चर्चा में क्यों?
फसलों का त्योहार बैसाखी 14 अप्रैल 2026 को मनाया गया। वैशाख महीने के पहले दिन मनाया जाने वाला यह पंजाबी और सिख नव वर्ष (New Year) का प्रतीक है। इस वर्ष के समारोह भारत और प्रवासी भारतीयों (diaspora) में गुरुद्वारों में बड़े जुलूसों (processions) और प्रार्थनाओं के लिए उल्लेखनीय थे।
पृष्ठभूमि
बैसाखी (जिसे वैसाखी भी कहा जाता है) मुख्य रूप से पंजाब में मनाया जाने वाला वसंत फसल उत्सव (spring harvest festival) है। यह रबी फसलों के पकने और एक नए कृषि वर्ष की शुरुआत का स्मरण कराता है। सिखों के लिए, यह 13 अप्रैल 1699 को गुरु गोबिंद सिंह (Guru Gobind Singh) द्वारा खालसा पंथ (Khalsa Panth) के गठन का भी प्रतीक है। दसवें गुरु ने अपने अनुयायियों को आनंदपुर साहिब बुलाया और पहले पांच सिखों को खालसा में शामिल किया, पांच ककार (केश, कंघा, कड़ा, कच्छा और कृपाण) द्वारा बंधे समुदाय को औपचारिक रूप दिया।
समारोह और महत्व
- धार्मिक अनुष्ठान (Religious observances): श्रद्धालु विशेष प्रार्थनाओं के लिए गुरुद्वारों में जाते हैं और कीर्तन सुनते हैं। गुरु ग्रंथ साहिब को गायन और ढोल की थाप के साथ जुलूस (नगर कीर्तन) में निकाला जाता है।
- फसल उत्सव: किसान गेहूं और अन्य रबी फसलों की सफल कटाई के लिए धन्यवाद देते हैं। मेले और सामुदायिक भोजन (लंगर) आयोजित किए जाते हैं, और लोग सरसों दा साग और मिठाई जैसे पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेते हैं।
- सांस्कृतिक गतिविधियां: भांगड़ा (Bhangra) और गिद्दा (Gidda) जैसे लोक नृत्य, रंगीन वेशभूषा और लोक संगीत इस दिन को जीवंत कर देते हैं। कई गांवों में झूलों, कुश्ती और प्रतियोगिताओं वाले मेले लगते हैं।
- क्षेत्रीय नाम: इसी तरह के नए साल के त्योहार भारत भर में उसी तारीख को या उसके आसपास मनाए जाते हैं। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में यह पोहेला बोइशाख (Pohela Boishakh), असम में बोहाग बिहू (Bohag Bihu), केरल में विशु (Vishu) और तमिलनाडु में पुथंडु (Puthandu) है।
- ऐतिहासिक महत्व: बैसाखी 1919 की जलियांवाला बाग (Jallianwala Bagh) त्रासदी से जुड़ी है। 13 अप्रैल 1919 को, ब्रिटिश सैनिकों ने अमृतसर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिससे स्वतंत्रता आंदोलन को बल मिला।
स्रोत: NDTV · Outlook India