अर्थव्यवस्था

Agarwood: असम निर्यात, Aquilaria पेड़ और CITES परमिट

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चर्चा में क्यों?

असम ने पूर्ण वैधानिक अनुमोदनों (statutory approvals) के तहत अगरवुड (agarwood) चिप्स की अपनी पहली वैध खेप (consignment) - 100 किलोग्राम सऊदी अरब (Saudi Arabia) और 12 किलोग्राम संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) को - भेजी। लगभग ₹2.35 करोड़ के मूल्य का यह निर्यात एक मील का पत्थर है क्योंकि सख्त नियमों (stringent regulations) के कारण अगरवुड का व्यापार काफी हद तक अनौपचारिक (informal) रहा था। इस सफलता से पूर्वोत्तर भारत में एक्विलेरिया (Aquilaria) पेड़ों की खेती करने वाले किसानों के लिए एक आकर्षक बाजार (lucrative market) खुलने की उम्मीद है।

पृष्ठभूमि

अगरवुड, जिसे औद (oud) भी कहा जाता है, एक सुगंधित रालयुक्त लकड़ी (fragrant resinous wood) है जो तब बनती है जब एक्विलेरिया के पेड़ एक कवक (fungus) से संक्रमित होते हैं या चोटिल हो जाते हैं। समय के साथ पेड़ संक्रमण के जवाब में गहरा राल (dark resin) पैदा करता है, और ट्रंक के हिस्से अत्यधिक सुगंधित (aromatic) हो जाते हैं। राल को आवश्यक तेल (essential oil) में डिस्टिल्ड (distilled) किया जाता है जिसका उपयोग पश्चिम एशिया और पूर्वी एशिया में इत्र (perfumes) और धूप (incense) में किया जाता है। अत्यधिक कटाई (overharvesting) और अवैध कटाई के कारण, एक्विलेरिया प्रजातियों को लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) के परिशिष्ट II (Appendix II) के तहत सूचीबद्ध किया गया है, जिसके निर्यात के लिए परमिट की आवश्यकता होती है। भारत केवल खेती वाले स्रोतों (cultivated sources) से सीमित और विनियमित व्यापार (regulated trade) की अनुमति देता है।

मुख्य बिंदु

  • कानूनी ढांचा (Legal framework): निर्यात को प्रतिबंधित निर्यात लाइसेंस (restricted export licence) और CITES परमिट के माध्यम से अधिकृत किया गया था, यह सुनिश्चित करते हुए कि लकड़ी खेती वाले पेड़ों से आई थी न कि जंगली आबादी (wild populations) से।
  • आर्थिक क्षमता (Economic potential): अगरवुड दुनिया की सबसे मूल्यवान वस्तुओं में से एक है; प्रीमियम ग्रेड लाखों रुपये प्रति किलोग्राम प्राप्त कर सकते हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि यदि खेती का विस्तार होता है तो विनियमित निर्यात से असम को सालाना ₹50,000 करोड़ तक की कमाई हो सकती है।
  • किसानों को लाभ: यह व्यापार उन छोटे किसानों के लिए एक कानूनी मार्ग प्रदान करता है जो दशकों से एक्विलेरिया के पेड़ उगा रहे हैं लेकिन कानूनी रूप से नहीं बेच सके। उच्च कीमतें कृषि आय (farm incomes) बढ़ा सकती हैं और टिकाऊ कृषि वानिकी (sustainable agroforestry) को प्रोत्साहित कर सकती हैं।
  • संरक्षण और स्थिरता (Conservation and sustainability): केवल खेती वाले अगरवुड को प्रमाणित करके, भारत का उद्देश्य जंगली एक्विलेरिया आबादी पर दबाव कम करना और कृषि वानिकी योजनाओं (agroforestry schemes) के तहत वृक्षारोपण को बढ़ावा देना है।

निष्कर्ष

असम का अगरवुड का पहला कानूनी शिपमेंट विनियमित और टिकाऊ व्यापार (sustainable trade) की दिशा में एक बदलाव का संकेत देता है। यदि ठीक से प्रबंधित किया जाए, तो लुप्तप्राय पेड़ की प्रजातियों (endangered tree species) की रक्षा करते हुए अगरवुड का निर्यात क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बदल सकता है।

स्रोत

The Hindu

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