चर्चा में क्यों?
मगरमच्छों और उनके आवासों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 17 जून को विश्व मगरमच्छ दिवस (World Crocodile Day) मनाया जाता है। 2026 की थीम, "लेगेसी इन एवरी स्केल" (Legacy in Every Scale), क्रोकोडिलियन (crocodilians) के प्राचीन वंश पर प्रकाश डालती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए इन सरीसृपों (reptiles) की रक्षा करने की आवश्यकता पर ज़ोर देती है। इस दिन को मनाने के लिए विभिन्न वन्यजीव समूहों ने दुनिया भर में शैक्षिक कार्यक्रम और संरक्षण अभियान आयोजित किए。
पृष्ठभूमि
विश्व मगरमच्छ दिवस पहली बार 2017 में मनाया गया था। मगरमच्छ संरक्षण पर वैश्विक ध्यान केंद्रित करने के लिए क्रोकोडाइल रिसर्च गठबंधन (Crocodile Research Coalition) और उसके सहयोगियों द्वारा इसकी शुरुआत की गई थी। मगरमच्छ, घड़ियाल और एलीगेटर (alligators) 200 मिलियन से अधिक वर्षों से अस्तित्व में हैं और इन्हें अक्सर "जीवित जीवाश्म" (living fossils) कहा जाता है। ये एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में उष्णकटिबंधीय आर्द्रभूमि, नदियों और मैंग्रोव (mangroves) में निवास करते हैं। ये जानवर शीर्ष शिकारी (apex predators) हैं जिनके शिकार करने और घोंसले बनाने की आदतें जलीय पारिस्थितिक तंत्र (aquatic ecosystems) को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं。
प्रमुख खतरे
- आवास का नुकसान: शहरीकरण, बांध निर्माण और आर्द्रभूमि के जल निकासी से घोंसले और भोजन के क्षेत्र नष्ट हो रहे हैं।
- अवैध शिकार और व्यापार: मगरमच्छों का शिकार उनकी त्वचा, मांस और शरीर के अंगों के लिए किया जाता है, जिससे उनकी आबादी में गिरावट आ रही है।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष: आर्द्रभूमि पर अतिक्रमण के कारण इंसानों से इनका सामना बढ़ गया है, जिसके परिणामस्वरूप अक्सर जवाबी कार्रवाई में इन्हें मार दिया जाता है।
- प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन: औद्योगिक अपशिष्ट, प्लास्टिक प्रदूषण और बढ़ता तापमान मगरमच्छ प्रजातियों के प्रजनन और अस्तित्व को प्रभावित करते हैं।
भारत में मगरमच्छ संरक्षण के प्रयास
भारत तीन क्रोकोडिलियन प्रजातियों का घर है - मगर (Mugger) मगरमच्छ, खारे पानी का (Saltwater) मगरमच्छ और घड़ियाल (Gharial)। 1970 के दशक की शुरुआत में इन प्रजातियों के शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। 1975 में भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development Programme) और खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization) की सहायता से मगरमच्छ संरक्षण परियोजना (Crocodile Conservation Project) शुरू की। इस कार्यक्रम के तहत ओडिशा में भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान (Bhitarkanika National Park) और राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (National Chambal Sanctuary) जैसे प्रजनन केंद्र और संरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए। ओडिशा एकमात्र ऐसा राज्य है जहां तीनों प्रजातियां पाई जाती हैं, और भारत अब दुनिया की घड़ियाल आबादी का लगभग अस्सी प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। सामुदायिक शिक्षा कार्यक्रमों, नदियों और आर्द्रभूमि की बहाली, और मगरमच्छ पारिस्थितिकी पर शोध ने पिछले पांच दशकों में इनकी आबादी को पुनर्जीवित करने में मदद की है。
निष्कर्ष
विश्व मगरमच्छ दिवस हमें याद दिलाता है कि मगरमच्छ प्राचीन जीव हैं जो जलीय पारिस्थितिक तंत्र का अभिन्न अंग हैं। आर्द्रभूमि का संरक्षण करके, अवैध शिकार से मुकाबला करके और स्थानीय समुदायों को शामिल करके, राष्ट्र यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि मगरमच्छ और अन्य सरीसृप पनपें। थीम "लेगेसी इन एवरी स्केल" हमें उनके लंबे विकासवादी इतिहास (evolutionary history) का सम्मान करने और भविष्य के लिए उन्हें सुरक्षित करने का आग्रह करती है。