चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने एक रिपोर्ट जारी कर चेतावनी दी है कि अप्रयुक्त (unused) या समाप्त हो चुकी (expired) दवाओं का अनुचित निपटान (improper disposal) पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य (public health) के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। रिपोर्ट सरकारों और उद्योगों से सुरक्षित संग्रह और निपटान प्रणाली स्थापित करने का आग्रह करती है।
पृष्ठभूमि
UNEP की स्थापना 1972 में हुई थी और इसका मुख्यालय नैरोबी (Nairobi), केन्या (Kenya) में है। यह पर्यावरणीय मुद्दों पर अग्रणी वैश्विक प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है, संकटों के प्रति प्रतिक्रियाओं का समन्वय करता है और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों (international agreements) के कार्यान्वयन (implementation) का समर्थन करता है। हाल के वर्षों में ध्यान फार्मास्युटिकल कचरे (pharmaceutical waste) की ओर गया है, जो घरेलू कचरे या सीवेज के माध्यम से जल निकायों और मिट्टी में प्रवेश करता है और वन्यजीवों में रोगाणुरोधी प्रतिरोध (antimicrobial resistance) और अंतःस्रावी व्यवधान (endocrine disruption) में योगदान दे सकता है। कई देशों में इस बात पर स्पष्ट मार्गदर्शन का अभाव है कि उपभोक्ताओं को दवाओं का निपटान कैसे करना चाहिए।
UNEP रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- रिपोर्ट एक "वन हेल्थ (One Health)" दृष्टिकोण पर जोर देती है, यह पहचानते हुए कि मानव, पशु और पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य (ecosystem health) आपस में जुड़े हुए हैं। यह पर्यावरण में फार्मास्यूटिकल्स की उपस्थिति को दवा प्रतिरोधी रोगाणुओं (drug-resistant microbes) के प्रसार से जोड़ता है।
- UNEP दवाओं के जिम्मेदार नुस्खे (prescription) और वितरण (distribution) को प्रोत्साहित करके स्रोत पर ही अपशिष्ट (waste) को रोकने की सिफारिश करता है। यह राष्ट्रीय टेक-बैक कार्यक्रमों (national take-back programmes) का आह्वान करता है जहां उपभोक्ता अप्रयुक्त दवाओं को फार्मेसियों (pharmacies) या अधिकृत केंद्रों पर वापस कर सकते हैं।
- यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (public-private partnerships) के अवसरों सहित फार्मास्युटिकल कचरे को इकट्ठा करने, परिवहन करने और नष्ट करने के लिए कानूनी ढांचे और स्पष्ट दिशानिर्देशों (clear guidelines) की आवश्यकता पर जोर देता है।
भारतीय पहल
- भारत की राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan on Antimicrobial Resistance 2.0) अप्रयुक्त दवाओं के लिए सुरक्षित निपटान तंत्र विकसित करने का आह्वान करती है, जो दवा प्रदूषण (drug pollution) के बारे में बढ़ती चिंता को दर्शाता है।
- केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने दवा वापसी को संभालने पर मसौदा दिशानिर्देश (draft guidelines) जारी किए हैं, और कुछ राज्यों ने पायलट टेक-बैक योजनाएं शुरू की हैं। उदाहरण के लिए, केरल का nPROUD कार्यक्रम घरों को अप्रयुक्त एंटीबायोटिक्स (antibiotics) और दर्द निवारक दवाओं (painkillers) को नामित फार्मेसियों में वापस करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- सार्वजनिक जागरूकता अभी भी कम है; निपटान व्यवहार (disposal behaviour) को बदलने के लिए शिक्षा अभियानों (education campaigns) और सुविधाजनक ड्रॉप-ऑफ बिंदुओं (drop-off points) की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
UNEP की रिपोर्ट प्रदूषण के एक अनदेखे स्रोत पर प्रकाश डालती है। टेक-बैक कार्यक्रमों को लागू करने, नियमों को कड़ा करने और उपभोक्ताओं को शिक्षित करने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि जलमार्गों और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने के बजाय अप्रयुक्त दवाओं का सुरक्षित रूप से निपटान किया जाए।
स्रोत: Down To Earth