पर्यावरण

Barn Swallow: मणिपुर, इंफाल घाटी में निवासी पक्षी

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समाचार में क्यों?

Wildlife Institute of India के एक अध्ययन में मणिपुर की इंफाल घाटी में साल भर रहने वाले बार्न स्वैलो (Hirundo rustica) की एक प्रजनन आबादी का दस्तावेजीकरण किया गया है। पारंपरिक रूप से लंबी दूरी के प्रवासियों के रूप में जाने जाने वाले ये पक्षी अब स्थायी रूप से बस गए हैं, जो बताता है कि जलवायु परिवर्तन और स्थानीय स्थितियां प्रवासी व्यवहार को बदल रही हैं।

पृष्ठभूमि

बार्न स्वैलो दुनिया के सबसे व्यापक पैसेराइन (passerine) पक्षियों में से एक है। शीतोष्ण (temperate) उत्तरी गोलार्ध में प्रजनन करते हुए, यह गैर-प्रजनन के मौसम में दक्षिणी गोलार्ध में प्रवास करता है। यह प्रजाति अपनी कांटेदार पूंछ, चमकदार नीले-काले ऊपरी हिस्से और दालचीनी जैसे निचले हिस्से के लिए जानी जाती है। यद्यपि बार्न स्वैलो कभी-कभी अपनी विशिष्ट सीमा के दक्षिण में प्रजनन करते हैं, लेकिन इनका स्थायी निवास असामान्य है।

शोधकर्ताओं ने 2022-23 में मणिपुर की इंफाल घाटी में लगभग 50 घरों और अन्य संरचनाओं में सर्वेक्षण किया। उन्होंने 45 पक्षियों को छल्ले (ring) पहनाए और साल भर घोंसलों की निगरानी की। अवलोकनों से पता चला कि जोड़े वसंत और शरद ऋतु दोनों में प्रजनन कर रहे थे, जो दर्शाता है कि आबादी अब प्रवास नहीं करती है। यह निवासी आबादी स्थानीय गर्मी, कृषि परिदृश्य जो प्रचुर मात्रा में कीड़े प्रदान करते हैं, और शिकार में कमी का परिणाम हो सकती है।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

  • स्थायी निवास: छल्ले पहनाने के महीनों बाद रंगीन छल्ले वाले पक्षियों को उन्हीं स्थानों पर फिर से देखा गया, जो साबित करता है कि उन्होंने लंबा प्रवास नहीं किया।
  • मिश्रित उप-प्रजाति लक्षण: ये पक्षी उप-प्रजातियों के बीच मध्यवर्ती रूपात्मक विशेषताओं को प्रदर्शित करते हैं, जो बताता है कि वे संकर (hybrids) हो सकते हैं या एक विकासवादी संक्रमण का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • प्रजनन व्यवहार: प्रतिवर्ष कई ब्रूड (broods) देखे गए, जिनमें बरामदे और बिजली के खंभों जैसी मानव निर्मित संरचनाओं पर घोंसले बनाए गए थे।
  • सांस्कृतिक महत्व: स्थानीय लोग इस पक्षी को “संब्रांग” कहते हैं और इसे देवी लक्ष्मी से जोड़ते हैं, जिससे लोगों को घोंसलों की रक्षा करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। यह सांस्कृतिक श्रद्धा प्रजनन स्थलों की सुरक्षा में मदद करती है।

बार्न स्वैलो के बारे में

  • वितरण: यह प्रजाति यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका में प्रजनन करती है और अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिणी एशिया में सर्दियाँ बिताती है। यह खुले आवासों जैसे खेतों, घास के मैदानों, दलदलों और तटीय क्षेत्रों को तरजीह देती है।
  • आकार और रूप-रंग: वयस्क लगभग 15-19 सेमी लंबे होते हैं और उनके पंखों का फैलाव 32-34 सेमी होता है। उनके ऊपरी हिस्से चमकदार नीले-काले होते हैं और उनकी गहरी कांटेदार पूंछ पर सफेद धब्बे होते हैं।
  • संरक्षण स्थिति: International Union for Conservation of Nature (IUCN) बार्न स्वैलो को 'कम से कम चिंता' (Least Concern) के रूप में सूचीबद्ध करता है, लेकिन स्थानीय आबादी आवास परिवर्तन से प्रभावित हो सकती है।

महत्व

  • मणिपुर में एक निवासी आबादी का दस्तावेजीकरण इस बारे में हमारी समझ को व्यापक बनाता है कि प्रवासी प्रजातियां जलवायु परिवर्तन और मानव-संशोधित परिदृश्यों पर कैसे प्रतिक्रिया करती हैं।
  • यह अध्ययन सामुदायिक भागीदारी के मूल्य को रेखांकित करता है; “संब्रांग” के लिए स्थानीय सम्मान ने घोंसलों की रक्षा करने और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने में मदद की है।
  • आगे का शोध स्पष्ट कर सकता है कि क्या यह आबादी एक नई उप-प्रजाति या एक संकर क्षेत्र (hybrid zone) का प्रतिनिधित्व करती है, जो पक्षियों के विकासवादी अध्ययन में योगदान देती है।

निष्कर्ष

मणिपुर में निवासी बार्न स्वैलो की खोज यह दर्शाती है कि जाने-माने प्रवासी पक्षी भी बदलती परिस्थितियों के अनुकूल हो सकते हैं। यह पर्यावरण परिवर्तन के संकेतक के रूप में वन्यजीवों के बदलते व्यवहार की निगरानी करने की आवश्यकता को भी उजागर करता है।

स्रोत: TH

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