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World Happiness Report 2026: भारत की रैंकिंग, फिनलैंड और सोशल मीडिया

World Happiness Report 2026: भारत की रैंकिंग, फिनलैंड और सोशल मीडिया

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास समाधान नेटवर्क (Sustainable Development Solutions Network) ने गैलप (Gallup) और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर (Wellbeing Research Centre) के साथ मिलकर विश्व खुशहाली रिपोर्ट 2026 (World Happiness Report 2026) जारी की है। लगातार नौवें वर्ष फ़िनलैंड (Finland) दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की रैंकिंग में शीर्ष पर है। भारत 116वें स्थान पर है, जो पिछले साल के 118वें स्थान से थोड़ा ऊपर है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कैसे सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग युवाओं में भलाई (well-being) में गिरावट से जुड़ा है।

पृष्ठभूमि

विश्व खुशहाली रिपोर्ट 140 से अधिक देशों में जीवन संतुष्टि (life satisfaction) के स्तर का मूल्यांकन करती है। यह उन सर्वेक्षणों पर आधारित है जो उत्तरदाताओं से 0 से 10 के पैमाने पर अपनी खुशी को रेटिंग देने के लिए कहते हैं और आय, सामाजिक समर्थन (social support), जीवन प्रत्याशा (life expectancy), जीवन के विकल्प चुनने की स्वतंत्रता, उदारता (generosity) और भ्रष्टाचार की धारणा (perceptions of corruption) जैसे कारकों की जांच करते हैं। नॉर्डिक देश (Nordic countries) अपने मजबूत सामाजिक सुरक्षा जाल (social safety nets), संस्थानों में उच्च विश्वास और कार्य-जीवन संतुलन (work–life balance) के कारण लगातार शीर्ष पर रहते हैं। संघर्ष (conflict) या गंभीर आर्थिक कठिनाई का सामना करने वाले देश आमतौर पर नीचे रहते हैं।

प्रमुख बिंदु

  • शीर्ष प्रदर्शन करने वाले: फिनलैंड लगातार नौवें साल दुनिया का सबसे खुशहाल देश है। इसके बाद आइसलैंड, डेनमार्क, कोस्टा रिका, स्वीडन, नॉर्वे, इजरायल, नीदरलैंड, लक्जमबर्ग और स्विट्जरलैंड का स्थान है।
  • भारत की रैंकिंग: भारत 2025 से दो पायदान ऊपर चढ़कर 116वें स्थान पर है। दक्षिण एशिया के भीतर, नेपाल 93वें, पाकिस्तान 108वें और बांग्लादेश 123वें स्थान पर है। अफगानिस्तान सबसे कम खुशहाल देश बना हुआ है।
  • युवा और सोशल मीडिया: रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग - विशेष रूप से दिन में पांच घंटे से अधिक - किशोरों (teenagers), विशेषकर पश्चिमी देशों की लड़कियों में कम जीवन संतुष्टि से जुड़ा है। यह नोट करता है कि उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में युवाओं की खुशी में गिरावट ऑनलाइन बिताए गए समय में वृद्धि के साथ मेल खाती है।
  • खुशी को प्रभावित करने वाले कारक: खुशी के स्कोर की गणना करने के लिए उपयोग किए जाने वाले छह कारक प्रति व्यक्ति जीडीपी, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा (healthy life expectancy), सामाजिक समर्थन, चुनाव करने की स्वतंत्रता, उदारता और कम भ्रष्टाचार हैं। जो देश इन मैट्रिक्स पर अच्छा प्रदर्शन करते हैं उनका औसत जीवन मूल्यांकन (average life evaluations) अधिक होता है।
  • वैश्विक विषमताएं (Global contrasts): दुनिया के प्रमुख अंग्रेजी भाषी देशों में से कोई भी शीर्ष दस में शामिल नहीं है। सिएरा लियोन, लेबनान, अफगानिस्तान और दक्षिण सूडान जैसे संघर्ष प्रभावित (Conflict-affected) देश तालिका में सबसे नीचे हैं।

महत्व

  • नीति मार्गदर्शन (Policy guidance): देशों में खुशी की तुलना करके, रिपोर्ट सरकारों को सामाजिक सामंजस्य (social cohesion), स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और निष्पक्ष शासन को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  • युवा भलाई: सोशल मीडिया के उपयोग के बारे में निष्कर्ष किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों (mental health challenges) के बारे में जागरूकता बढ़ाते हैं और माता-पिता, स्कूलों और नियामकों (regulators) को स्वस्थ ऑनलाइन आदतों (healthier online habits) को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
  • भारत की प्रगति: यद्यपि भारत की रैंकिंग कम है, लेकिन इसके छोटे से सुधार से पता चलता है कि आर्थिक विकास और सामाजिक पहलों से जीवन संतुष्टि में वृद्धिशील लाभ (incremental gains) हो सकता है।

स्रोत: The Hindu

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