चर्चा में क्यों?
असम सरकार ने मार्च 2026 में घोषणा की कि वह मौजूदा बुढ़ा चापोरी वन्यजीव अभयारण्य (Burha Chapori Wildlife Sanctuary) के निकट लगभग 224 हेक्टेयर में फैले एक नए बुढ़ाचापोरी नंबर 5 आरक्षित वन (Burhachapori No. 5 Reserved Forest) को अधिसूचित करेगी। इस प्रतिपूरक वनीकरण (compensatory afforestation) का उद्देश्य राजमार्गों, ऊर्जा पाइपलाइनों, खनन और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए डायवर्ट की गई वन भूमि की भरपाई करना है। औपचारिक अधिसूचना से पहले अधिकारी भूमि अधिकारों का निपटारा करेंगे।
पृष्ठभूमि
बुढ़ा चापोरी (Burha Chapori) वन्यजीव अभयारण्य असम के सोनितपुर (Sonitpur) जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। यह लगभग 44.06 वर्ग किमी को कवर करता है और, पड़ोसी लाओखोवा वन्यजीव अभयारण्य (Laokhowa Wildlife Sanctuary) के साथ मिलकर, एक पारिस्थितिक परिसर का निर्माण करता है जो प्रसिद्ध काजीरंगा टाइगर रिजर्व (Kaziranga Tiger Reserve) के लिए एक बफर के रूप में कार्य करता है। इस क्षेत्र को 1974 में आरक्षित वन घोषित किया गया था और 1995 में वन्यजीव अभयारण्य में अपग्रेड किया गया था।
पारिस्थितिकी और वन्यजीव
- आवास: अभयारण्य में गीले जलोढ़ घास के मैदान (alluvial grasslands), नदी के किनारे के जंगल और अर्ध-सदाबहार जंगल (semi‑evergreen woodland) शामिल हैं। ब्रह्मपुत्र की मौसमी बाढ़ हरी-भरी घास और आर्द्रभूमि (wetlands) को बनाए रखती है।
- जीव-जंतु: यह ग्रेटर वन-हॉर्नड गैंडे (Greater one‑horned rhinoceros), बाघ, तेंदुए, जंगली भैंसे, हॉग हिरण (hog deer), जंगली सूअर और हाथियों को आश्रय देता है। घास के मैदान लुप्तप्राय पक्षियों जैसे बंगाल फ्लोरिकन (Bengal florican), काले गर्दन वाले सारस, मल्लार्ड (mallard), ओपन-बिल्ड स्टॉर्क (open‑billed stork), विभिन्न टील (teal) प्रजातियों और सीटी बजाने वाली बत्तखों (whistling ducks) की मेजबानी करते हैं।
- औषधीय जड़ी-बूटियाँ: बाढ़ के मैदानों की घासों और जड़ी-बूटियों में औषधीय गुण होते हैं और ये स्थानीय आजीविका का समर्थन करते हैं।
नये आरक्षित वन के बारे में
- प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory afforestation): भारतीय कानून के अनुसार गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के किसी भी डायवर्जन की भरपाई समान क्षेत्र में पौधे लगाकर की जानी चाहिए। प्रस्तावित बुढ़ाचापोरी नंबर 5 आरक्षित वन इस तरह के वनीकरण के लिए हस्तांतरित 830 हेक्टेयर नदी तट का उपयोग करेगा; प्रारंभ में लगभग 224 हेक्टेयर को अधिसूचित किया जाएगा।
- कनेक्टिविटी की सुरक्षा: अभयारण्य के पास नया जंगल जोड़ने से वन्यजीवों के लिए आवास कनेक्टिविटी (habitat connectivity) बढ़ेगी और विकास के दबावों के खिलाफ एक अतिरिक्त बफर मिलेगा।
- अधिकारों का निपटान: वन को औपचारिक रूप से अधिसूचित किए जाने से पहले एक वन बंदोबस्त अधिकारी (forest settlement officer) जांच करेगा और किसी भी प्रथागत भूमि अधिकारों की भरपाई करेगा।
निष्कर्ष
बुढ़ा चापोरी के पास एक नए आरक्षित वन का निर्माण यह दर्शाता है कि कैसे प्रतिपूरक वनीकरण कानूनी आवश्यकताओं का अनुपालन कर सकता है और संरक्षण क्षेत्रों का विस्तार कर सकता है। दीर्घकालिक सफलता सार्थक सामुदायिक भागीदारी और एक बार अधिसूचित होने के बाद नए जंगल की कड़ी सुरक्षा पर निर्भर करेगी।