चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र ने 17 जून को "रेंजलैंड्स: पहचानें, सम्मान करें, पुनर्स्थापित करें" (Rangelands: Recognize. Respect. Restore) थीम के साथ 2026 विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस (World Day to Combat Desertification and Drought) मनाया। केन्या ने पारिस्थितिक तंत्र, आजीविका और जलवायु लचीलेपन (climate resilience) को बनाए रखने में रेंजलैंड्स (rangelands) और पशुपालकों (pastoralists) की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करने के लिए वैश्विक कार्यक्रम की मेजबानी की。
पृष्ठभूमि
संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन (UN Convention to Combat Desertification - UNCCD) ने भूमि क्षरण, सूखे और सतत भूमि प्रबंधन के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 1995 में इस दिन की स्थापना की थी। 2026 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय रेंजलैंड्स और पशुपालक वर्ष (International Year of Rangelands and Pastoralists - IYRP) के अनुरूप फोकस रेंजलैंड्स पर स्थानांतरित हो गया। रेंजलैंड्स में घास के मैदान (grasslands), झाड़ियाँ (shrublands), सवाना (savannas) और शुष्क भूमि (drylands) शामिल हैं जो पृथ्वी की सतह के आधे से अधिक हिस्से को कवर करते हैं और लगभग दो अरब लोगों का समर्थन करते हैं。
मुख्य संदेश
- पहचानें (Recognize): भोजन, पानी, कार्बन भंडारण (carbon storage) और सांस्कृतिक पहचान प्रदान करने के बावजूद रेंजलैंड्स का अक्सर कम मूल्यांकन किया जाता है। 2026 की थीम उनके आर्थिक और पारिस्थितिक योगदान को पहचानने का आह्वान करती है।
- सम्मान करें (Respect): पशुपालक और स्वदेशी समुदाय (Indigenous communities) रेंजलैंड्स का स्थायी प्रबंधन करते हैं। सरकारों और समाजों को उनके पारंपरिक ज्ञान और भूमि अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
- पुनर्स्थापित करें (Restore): दुनिया के आधे तक रेंजलैंड्स अवक्रमित (degraded) हैं या खतरे में हैं। लचीलेपन के लिए टिकाऊ चराई, बीज बोने (re-seeding) और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से मिट्टी, वनस्पति और जल चक्र को बहाल करना आवश्यक है।
- नीतिगत फोकस: वक्ताओं ने 2026 के अंत में मंगोलिया में होने वाले UNCCD COP 17 से पहले सूखा तैयारियों, टिकाऊ पशुपालन (sustainable pastoralism) और जलवायु-अनुकूल आजीविका में निवेश का आग्रह किया।
निष्कर्ष
2026 के मरुस्थलीकरण दिवस ने दुनिया को याद दिलाया कि स्वस्थ रेंजलैंड्स खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता को रेखांकित करते हैं। इन परिदृश्यों (landscapes) को पहचानने, सम्मान करने और बहाल करने से सूखे और भूमि क्षरण का मुकाबला करने तथा पशुपालक समुदायों का समर्थन करने में मदद मिलेगी。