पर्यावरण

Umred-Pauni-Karhandla Sanctuary: मेलानिस्टिक चीतल, वन्यजीव गलियारा और महाराष्ट्र

Umred-Pauni-Karhandla Sanctuary: मेलानिस्टिक चीतल, वन्यजीव गलियारा और महाराष्ट्र

चर्चा में क्यों?

अप्रैल 2026 में नागपुर के पास उमरेड-पवनी-करहांडला वन्यजीव अभयारण्य (Umred-Pauni-Karhandla Wildlife Sanctuary) में वन्यजीव अधिकारियों और आगंतुकों ने एक मेलेनिस्टिक (काले रंग का) चित्तीदार हिरण (melanistic spotted deer), जिसे चीतल (chital) भी कहा जाता है, को देखा। इस तरह के दृश्य दुर्लभ हैं और प्रकृतिवादियों (naturalists) और पर्यटकों के बीच उत्साह पैदा किया है, जिससे अभयारण्य की समृद्ध जैव विविधता की ओर ध्यान आकर्षित हुआ है।

पृष्ठभूमि

उमरेड-पवनी-करहांडला वन्यजीव अभयारण्य (UPKWS) की स्थापना 2013 में महाराष्ट्र में की गई थी। लगभग 189 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य भंडारा जिले में पवनी तहसील (Pauni tehsil) और नागपुर जिले में उमरेड, कुही और भिवापुर (Bhivapur) तालुका के कुछ हिस्सों को कवर करता है। अभयारण्य वैनगंगा नदी (Wainganga River) के किनारे स्थित है और वनों के माध्यम से ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व (Tadoba Andhari Tiger Reserve), पेंच टाइगर रिजर्व (Pench Tiger Reserve) और नागझिरा वन्यजीव अभयारण्य (Nagzira Wildlife Sanctuary) से जुड़ा हुआ है, जो मध्य भारत में एक महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारा (wildlife corridor) बनाता है।

परिदृश्य और जैव विविधता (Landscape and biodiversity)

  • वनस्पति (Flora): जंगल मुख्य रूप से सागौन (teak) से बना है, जो पेड़ों की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत है। बांस (Bamboo), तेंदू (tendu), महुआ और अन्य स्वदेशी प्रजातियाँ (indigenous species) विविधता को बढ़ाती हैं।
  • जीव (Fauna): अभयारण्य में निवासी प्रजनन बाघ (breeding tigers), गौर (भारतीय बाइसन) के झुंड, जंगली कुत्ते, उड़ने वाली गिलहरी (flying squirrels), पैंगोलिन, हनी बेजर (honey badgers) और पक्षियों और सरीसृपों (reptiles) की एक किस्म मौजूद है। एक मेलेनिस्टिक हिरण (melanistic deer) की उपस्थिति इसके अनगुलेट आबादी (ungulate population) के भीतर आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) को रेखांकित करती है।

हिरण में मेलेनिज्म (Melanism in deer)

मेलेनिज्म एक आनुवंशिक स्थिति है जिसके परिणामस्वरूप गहरा रंजकता (dark pigmentation) बढ़ जाता है। चित्तीदार हिरण में, जिसमें आमतौर पर सफेद धब्बों के साथ लाल-भूरे रंग का कोट (reddish-brown coat) होता है, मेलेनिस्टिक व्यक्ति गहरे भूरे या लगभग काले दिखाई देते हैं। इस तरह की विविधताएं असामान्य हैं और संरक्षण और आनुवंशिक विविधता के दृष्टिकोण (perspective) से मूल्यवान मानी जाती हैं।

देखने का महत्व (Significance of the sighting)

  • स्वास्थ्य का संकेतक (Indicator of health): दुर्लभ आनुवंशिक लक्षणों की उपस्थिति एक स्वस्थ जीन पूल (gene pool) का सुझाव देती है और वन्यजीव विविधता (wildlife diversity) के संरक्षण में अभयारण्य की भूमिका को दर्शाती है।
  • जागरूकता और पर्यटन: अद्वितीय दृश्य कम ज्ञात संरक्षित क्षेत्रों (protected areas) की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं, जिम्मेदार पर्यटन (responsible tourism) को प्रोत्साहित करते हैं और संरक्षण प्रयासों के लिए समर्थन उत्पन्न करते हैं।
  • संरक्षण संदेश (Conservation message): UPKWS जैसे आवासों की रक्षा करना न केवल बाघों जैसी प्रमुख प्रजातियों (flagship species) को बचाने के लिए आवश्यक है, बल्कि कम ज्ञात प्रजातियों और आनुवंशिक रूपों (genetic variants) को भी बचाने के लिए आवश्यक है जो भारत की प्राकृतिक विरासत को समृद्ध करते हैं।

निष्कर्ष

मेलेनिस्टिक चीतल का दिखना भारत के वन्यजीव अभयारण्यों के छिपे हुए आश्चर्यों (hidden wonders) की याद दिलाता है। ऐसे दुर्लभ निवासियों की रक्षा के लिए निरंतर संरक्षण उपाय, सामुदायिक भागीदारी और निकटवर्ती भंडारों (adjoining reserves) के साथ पारिस्थितिक संपर्क (ecological connectivity) महत्वपूर्ण हैं।

स्रोत: द लाइव नागपुर (The Live Nagpur)

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