समाचार में क्यों?
28 जून 2026 को ऊटी के पास GPS टैग लगे एक उप-वयस्क (sub-adult) white-rumped गिद्ध को बिजली के झटके (electrocution) से मृत पाया गया। इस पक्षी को बीमारी से उबरने के बाद अप्रैल में Mudumalai Tiger Reserve में छोड़ा गया था। इसकी मौत ने शिकार करने वाले बड़े पक्षियों के लिए बिना इंसुलेटेड (uninsulated) बिजली लाइनों से पैदा होने वाले खतरे और कैद में पाले गए गिद्धों को जंगल में वापस छोड़ने की चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
पृष्ठभूमि
White-rumped गिद्ध (vultures) कभी पूरे दक्षिण एशिया में शवों को खाते थे, लेकिन 1990 के दशक में डिक्लोफेनाक (diclofenac) विषाक्तता के कारण इनकी आबादी में 90 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। संरक्षणवादियों ने प्रजनन केंद्र स्थापित किए और कैद में पाले गए पक्षियों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए उन्हें रेडियो या GPS ट्रांसमीटर पहनाकर छोड़ना शुरू किया। Nilgiris की घटना में शामिल पक्षी को 2025 में Maharashtra में टैग किया गया था, बाद में इसे Karnataka ले जाया गया और Tamil Nadu के Mudumalai परिदृश्य में छोड़ दिया गया। ये टैग शोधकर्ताओं को उनके जीवित रहने को ट्रैक करने में मदद करते हैं लेकिन बुनियादी ढांचे के साथ टकराव को नहीं रोकते हैं।
प्रमुख चिंताएं
- यह गिद्ध संभवतः जमीन से उड़ान भरते समय कम-तनाव (low-tension) वाली इलेक्ट्रिक लाइन से टकरा गया था, जो पक्षी आवासों में इंसुलेटेड केबल की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- फील्ड स्टाफ ने टैग किए गए पक्षी की निगरानी की थी और उसे स्वस्थ पाया था; बिजली के झटके से उसकी मौत अप्रत्याशित थी और यह रिहाई कार्यक्रमों की अप्रत्याशितता को उजागर करती है।
- विद्युत कंपनियों और वन विभागों से संरक्षित क्षेत्रों के पास बर्ड डायवर्टर (bird diverters) स्थापित करने और पक्षियों की मौत को कम करने के लिए तारों को इंसुलेट करने का आग्रह किया गया है।
- इस झटके के बावजूद, रेडियो और GPS टेलीमेट्री गिद्धों की गतिविधियों, जीवित रहने की दर और मृत्यु दर के कारणों को समझने के लिए आवश्यक उपकरण बने हुए हैं।
- White-rumped गिद्ध गंभीर रूप से लुप्तप्राय (critically endangered) है; इसके विलुप्त होने को रोकने के लिए निरंतर प्रजनन, सुरक्षित रिहाई और आवास संरक्षण महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष
Nilgiris की घटना एक गंभीर अनुस्मारक है कि संरक्षण कार्यक्रमों को प्रजनन और रिहाई के साथ-साथ बुनियादी ढांचे के खतरों को भी दूर करना चाहिए। वन्यजीव प्रबंधकों और विद्युत उपयोगिताओं के बीच सहयोगात्मक कार्रवाई परिदृश्यों को गिद्धों और उड़ान भरने वाले अन्य बड़े पक्षियों के लिए सुरक्षित बना सकती है।