समाचार में क्यों?
संरक्षणवादियों ने बाघों और आदिवासी समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास के रूप में तेलंगाना में Amrabad Tiger Reserve की ओर ध्यान आकर्षित किया है। हाल के सर्वेक्षण और इको-टूरिज़्म (eco‑tourism) परियोजनाएँ इसके पारिस्थितिक महत्व और अद्वितीय प्रबंधन चुनौतियों पर ज़ोर देती हैं।
पृष्ठभूमि
Amrabad Tiger Reserve तेलंगाना के नागरकुर्नूल और नलगोंडा जिलों की नल्लामाला पहाड़ियों में स्थित है। इसे 1983 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किया गया था। 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद, यह Project Tiger के तहत एक टाइगर रिज़र्व बन गया। लगभग 2,611 वर्ग किलोमीटर को कवर करते हुए, यह भारत के सबसे बड़े टाइगर रिज़र्व्स में से एक है। कोर क्षेत्र भारतीय रिज़र्व्स में आकार में दूसरे स्थान पर है, जबकि कुल क्षेत्रफल छठे स्थान पर है।
मुख्य विशेषताएँ
- रिज़र्व में बीहड़ पहाड़ियाँ, गहरी घाटियाँ और गॉर्ज शामिल हैं। कई बारहमासी धाराएँ यहाँ से निकलती हैं और कृष्णा नदी में मिलती हैं, जो श्रीशैलम और नागार्जुनसागर जैसे बड़े जलाशयों को सहारा देती हैं।
- इसमें तेलंगाना में बाघों की सबसे बड़ी आबादी है। घने जंगल तेंदुओं, स्लॉथ भालू, जंगली कुत्तों, सांभर और चीतल जैसे शाकाहारी जीवों और पक्षियों तथा सरीसृपों की एक समृद्ध विविधता को भी आश्रय देते हैं।
- चेन्चू (Chenchu) जनजाति, जो एक Particularly Vulnerable Tribal Group है, रिज़र्व के भीतर रहती है। बस्तियाँ अलग-थलग जंगली बस्तियों (पेंटा) से लेकर परिधि पर छोटे गाँवों तक हैं। इको-डेवलपमेंट कार्यक्रम आजीविका सहायता प्रदान करते हैं और चेन्चू लोगों को सुरक्षा पर्यवेक्षकों के रूप में संलग्न करते हैं।
- आगंतुक फराहबाद और ऑक्टोपस व्यू पॉइंट, झरनों और अक्कमहादेवी गुफा परिसर जैसे दृष्टिकोणों तक पहुँच सकते हैं। व्यवधान को कम करने के लिए इको-टूरिज़्म गतिविधियों को विनियमित किया जाता है।
- रिज़र्व जंगल की आग, चरागाह रखरखाव, खरपतवार नियंत्रण और जल संरक्षण जैसे मुद्दों का प्रबंधन करता है। यह माउस डियर को फिर से लाने के लिए एक सॉफ्ट-रिलीज़ कार्यक्रम भी चलाता है।
निष्कर्ष
Amrabad Tiger Reserve वन्यजीव संरक्षण और आदिवासी कल्याण के बीच नाजुक संतुलन का उदाहरण है। इसके विस्तृत जंगल की रक्षा करने से नदी के जलग्रहण क्षेत्रों को बनाए रखने में मदद मिलती है और पूर्वी घाट (Eastern Ghats) में जैव विविधता का समर्थन होता है। इसके भविष्य के लिए निरंतर सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक प्रबंधन आवश्यक हैं।
स्रोत: TOI