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Anavaran Portal: वनों की कटाई के अलर्ट, FSI और वन सर्वेक्षण

Anavaran Portal: वनों की कटाई के अलर्ट, FSI और वन सर्वेक्षण

चर्चा में क्यों?

भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India - FSI) ने अपनी AI-आधारित अनावरण-वनों की कटाई चेतावनी प्रणाली (Anavaran‑Deforestation Alert System) को रोक दिया है, जो राज्यों को संभावित वन क्षेत्र के नुकसान के बारे में पाक्षिक (fortnightly) अलर्ट भेज रही थी। पोर्टल पर डेटा नवंबर 2025 से अपडेट नहीं किया गया है, और अधिकारियों का कहना है कि वे पायलट प्रोजेक्ट की उपयोगिता का मूल्यांकन कर रहे हैं। इस रोक ने वास्तविक समय (near‑real‑time) के करीब वन निगरानी के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पृष्ठभूमि

भारतीय वन सर्वेक्षण की स्थापना 1981 में वन संसाधनों के पूर्व-निवेश सर्वेक्षण (Pre‑investment Survey of Forest Resources) के उत्तराधिकारी के रूप में की गई थी। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) के तहत देहरादून में मुख्यालय, यह उपग्रह इमेजरी (satellite imagery) और क्षेत्रीय सर्वेक्षणों (field surveys) का उपयोग करके भारत के वन आवरण (forest cover) का आकलन करने के लिए जिम्मेदार है। इसके शासनादेशों में से एक द्विवार्षिक स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (State of Forest Report) संकलित करना है, और यह जंगल की आग चेतावनी (forest fire alert) प्रणाली भी संचालित करता है।

अनावरण पोर्टल को जनवरी 2024 में एक पायलट के रूप में लॉन्च किया गया था, ताकि वास्तविक समय के करीब वनों की कटाई (deforestation) अलर्ट प्रदान किया जा सके। यह उच्च-रिज़ॉल्यूशन सेंटीनेल-2 (Sentinel‑2) ऑप्टिकल छवियों (optical images) का विश्लेषण करने के लिए Google अर्थ इंजन (Google Earth Engine) का उपयोग करता है और बादल वाले मौसम के लिए सेंटीनेल-1 (Sentinel‑1) सिंथेटिक-एपर्चर रडार (synthetic‑aperture radar) डेटा को एकीकृत करता है। मशीन-लर्निंग एल्गोरिदम (Machine‑learning algorithms) वृक्षों के आवरण के असामान्य नुकसान को चिह्नित करने के लिए उसी महीने के ऐतिहासिक आधार रेखाओं (historical baselines) के साथ हाल की छवियों की तुलना करते हैं। खोजे गए पैच के निर्देशांक (Coordinates) फिर जमीनी सत्यापन (on‑the‑ground verification) के लिए राज्य के अधिकारियों के साथ साझा किए जाते हैं। जनवरी 2024 और अक्टूबर 2025 के बीच पोर्टल ने कथित तौर पर 12,000 से अधिक अलर्ट जारी किए, जिसमें पंजाब, आंध्र प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश सबसे अधिक सूचनाएं प्राप्त करने वाले राज्यों में शामिल हैं।

मुख्य बिंदु और महत्व

  • नियर-रियल-टाइम निगरानी (Near‑real‑time monitoring): द्विवार्षिक वन रिपोर्टों (biennial forest reports) के विपरीत, पोर्टल का उद्देश्य एक पखवाड़े के भीतर वनों की कटाई को चिह्नित करना है, जिससे स्थानीय अधिकारियों (local authorities) द्वारा तेजी से कार्रवाई की जा सके।
  • प्रौद्योगिकी एकीकरण (Technology integration): ऑप्टिकल और रडार उपग्रह (radar satellite) डेटा का संयोजन बादल (cloudy) या मानसून की अवधि के दौरान भी निगरानी की अनुमति देता है। मशीन-लर्निंग मॉडल मौसमी पैटर्न (seasonal patterns) की तुलना करके झूठी सकारात्मकता (false positives) को कम करते हैं।
  • पायलट स्थिति: FSI अधिकारियों का कहना है कि अनावरण (Anavaran) को कभी पूरी तरह से लॉन्च नहीं किया गया था; वर्तमान विराम उन्हें राज्यों से प्रतिक्रिया (feedback) एकत्र करने और एल्गोरिदम (algorithms) को परिष्कृत करने की अनुमति देता है। कुछ राज्यों को उम्मीद है कि प्रणाली बहाल (reinstated) हो जाएगी क्योंकि यह पारंपरिक क्षेत्र निरीक्षण (traditional field inspections) का पूरक है।
  • आगे का रास्ता: विशेषज्ञ रिमोट-सेंसिंग (remote‑sensing) डेटा का विश्लेषण करने और वनीकरण (afforestation) और वन-संरक्षण (forest‑protection) कार्यक्रमों के साथ वनों की कटाई के अलर्ट को एकीकृत करने के लिए राज्यों के भीतर क्षमता निर्माण (building capacity) का सुझाव देते हैं।

स्रोत: The Indian Express

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