चर्चा में क्यों?
मौसम एजेंसियों ने बताया कि 11 से 13 मई के बीच एक नया पश्चिमी विक्षोभ (western disturbance) उत्तर भारत में आएगा, जिससे बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना है। पिछला विक्षोभ पूर्व की ओर बढ़ने के साथ ही कमजोर हो गया, जिससे पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बारिश से थोड़ी राहत मिली। किसान और अधिकारी अगली प्रणाली (system) पर बारीकी से नजर रख रहे हैं क्योंकि ऐसे तूफान फसलों और दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।
पृष्ठभूमि
पश्चिमी विक्षोभ (Western disturbances) भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) के ऊपर बनने वाले अतिरिक्त-उष्णकटिबंधीय (extra-tropical) तूफान हैं और ऊंचाई पर चलने वाली जेट स्ट्रीम के साथ पूर्व की ओर बढ़ते हैं। जैसे-जैसे वे ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को पार करते हैं, वे भूमध्य सागर, कैस्पियन सागर और काला सागर से नमी इकट्ठा करते हैं। जब वे भारत पहुंचते हैं तो वे सर्दी और वसंत ऋतु के दौरान उत्तरी मैदानों और हिमालय में हल्की बारिश या बर्फबारी लाते हैं।
मुख्य बिंदु
- इन तूफानों को "पश्चिमी" (western) कहा जाता है क्योंकि वे भारत के पश्चिमी हिस्से से आते हैं। वे ग्रीष्मकालीन मानसून का हिस्सा नहीं हैं।
- पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली सर्दियों की बारिश गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए महत्वपूर्ण है। यह भारत-गंगा के मैदानों (Indo-Gangetic plain) में नदियों और जलाशयों को भी फिर से भरता है।
- तूफान आमतौर पर तब विकसित होते हैं जब पूर्वी यूरोप के ऊपर एक उच्च दबाव वाला क्षेत्र नमी वाली हवा को दक्षिण की ओर धकेलता है। जेट स्ट्रीम में एक गर्त (trough) फिर इस हवा को भारत की ओर खींचता है।
- जलवायु वैज्ञानिकों ने देखा है कि पश्चिमी विक्षोभ की संख्या और ताकत साल दर साल बदलती रहती है। कुछ वर्षों में कमजोर विक्षोभ के कारण सर्दियां शुष्क होती हैं, जबकि अन्य वर्षों में मजबूत प्रणालियों के कारण भारी बारिश और यहां तक कि ओलावृष्टि (hailstorms) भी होती है।