पर्यावरण

WMO Climate Update: 1.5°C एक्सेडेंस थ्रेशोल्ड, El Nino और ग्लोबल वार्मिंग

WMO Climate Update: 1.5°C एक्सेडेंस थ्रेशोल्ड, El Nino और ग्लोबल वार्मिंग

समाचार में क्यों?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization - WMO) ने May 2026 में अपना Global Annual‑to‑Decadal Climate Update जारी किया। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि 2026 और 2030 के बीच कम से कम एक वर्ष में वैश्विक तापमान (global temperatures) के पूर्व-औद्योगिक स्तरों (pre‑industrial levels) से अस्थायी रूप से 1.5 °C से अधिक होने की बहुत अधिक संभावना है。

पृष्ठभूमि

2015 के पेरिस समझौते (Paris Agreement) का उद्देश्य दीर्घकालिक वैश्विक तापमान वृद्धि को 2 °C से काफी नीचे रखना है और 1850–1900 आधार रेखा (baseline) के सापेक्ष इसे 1.5 °C तक सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाना है। हालांकि, मज़बूत अल नीनो घटनाओं (El Niño events) सहित प्राकृतिक जलवायु परिवर्तनशीलता (natural climate variability), इस सीमा से ऊपर अल्पकालिक स्पाइक्स (short‑term spikes) का कारण बन सकती है। अस्थायी अधिकता (Temporary exceedances) का मतलब यह नहीं है कि पेरिस लक्ष्य का उल्लंघन किया गया है, लेकिन वे तेज़ी से उत्सर्जन में कटौती (emissions reductions) के बिना सीमा के भीतर रहने की बढ़ती कठिनाई का पूर्वाभास कराते हैं。

2026 अद्यतन के मुख्य निष्कर्ष (Main findings of the 2026 update)

  • तापमान पूर्वानुमान (Temperature predictions): रिपोर्ट का अनुमान है कि 2026–2030 में औसत वैश्विक सतह तापमान 1850–1900 के मध्यमान से 1.3 °C और 1.9 °C के बीच अधिक होगा। इस अवधि में कम से कम एक वर्ष के 1.5 °C सीमा को पार करने की 91 प्रतिशत संभावना है और 75 प्रतिशत संभावना है कि पांच साल का औसत ऐसा करेगा。
  • क्षेत्रीय पैटर्न (Regional patterns): आर्कटिक (Arctic) के वैश्विक औसत की तुलना में साढ़े तीन गुना अधिक तेज़ी से गर्म होने की उम्मीद है, इस क्षेत्र में तापमान 1991–2020 के मध्यमान से लगभग 2.8 °C अधिक होने का अनुमान है। उच्च अक्षांश क्षेत्रों (High‑latitude regions) में गीली स्थितियाँ देखी जा सकती हैं, जबकि उपोष्णकटिबंधीय (subtropics) और मध्य अक्षांशों (mid‑latitudes) के कुछ हिस्सों में शुष्क मौसम का अनुभव हो सकता है。
  • अल नीनो प्रभाव (El Niño impacts): 2027 और 2028 में मज़बूत अल नीनो (El Niño) स्थितियों का अनुमान है, जो वैश्विक तापमान को बढ़ा सकती हैं और वर्षा पैटर्न को प्रभावित कर सकती हैं। अल नीनो घटनाएँ आम तौर पर भारत और दक्षिणी अफ्रीका में गर्म, शुष्क परिस्थितियाँ (warmer, drier conditions) लाती हैं और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में गीला मौसम (wetter weather) लाती हैं。
  • दीर्घकालिक निहितार्थ (Long‑term implications): WMO ज़ोर देता है कि 1.5 °C की अस्थायी अधिकता को दीर्घकालिक लक्ष्य के साथ भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए। बहरहाल, ग्रीनहाउस-गैस सांद्रता (greenhouse‑gas concentrations) बढ़ने के साथ इस तरह के एपिसोड अधिक लगातार हो जाएंगे। खाद्य सुरक्षा, जल संसाधनों और पारिस्थितिक तंत्र (ecosystems) पर गंभीर प्रभावों (severe impacts) से बचने के लिए तेज़ी से उत्सर्जन में कटौती (Rapid emission cuts) और अनुकूलन उपाय (adaptation measures) आवश्यक हैं。

निष्कर्ष

नवीनतम जलवायु दृष्टिकोण वैश्विक जलवायु कार्रवाई (global climate action) की तात्कालिकता को रेखांकित करता है। 1.5 °C के निशान का अल्पकालिक उल्लंघन (short‑lived breach) भी चरम मौसम (extreme weather), समुद्र के स्तर में वृद्धि (sea‑level rise) और पारिस्थितिक व्यवधान (ecological disruption) को बढ़ा सकता है। कमज़ोर समुदायों और पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा के लिए नीति निर्माताओं को शमन प्रयासों (mitigation efforts) में तेज़ी लानी चाहिए और अनुकूलन (adaptation) की योजना बनानी चाहिए。

स्रोत

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