विज्ञान और प्रौद्योगिकी

3I/ATLAS Comet: इंटरस्टेलर मूल और उच्च ड्यूटेरियम स्तर

3I/ATLAS Comet: इंटरस्टेलर मूल और उच्च ड्यूटेरियम स्तर

ख़बरों में क्यों?

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) और ALMA के साथ किए गए अवलोकनों से पता चला है कि अंतरतारकीय धूमकेतु (interstellar comet) 3I/ATLAS में उच्च ड्यूटेरियम (deuterium) स्तर वाला पानी है - जो हमारे सौर मंडल में पैदा हुए धूमकेतुओं में पाए जाने वाले अनुपात का लगभग तीस गुना है। इसमें कार्बन-13 की मात्रा भी बहुत कम है। इन सुरागों से पता चलता है कि धूमकेतु 10-12 अरब वर्ष पहले आकाशगंगा के एक ठंडे क्षेत्र में बना था, जिससे यह अब तक अध्ययन की गई सबसे पुरानी वस्तुओं में से एक बन गया है। 3I/ATLAS खोजा गया केवल तीसरा अंतरतारकीय पिंड (interstellar object) है और यह एक संक्षिप्त यात्रा के बाद सौर मंडल को छोड़ देगा।

पृष्ठभूमि

चिली में Asteroid Terrestrial-impact Last Alert System (ATLAS) टेलीस्कोप ने पहली बार 1 जुलाई 2025 को धूमकेतु को देखा था। इसके अतिपरवलयिक प्रक्षेपवक्र (hyperbolic trajectory) से पता चला कि यह सौर मंडल के बाहर से आया है। नामकरण परंपरा (naming convention) का पालन करते हुए, खगोलविदों ने इसे 3I/ATLAS नाम दिया - 1I/'Oumuamua (2017) और 2I/Borisov (2019) के बाद यह तीसरा ज्ञात अंतरतारकीय पिंड है। खोज के समय धूमकेतु सूर्य से लगभग 670 मिलियन किलोमीटर दूर था। यह अक्टूबर 2025 में मंगल की कक्षा के अंदर से गुजरा और अब अंतरतारकीय अंतरिक्ष में वापस जा रहा है। लगभग 60 किमी प्रति सेकंड की गति के साथ, यह कभी वापस नहीं आएगा। इस पिंड का व्यास 20 किलोमीटर तक होने का अनुमान है और यह सामान्य धूमकेतुओं की तरह कोमा (coma) और पूंछ (tail) प्रदर्शित करता है, जो दर्शाता है कि इसमें वाष्पशील बर्फ (volatile ices) है।

नए अवलोकनों का क्या अर्थ है

  • प्राचीन उत्पत्ति: उच्च ड्यूटेरियम और कम कार्बन-13 सामग्री आकाशगंगा के जन्म के कुछ ही समय बाद एक अत्यंत ठंडे वातावरण में इसके निर्माण का संकेत देती है। ऐसी स्थितियां 10-12 अरब वर्ष पहले मौजूद थीं जब भारी तत्वों की कमी थी।
  • प्रीबायोटिक सुराग (Prebiotic clues): क्योंकि अंतरतारकीय धूमकेतु अन्य ग्रह प्रणालियों से आदिम सामग्री ले जा सकते हैं, उनके रसायन विज्ञान का अध्ययन करने से पता चल सकता है कि अंतरिक्ष में कार्बनिक अणु (organic molecules) कैसे बनते हैं।
  • दुर्लभ अंतरतारकीय आगंतुक: अब तक केवल तीन अंतरतारकीय पिंडों को देखा गया है। प्रत्येक वस्तु हमारे सौर मंडल से परे ग्रहों के निर्माण के बारे में अंतर्दृष्टि प्रदान करती है और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency) के नियोजित धूमकेतु इंटरसेप्टर (Comet Interceptor) जैसे मिशनों को प्रेरित करती है।
  • प्रक्षेपवक्र और नियति (Trajectory and fate): 3I/ATLAS ने धनु तारामंडल (Sagittarius constellation) की दिशा से सौर मंडल में प्रवेश किया। एक बार जब यह हमारे सूर्य के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव (gravitational influence) को छोड़ देगा, तो यह लाखों वर्षों तक आकाशगंगा में यात्रा करेगा।

निष्कर्ष

3I/ATLAS हमारी आकाशगंगा के प्रारंभिक इतिहास की एक दुर्लभ झलक प्रस्तुत करता है। इसकी प्राचीन, बर्फीली संरचना से पता चलता है कि ग्रहों के निर्माण खंड (building blocks) व्यापक परिस्थितियों में बने हैं। इस तरह के आगंतुकों का निरंतर अवलोकन व्यापक ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ का विस्तार करेगा।

स्रोत

India Today

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