चर्चा में क्यों?
औबर्न यूनिवर्सिटी (Auburn University), नालंदा यूनिवर्सिटी (Nalanda University) और अन्य भारतीय संस्थानों (Indian institutions) की एक शोध टीम (research team) ने जून 2026 में रिपोर्ट दी कि ओडिशा (Odisha) में ब्राह्मणी नदी (Brahmani River) के तलछट (sediments) में माइक्रोप्लास्टिक (microplastics) जमा हो रहे हैं। ये छोटे कण "रासायनिक स्पंज" (chemical sponges) के रूप में कार्य करते हैं, जो जहरीली धातुओं (toxic metals) को नदी और पास के भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य (Bhitarkanika Wildlife Sanctuary) में ले जाते हैं। यह अध्ययन इस क्षेत्र में माइक्रोप्लास्टिक्स (microplastics) द्वारा उत्पन्न पारिस्थितिक जोखिमों (ecological risks) का आकलन (assess) करने वाला पहला है।
पृष्ठभूमि
ब्राह्मणी एक पूर्व की ओर बहने वाली नदी (east-flowing river) है जो राउरकेला (Rourkela) के पास दक्षिण कोयल (South Koel) और शंख (Sankh) नदियों के संगम (confluence) से बनती है। यह लगभग 600 मीटर की ऊंचाई पर छोटा नागपुर पठार (Chota Nagpur plateau) पर नागरी गांव (Nagri village) के पास से निकलती है। यह नदी झारखंड (Jharkhand), छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) और ओडिशा (Odisha) से होकर लगभग 799 किलोमीटर तक बहती है, और बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में गिरने से पहले 39,033 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में बहती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां (tributaries) शंख (Sankh), टिकरा (Tikra) और कारो (Karo) हैं। ब्राह्मणी धामरा (Dhamra) के पास एक बड़ा डेल्टा (delta) बनाने के लिए बैतरणी नदी (Baitarani River) में मिल जाती है। इस डेल्टा में भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य (Bhitarkanika Wildlife Sanctuary), भारत का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र (mangrove ecosystem) और खारे पानी के मगरमच्छों (saltwater crocodiles), ओलिव रिडले कछुओं (Olive Ridley turtles) और प्रवासी पक्षियों (migratory birds) का निवास स्थान (habitat) है।
अध्ययन के निष्कर्ष
- नमूनाकरण और विश्लेषण (Sampling and analysis): शोधकर्ताओं ने ब्राह्मणी के 22 किलोमीटर के हिस्से के साथ तलछट के बीस नमूने (twenty sediment samples) एकत्र किए। उन्होंने कीचड़ (mud) से माइक्रोप्लास्टिक्स को अलग करने के लिए जिंक क्लोराइड (zinc chloride) समाधान और प्लास्टिक (plastic) के प्रकारों की पहचान करने के लिए फूरियर-ट्रांसफॉर्म इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी (Fourier-transform infrared spectroscopy) का उपयोग किया।
- प्लास्टिक के प्रकार (Types of plastics): पॉलियामाइड (नायलॉन) (polyamide (nylon)) से बने सूक्ष्म रेशे (Microscopic fibres) सबसे आम थे। टीम ने अन्य पॉलिमर (polymers) के टुकड़े (fragments) और फिल्में (films) भी पाईं।
- भारी धातु संदूषण (Heavy metal contamination): स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (Scanning electron microscopy) से पता चला कि प्लास्टिक के कण क्रोमियम (chromium), तांबा (copper), जस्ता (zinc), आर्सेनिक (arsenic), कैडमियम (cadmium) और सीसा (lead) जैसी जहरीली धातुओं (toxic metals) को ले जाते हैं। ये धातुएँ प्लास्टिक की सतह (surface) का पालन करती हैं और लंबी दूरी तक पहुँचाई जा सकती हैं।
- पारिस्थितिक जोखिम (Ecological risk): माइक्रोप्लास्टिक्स (Microplastics) और संलग्न धातुएं संवेदनशील मैंग्रोव जड़ों (mangrove roots) और जानवरों को खतरा पैदा करती हैं जो भितरकनिका डेल्टा (Bhitarkanika delta) में भोजन करते हैं या घोंसला बनाते हैं। अध्ययन ने इस बात पर जोर दिया कि बायोफिल्म्स (biofilms)—बैक्टीरिया की घिनौनी परतें—प्लास्टिक पर बनती हैं और धातु के बंधन (metal binding) को प्रभावित कर सकती हैं।
- बेसलाइन डेटा की आवश्यकता (Need for baseline data): यह शोध ब्राह्मणी नदी (Brahmani River) में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण के लिए पहला आधार रेखा (baseline) प्रदान करता है। यह नीति निर्माताओं (policymakers) को नदी और उसके वन्यजीवों (wildlife) की सुरक्षा के लिए अपशिष्ट प्रबंधन रणनीतियों (waste-management strategies) को डिजाइन करने में मदद करेगा।
निष्कर्ष
ब्राह्मणी नदी में माइक्रोप्लास्टिक्स और भारी धातुओं (heavy metals) की मौजूदगी चिंताजनक है। यहां तक कि दूरस्थ, संरक्षित क्षेत्रों (protected areas) जैसे भितरकनिका अभयारण्य (Bhitarkanika sanctuary) को भी ऊपर के स्रोतों से प्रदूषक (pollutants) मिल रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन (waste management), प्लास्टिक के कम उपयोग (reduced plastic use) और जन जागरूकता (public awareness) की आवश्यकता है। नदी, डेल्टा और उन पर निर्भर समुदायों (communities) के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी (Regular monitoring) महत्वपूर्ण होगी।