चर्चा में क्यों?
विश्व वन्यजीव दिवस (World Wildlife Day) प्रत्येक वर्ष 3 मार्च को मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन्यजीव संरक्षण और टिकाऊ प्रथाओं के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की कि 2026 की थीम औषधीय और सुगंधित पौधों (medicinal and aromatic plants) पर केंद्रित है।
पृष्ठभूमि
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने जंगली जानवरों और पौधों का जश्न मनाने और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 2013 में 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में घोषित किया। यह तारीख 1973 में वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora - CITES) को अपनाने की वर्षगांठ का प्रतीक है। पहला विश्व वन्यजीव दिवस 2014 में मनाया गया था।
2026 के लिए थीम
विश्व वन्यजीव दिवस 2026 का विषय "औषधीय और सुगंधित पौधे: स्वास्थ्य, विरासत और आजीविका का संरक्षण (Medicinal and Aromatic Plants: Conserving Health, Heritage and Livelihoods)" है। यह पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक फार्मास्यूटिकल्स के लिए उपयोग की जाने वाली पौधों की प्रजातियों के महत्व को रेखांकित करता है। विश्व स्तर पर, विकासशील देशों में 70-95 प्रतिशत लोग प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए पौधे आधारित उपचारों (plant-based remedies) पर निर्भर हैं। भारत, 17 मेगा-विविध देशों (mega-biodiverse countries) में से एक, लगभग 15,000 औषधीय पौधों की प्रजातियों को आश्रय देता है, जिनमें से लगभग 8,000 भारतीय चिकित्सा में उपयोग की जाती हैं।
प्रधानमंत्री का संदेश
- जैव विविधता का जश्न मनाना: प्रधानमंत्री मोदी ने जोर दिया कि भारत दुनिया के 70 प्रतिशत से अधिक बाघों (tigers) का घर है, इसमें एक सींग वाले गैंडे (one-horned rhinoceroses) और एशियाई हाथियों (Asiatic elephants) की सबसे बड़ी आबादी है, और एकमात्र देश है जहां एशियाई शेर (Asiatic lions) अभी भी स्वतंत्र रूप से घूमते हैं।
- संरक्षण पहल: उन्होंने इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (International Big Cat Alliance) जैसे कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला, जो बड़ी बिल्ली संरक्षण पर सहयोग को बढ़ावा देता है, और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, घड़ियाल, स्लॉथ भालू और चीतों के स्थानांतरण जैसी प्रजातियों के लिए लक्षित पहल करता है।
- सांस्कृतिक लोकाचार (Cultural ethos): प्रधानमंत्री ने प्रकृति और उसके वन्यजीवों के लिए भारत के पारंपरिक सम्मान को रेखांकित करते हुए वनों और बाघों की पारस्परिक निर्भरता की व्याख्या करते हुए एक संस्कृत श्लोक (Sanskrit verse) उद्धृत किया।
- अंतर्राष्ट्रीय महत्व: उन्होंने नागरिकों और वैश्विक समुदाय से भविष्य की पीढ़ियों के लिए वन्यजीवों की रक्षा और संरक्षण के अपने संकल्प को नवीनीकृत करने का आह्वान किया।
विश्व वन्यजीव दिवस का महत्व
- जागरूकता: यह दिन खतरे और लुप्तप्राय प्रजातियों की स्थिति की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है और संरक्षण की सफलताओं और चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।
- सतत विकास (Sustainable development): वन्यजीवों का संरक्षण परागण (pollination), जल विनियमन और जलवायु शमन जैसी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं (ecosystem services) का समर्थन करता है, जो मानव कल्याण (human well-being) को रेखांकित करते हैं।
- सांस्कृतिक विरासत: कई समुदायों का स्थानीय वन्यजीवों से गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव है। प्रजातियों की रक्षा इन परंपराओं और आजीविका की रक्षा करती है।
निष्कर्ष
विश्व वन्यजीव दिवस एक उत्सव और कार्रवाई का आह्वान दोनों है। 2026 की थीम हमें याद दिलाती है कि पौधे न केवल हमारे शरीर को ठीक करते हैं बल्कि सांस्कृतिक पहचान और आजीविका का भी समर्थन करते हैं। संरक्षण पहल और इसकी समृद्ध जैव विविधता में भारत का नेतृत्व इसे प्राकृतिक दुनिया की रक्षा के वैश्विक प्रयासों में सबसे आगे रखता है।
स्रोत: DD News