पर्यावरण

उल्सूर झील जीर्णोद्धार (Ulsoor Lake Restoration): बेंगलुरु की गाद निकालने की परियोजना

उल्सूर झील जीर्णोद्धार (Ulsoor Lake Restoration): बेंगलुरु की गाद निकालने की परियोजना

चर्चा में क्यों?

बेंगलुरु के अधिकारियों ने उल्सूर झील को पूरी तरह से गाद निकालने (desilting) और साफ करने के लिए सुखा दिया है - लगभग दो दशकों में यह पहला ऐसा अभियान है। झील के पानी को मोड़ दिया गया है और इसका तल खुला छोड़ दिया गया है ताकि कर्मचारी गाद, मलबे और मूर्तियों को हटा सकें। अधिकारियों को उम्मीद है कि गहराई बहाल करने और पानी की गुणवत्ता में सुधार करने से मानसून द्वारा इसे फिर से भरने से पहले झील अधिक स्वस्थ हो जाएगी।

पृष्ठभूमि

उल्सूर झील, जिसे हलसूरू झील (Halasuru Lake) के नाम से भी जाना जाता है, मध्य बेंगलुरु की सबसे बड़ी झीलों में से एक है। लगभग 50 हेक्टेयर (123 एकड़) में फैली इस झील का निर्माण 19वीं सदी में आयुक्त लेविन बेंथम बोवरिंग (Lewin Bentham Bowring) ने एक पुराने टैंक की जगह पर करवाया था। झील में कई छोटे द्वीप हैं और इसका उपयोग नौका विहार और मनोरंजन के लिए किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में, सीवेज, मूर्तियों और अतिक्रमणों से अनियंत्रित प्रदूषण के कारण यूट्रोफिकेशन (eutrophication) हुआ है और गहराई कम हो गई है। हालांकि आंशिक सफाई की गई है, 2001-2002 के बाद से पूरी तरह से गाद निकालने का काम नहीं किया गया था।

जीर्णोद्धार की मुख्य विशेषताएं

  • गाद और मलबा हटाना: कर्मचारी कचरे और धार्मिक प्रसाद के साथ एक मीटर तक मोटी गाद की परतें हटा रहे हैं। पानी निकालने से पहले मछलियों को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया था, और स्टॉर्म-वाटर ड्रेन से आने वाले पानी को अस्थायी रूप से मोड़ दिया गया है।
  • राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष (NDMF): 4 करोड़ रुपये की यह परियोजना राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष के माध्यम से वित्तपोषित है। इसका उद्देश्य झील की जल धारण क्षमता बढ़ाना और आसपास के इलाकों में बाढ़ के जोखिम को कम करना है।
  • समयरेखा और योजनाएँ: अधिकारियों का अनुमान है कि गाद निकालने में तीन से चार महीने लगेंगे और मानसून के दौरान झील स्वाभाविक रूप से फिर से भरना शुरू कर देगी। दीर्घकालिक योजनाओं में झील की परिधि (perimeter) के चारों ओर वॉकवे, सजावटी बाड़ और बेहतर पार्कों का निर्माण शामिल है।
  • पर्यावरण संबंधी चिंताएँ: पर्यावरणविदों का जोर है कि केवल गाद निकालने से प्रदूषण का समाधान नहीं होगा जब तक कि सीवेज के प्रवाह को स्थायी रूप से रोका नहीं जाता। जलीय जीवन को नुकसान पहुँचाए बिना झील पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना एक और चुनौती है।

स्रोत

The Hindu

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