चर्चा में क्यों?
भारत ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) की 2026 की वार्षिक रिपोर्ट को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसने देश की पक्षपाती (biased) और चयनात्मक (selective) तस्वीर पेश की है। आयोग ने भारत को "विशेष चिंता वाले देश" (country of particular concern) के रूप में नामित करने की सिफारिश की थी और कुछ भारतीय संगठनों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया था।
पृष्ठभूमि
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1998 (International Religious Freedom Act of 1998) के तहत स्थापित एक स्वतंत्र, द्विदलीय संघीय एजेंसी है। यह विदेशों में धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता पर नज़र रखता है और अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और कांग्रेस को नीतिगत सिफारिशें करता है। आयोग में नौ आयुक्त (commissioners) होते हैं जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति और कांग्रेस में दोनों दलों के नेताओं द्वारा नियुक्त किया जाता है, जिन्हें गैर-पक्षपातपूर्ण कर्मचारियों द्वारा समर्थन दिया जाता है। इसका विश्लेषण अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों द्वारा निर्देशित होता है, जिसमें मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (Universal Declaration of Human Rights) का अनुच्छेद 18 शामिल है, जो विचार, विवेक और धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार को मान्यता देता है।
2026 की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
- सिफारिशें: रिपोर्ट ने अमेरिकी सरकार से भारत को 'विशेष चिंता वाले देश' के रूप में नामित करने का आग्रह किया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) और भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी जैसी संस्थाओं के खिलाफ यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति फ्रीज सहित लक्षित प्रतिबंधों (targeted sanctions) का सुझाव दिया।
- सुरक्षा सहायता से जुड़ाव: इसने भारत के साथ अमेरिकी सुरक्षा और व्यापार संबंधों को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार के साथ जोड़ने की सिफारिश की और हथियारों की कुछ बिक्री रोकने का आह्वान किया।
- धार्मिक स्वतंत्रता रिकॉर्ड की आलोचना: आयोग ने आरोप लगाया कि भारतीय अधिकारी धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघनों को सहन करते हैं या अंजाम देते हैं, एक ऐसा आरोप जिसे भारत ने बार-बार नकारा है।
भारत की प्रतिक्रिया
- निष्कर्षों की अस्वीकृति: विदेश मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट संदिग्ध स्रोतों (questionable sources) और वैचारिक आख्यानों पर निर्भर है, और यह भारत के बहुलवादी समाज (pluralistic society) को गलत तरीके से प्रस्तुत करती है।
- गैर-बाध्यकारी प्रकृति: अधिकारियों ने बताया कि USCIRF की सिफारिशें सलाहकार (advisory) हैं और अमेरिकी सरकार पर बाध्यकारी (binding) नहीं हैं।
- संवैधानिक सुरक्षा: भारत ने जोर देकर कहा कि इसका संविधान धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और बाहरी निकायों को घरेलू मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
महत्व
- राजनयिक संवेदनशीलता: USCIRF की रिपोर्ट संयुक्त राज्य अमेरिका में सार्वजनिक विमर्श और कांग्रेस की बहसों को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन स्वचालित रूप से नीति में परिवर्तित नहीं होती हैं।
- द्विपक्षीय संबंध: भारत की कड़ी अस्वीकृति मानवाधिकारों की आलोचनाओं को रणनीतिक साझेदारी (strategic partnerships) को प्रभावित करने से रोकने की इच्छा को दर्शाती है।
- धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों के प्रति जागरूकता: यह विवाद मानवाधिकार वकालत के साथ राष्ट्रीय संप्रभुता (national sovereignty) को संतुलित करने के बारे में चल रही वैश्विक बातचीत को उजागर करता है।
निष्कर्ष
USCIRF की वार्षिक रिपोर्ट अक्सर बहस पैदा करती है। जबकि वे अमेरिकी मानवाधिकार नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, भारत की प्रतिक्रिया उन तनावों को दर्शाती है जो तब उत्पन्न होते हैं जब बाहरी मूल्यांकन घरेलू धारणाओं और कूटनीतिक विचारों से टकराते हैं।
स्रोत: The Tribune India