत्यु हो गई। आज रिजर्व में केवल एक शुद्ध नस्ल का नर - छोटू - और कुछ संकर (hybrids) जीवित हैं।
संरक्षण के प्रयास
- वन अधिकारी बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य (Barnawapara Wildlife Sanctuary) से दो मादा भैंसों को स्थानांतरित करने की योजना बना रहे हैं, जहां असम से पहले के परिचय ने चार बछड़ों को जन्म दिया था।
- आसपास के 17 बस्तियों के ग्रामीणों ने घास के मैदानों को बहाल करने, आग रोकने और अतिक्रमित क्षेत्रों को खाली करने का संकल्प लिया है।
- आवास प्रबंधन में खरपतवार हटाना, जल स्रोत बनाना और मवेशियों की बीमारियों से सुरक्षा शामिल है।
- जीन पूल (gene pool) में विविधता लाने और कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम (captive breeding programme) शुरू करने के लिए अधिकारी असम से शुद्ध भैंस लाने का प्रयास कर रहे हैं।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के जंगली भैंसे का अस्तित्व मादाओं के समय पर स्थानांतरण, सख्त सुरक्षा और सामुदायिक सहयोग पर निर्भर करता है। इस कीस्टोन शाकाहारी (keystone herbivore) को बहाल करने से USTR में घास के मैदानों और अन्य वन्यजीवों को भी लाभ होगा।
स्रोत: IE