पर्यावरण

Arogya Van Initiative NHAI: औषधीय पेड़, राजमार्ग वृक्षारोपण और आयुर्वेद

Arogya Van Initiative NHAI: औषधीय पेड़, राजमार्ग वृक्षारोपण और आयुर्वेद

चर्चा में क्यों?

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India - NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अप्रयुक्त भूमि पार्सल (unused land parcels) पर औषधीय पेड़ों (medicinal trees) के विषयगत वृक्षारोपण (thematic plantations) को विकसित करने के लिए आरोग्य वन (Arogya Van) पहल शुरू की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सड़क किनारे जैव विविधता (biodiversity) को समृद्ध करना और भारत की पारंपरिक औषधीय विरासत (traditional medicinal heritage) के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है।

पृष्ठभूमि

भारत का विशाल राजमार्ग नेटवर्क अक्सर कम वनस्पति (vegetation) वाले बंजर हिस्सों से होकर गुजरता है। ग्रीन बेल्ट (green belts) बनाने के अवसर को पहचानते हुए, NHAI ने आरोग्य वन नामक एक पहल तैयार की, जिसका अर्थ है "औषधीय जंगल (medicinal forest)"। सजावटी पेड़ों (ornamental trees) के बजाय, यह चिकित्सा की आयुर्वेद (Ayurveda) और यूनानी (Unani) प्रणालियों में मूल्यवान प्रजातियों को लगाने का प्रस्ताव करता है। यह दृष्टिकोण सांस्कृतिक विरासत के साथ पर्यावरण प्रबंधन (environmental stewardship) को एकीकृत करता है।

कार्यक्रम के प्रमुख तत्व

  • पैमाना और दायरा (Scale and scope): पहले चरण में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में कुल 62.8 हेक्टेयर भूमि के 17 पार्सल शामिल हैं।
  • औषधीय प्रजातियाँ (Medicinal species): नीम (Azadirachta indica), आंवला (Phyllanthus emblica), जामुन (Syzygium cumini), इमली (Tamarind), अशोक (Ashoka) और अर्जुन (Arjuna) सहित लगभग 36 स्वदेशी प्रजातियाँ (indigenous species) लगाई जाएंगी। प्रजातियों का चयन स्थानीय जलवायु और मिट्टी की स्थिति के आधार पर किया जाता है।
  • रणनीतिक स्थान (Strategic locations): टोल प्लाजा (toll plazas), इंटरचेंज (interchanges), विश्राम क्षेत्रों (rest areas) और रास्ते की सुविधाओं (wayside amenities) के पास वृक्षारोपण विकसित किया जाएगा ताकि यात्री ब्रेक लेते समय औषधीय पौधों के बारे में जान सकें।
  • सामुदायिक भागीदारी (Community participation): पौधारोपण और रखरखाव (maintenance) में स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (self-help groups) और नर्सरी को लगाया जाएगा। NHAI की योजना है कि वृक्षारोपण के जीवित रहने को सुनिश्चित करने के लिए कम से कम तीन साल तक उनका रखरखाव किया जाए।
  • जागरूकता और शिक्षा: सूचनात्मक साइनेज (informational signage) और क्यूआर कोड (QR codes) आगंतुकों को प्रजातियों की पहचान करने और पारंपरिक चिकित्सा में उनके उपयोग को समझने में मदद करेंगे।

महत्व

  • जैव विविधता संवर्धन (Biodiversity enhancement): विविध औषधीय पेड़ लगाना पारिस्थितिक संतुलन (ecological balance) में सुधार करता है, पक्षियों और कीड़ों के लिए आवास प्रदान करता है और राजमार्गों के साथ हीट आइलैंड प्रभाव (heat island effect) को कम करता है।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव (Cultural connection): यह पहल हर्बल दवाओं (herbal medicine) के बारे में ज्ञान को पुनर्जीवित करती है और लोगों को देशी पौधों की प्रजातियों का सम्मान और संरक्षण करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  • सतत विकास (Sustainable development): ग्रीन कॉरिडोर (Green corridors) वायु प्रदूषण को कम कर सकते हैं, कार्बन को सोख (sequester) सकते हैं और मिट्टी के कटाव (soil erosion) को रोक सकते हैं, साथ ही नर्सरी और रखरखाव कार्य में रोजगार के छोटे अवसर पैदा कर सकते हैं।

निष्कर्ष

आरोग्य वन कार्यक्रम दर्शाता है कि कैसे बुनियादी ढांचा (infrastructure) परियोजनाओं को पर्यावरणीय और सांस्कृतिक लक्ष्यों के साथ सामंजस्य (harmonised) स्थापित किया जा सकता है। राजमार्गों के किनारे अच्छी तरह से बनाए गए औषधीय उद्यान एकरसता (monotony) को सीखने के अनुभवों में बदल सकते हैं और स्वस्थ परिदृश्यों (healthier landscapes) में योगदान कर सकते हैं।

स्रोत: पीआईबी (PIB)

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