समाचार में क्यों?
छत्तीसगढ़ में वन्यजीव अधिकारियों ने घोषणा की है कि Barnawapara Wildlife Sanctuary (बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य) में काले हिरणों (blackbucks) की आबादी अब 200 से अधिक हो गई है — जो कि 2018 में फिर से लाए गए सिर्फ 77 जानवरों से बढ़ी है। इस सफलता को, जिसे प्रधान मंत्री ने अपने रेडियो कार्यक्रम में उजागर किया था, काले हिरणों की भारत की पहली बड़ी रीवाइल्डिंग (rewilding) माना जा रहा है, जो कभी इस क्षेत्र में विलुप्त हो गए थे।
पृष्ठभूमि
काला हिरण (Antilope cervicapra) भारतीय उपमहाद्वीप का मूल निवासी एक मध्यम आकार का मृग (antelope) है। नर के आकर्षक सर्पिल सींग (spiralled horns) और गहरे भूरे रंग के कोट होते हैं; मादा हल्की होती है और आमतौर पर सींग रहित होती है। ये सुंदर जानवर खुले घास के मैदानों और अर्ध-शुष्क मैदानों में निवास करते हैं। ऐतिहासिक रूप से प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले इन जानवरों की संख्या शिकार और निवास स्थान के नुकसान के कारण कम हो गई। इस प्रजाति को IUCN Red List में "Least Concern" (कम चिंताजनक) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन यह भारत के Wildlife Protection Act की अनुसूची I के तहत संरक्षित है।
पुनर्स्थापन कार्यक्रम (The reintroduction programme)
- प्रारंभिक रिहाई: 2018 में, छत्तीसगढ़ वन विभाग ने बिलासपुर के पास कानन पेंडारी प्राणी उद्यान (Kanan Pendari Zoological Garden) से 27 काले हिरण और दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (National Zoological Park) से 50 काले हिरणों को बारनवापारा अभयारण्य में स्थानांतरित किया। चार हेक्टेयर के बाड़े ने जानवरों को देखरेख में अनुकूलन करने की अनुमति दी।
- सॉफ्ट रिलीज़ (Soft release): दो वर्षों में, वन अधिकारियों ने धीरे-धीरे बाड़े के द्वार खोले, जिससे काले हिरणों को आसन्न घास के मैदानों का पता लगाने की अनुमति मिली। जानवरों ने उच्च अस्तित्व दर और प्रजनन सफलता के साथ अच्छी तरह से अनुकूलन किया।
- आबादी में वृद्धि: 2026 की शुरुआत तक, झुंड में 200 से अधिक जानवर शामिल थे, जिनमें जंगल में पैदा हुए कई बच्चे भी शामिल थे। ये जानवर अब 245-वर्ग-किलोमीटर के अभयारण्य के भीतर स्वतंत्र रूप से घूमते हैं।
- भविष्य की योजनाएं: ऐतिहासिक सीमाओं को पुनर्स्थापित करने और आनुवंशिक विविधता (genetic stock) में विविधता लाने के लिए अधिकारियों ने लगभग 40 काले हिरणों को गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य (Gomarda Wildlife Sanctuary) और बाद में अचानकमार टाइगर रिजर्व (Achanakmar Tiger Reserve) में स्थानांतरित करने की योजना बनाई है।
महत्व
बारनवापारा की सफलता की कहानी दर्शाती है कि जब निवास की गुणवत्ता बहाल हो जाती है और मानवीय गड़बड़ी का प्रबंधन किया जाता है, तो रीवाइल्डिंग (rewilding) स्थानीय विलुप्ति को उलट सकती है। यह यह भी दिखाता है कि चिड़ियाघर और वन विभागों के बीच सहयोग जंगली आबादी को कैसे मजबूत कर सकता है। पुनरुत्पादन (reintroduction) द्वारा उत्पन्न जन जागरूकता स्थानीय समुदायों को घास के मैदानों की रक्षा के लिए प्रोत्साहित करती है और अवैध शिकार को कम करती है।
स्रोत: Hindustan Times