खबरों में क्यों?
28 मई 2026 को भारत और सिंगापुर के अधिकारियों ने अपनी 16वीं रक्षा नीति वार्ता (Defence Policy Dialogue) के लिए नई दिल्ली में मुलाकात की। वार्ता की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव (Defence Secretary) और सिंगापुर के रक्षा के स्थायी सचिव (Permanent Secretary for Defence) ने की। उन्होंने चल रहे सहयोग की समीक्षा की और इंडो-पैसिफिक में साइबर सुरक्षा (cyber security), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence), समुद्री सुरक्षा (maritime security) और संयुक्त अभ्यास (joint exercises) जैसे उभरते क्षेत्रों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने नियम-आधारित व्यवस्था (rules-based order) और आसियान (ASEAN) ढांचे के तहत बहुपक्षीय सहयोग (multilateral cooperation) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
पृष्ठभूमि
सिंगापुर मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच मलय प्रायद्वीप (Malay Peninsula) के दक्षिणी सिरे पर स्थित एक छोटा सा द्वीप शहर-राज्य (island city-state) है। मलक्का जलडमरूमध्य (Straits of Malacca) के साथ इसके स्थान ने इसे दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक बना दिया है। इलाका ज्यादातर निचले स्तर का है, जिसमें हल्की लहरदार पहाड़ियां और उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी मानसून (monsoons) द्वारा चिह्नित एक उष्णकटिबंधीय जलवायु (tropical climate) है। सबसे ऊँचा प्राकृतिक बिंदु, बुकिट तिमाह (Bukit Timah), समुद्र तल से केवल 166 मीटर ऊपर है। सिंगापुर ने 1965 में स्वतंत्रता प्राप्त की और तब से यह एक प्रमुख वित्तीय और तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित हुआ है।
रक्षा संबंध और प्रमुख परिणाम
- दीर्घकालिक साझेदारी (Long-standing partnership): भारत और सिंगापुर ने 2003 में एक रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। संवाद तंत्र (dialogue mechanism) संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और पोर्ट कॉल (port calls) की नियमित समीक्षा की अनुमति देता है। भारत कलाईकुंडा (Kalaikunda) में वायु सेना स्टेशन और बबीना (Babina) में आर्मर्ड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (Armoured Training Institute) में सिंगापुर के बलों को प्रशिक्षित करता है।
- नए डोमेन (New domains): 2026 की बैठक में साइबर रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों (space technologies) में सहयोग पर जोर दिया गया। दोनों पक्ष मानते हैं कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (critical infrastructure) और डेटा नेटवर्क की रक्षा करना समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने जितना ही महत्वपूर्ण है।
- समुद्री सुरक्षा (Maritime security): भारत और सिंगापुर समुद्री डोमेन जागरूकता (maritime domain awareness) को मजबूत करने और इंडो-पैसिफिक में नेविगेशन के संचालन की स्वतंत्रता पर सहयोग करने पर सहमत हुए। वे समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (United Nations Convention on the Law of the Sea) के पालन और संचार की खुली समुद्री लाइनों (sea lines of communication) को बनाए रखने का समर्थन करते हैं।
- बहुपक्षीय जुड़ाव (Multilateral engagement): दोनों देशों ने आसियान (ASEAN) के नेतृत्व वाले तंत्र जैसे कि आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ASEAN Defence Ministers’ Meeting-Plus) के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की। वे सिंगापुर-भारत - थाईलैंड समुद्री अभ्यास (Singapore-India – Thailand maritime exercise - SITMEX) और अन्य क्षेत्रीय पहलों में भाग लेना जारी रखेंगे।
निष्कर्ष
16वीं रक्षा नीति वार्ता (Defence Policy Dialogue) दर्शाती है कि भारत-सिंगापुर संबंध पारंपरिक सुरक्षा सहयोग (conventional security cooperation) से कैसे आगे बढ़ रहे हैं। साइबर खतरों, उभरती प्रौद्योगिकियों और समुद्री चुनौतियों का एक साथ समाधान करके, दोनों देशों का लक्ष्य व्यापक इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करना है।