समाचार में क्यों?
शोधकर्ताओं ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के जंगलों में तितली की एक नई प्रजाति का वर्णन किया है। Basar Duke, या Euthalia zubeengargi नाम की इस प्रजाति की खोज लेपा राडा (Lepa Rada) जिले के बासर (Basar) क्षेत्र में हुई थी। अब तक केवल दो नमूने ही दर्ज किए गए हैं, जो इसे भारत की सबसे दुर्लभ तितलियों में से एक बनाता है। इस कीट का नाम असमिया गायक जुबीन गर्ग (Zubeen Garg) के क्षेत्रीय संस्कृति में उनके योगदान के सम्मान में रखा गया है।
पृष्ठभूमि
Basar Duke Nymphalidae परिवार और Limenitidinae उपपरिवार से संबंधित है। यह लगभग 600-700 मीटर की ऊंचाई पर अर्ध-सदाबहार (semi-evergreen) जंगलों में निवास करती है। वयस्क तितलियां मुख्य रूप से देर सुबह और दोपहर की शुरुआत में सक्रिय होती हैं, और तेजी से उड़ने के बजाय पत्तों के बीच धीरे-धीरे ग्लाइड करती हैं। वे फूलों के बजाय पेड़ के रस, सड़ते हुए फलों और नम मिट्टी पर खनिजों को खाती हैं। मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:
- रंग (Colouration): पंख जैतून-भूरे (olive-brown) रंग के होते हैं, जिन पर सफेद धब्बे और नीचे की तरफ हल्का फिरोजा (turquoise) या बैंगनी रंग की चमक होती है।
- शरीर का आकार: यह आकार में अन्य Euthalia प्रजातियों के समान है, जिसमें चौड़े पंख और गोल किनारे होते हैं।
- दुर्लभ दृश्य (Rare sightings): अब तक केवल दो नर नमूने ही एकत्र किए गए हैं; मादा अज्ञात है।
zubeengargi नाम जुबीन गर्ग का सम्मान करता है, जिनका संगीत पूरे असम और पूर्वोत्तर में लोकप्रिय है। एक सांस्कृतिक प्रतीक के नाम पर प्रजाति का नाम रखकर, शोधकर्ताओं को क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता के बारे में जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है।
पारिस्थितिक महत्व (Ecological significance)
- स्वस्थ जंगलों का संकेतक: तितलियां आवास परिवर्तनों के प्रति संवेदनशील होती हैं। Basar Duke की उपस्थिति यह बताती है कि पूर्वी हिमालय के कुछ हिस्सों में अभी भी अखंड वन पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद हैं।
- स्थानिक विविधता को उजागर करना: यह प्रजाति इस बात को रेखांकित करती है कि इस क्षेत्र के कीड़ों के बारे में कितना कम ज्ञात है। कई और तितलियां और पतंगे (moths) दूरदराज की घाटियों में खोजे जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
- संरक्षण संबंधी चिंता: चूंकि केवल कुछ ही व्यक्तियों का पता चला है, इसलिए आवास के किसी भी नुकसान से इस प्रजाति को खतरा हो सकता है। IUCN द्वारा इसका अभी तक आकलन नहीं किया गया है, लेकिन संभवतः यह एक खतरे वाली श्रेणी में आएगी।
निष्कर्ष
Euthalia zubeengargi की खोज इस बात की याद दिलाती है कि भारत के पूर्वोत्तर जंगलों में अभी भी विज्ञान के लिए अज्ञात प्रजातियां मौजूद हैं। इन आवासों की रक्षा करना न केवल वन्यजीवों को संरक्षित करता है बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का भी जश्न मनाता है।
स्रोत: NDTV