चर्चा में क्यों?
10 जून 2026 को, भारत में असेंबल किए जाने वाले पहले एयरबस C-295 (Airbus C-295) सैन्य परिवहन विमान (military transport aircraft) ने वडोदरा, गुजरात में अंतिम असेंबली लाइन (final assembly line) से अपनी पहली परीक्षण उड़ान (maiden test flight) सफलतापूर्वक पूरी की। यह उड़ान 'मेक इन इंडिया' (Make in India) कार्यक्रम के तहत घरेलू स्तर पर रक्षा उपकरण (defence equipment) बनाने के भारत के अभियान में एक प्रमुख मील का पत्थर है। भारतीय वायु सेना (Indian Air Force - IAF) को पहला भारत-निर्मित विमान इसी साल सौंपे जाने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि
2021 में भारत ने IAF के पुराने एवरो HS-748 (Avro HS-748) बेड़े को बदलने के लिए 56 C-295W विमानों की आपूर्ति के लिए एयरबस डिफेंस एंड स्पेस (Airbus Defence & Space) के साथ लगभग ₹21,935 करोड़ के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत, 16 विमान स्पेन से उड़ान भरने की स्थिति (fly‑away condition) में वितरित किए जाने हैं, जबकि शेष 40 का निर्माण भारत में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (Tata Advanced Systems Limited) द्वारा वडोदरा में एक उद्देश्य-निर्मित अंतिम असेंबली लाइन पर किया जाएगा। इस सुविधा का उद्घाटन अक्टूबर 2024 में किया गया था और यह प्रति वर्ष आठ विमान वितरित करेगी, जिसमें सभी 56 को 2031 तक सेवा में शामिल किया जाएगा। परियोजना में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (technology transfer) शामिल है; 30वें विमान के बाद से लगभग सभी काम के घंटे भारत में किए जाएंगे, और हजारों घटकों का उत्पादन भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों द्वारा किया जा रहा है।
पहली परीक्षण उड़ान और इसका महत्व
- सफल उड़ान (Successful flight): निजी तौर पर उत्पादित C-295 विमान ने वडोदरा की अंतिम असेंबली लाइन से उड़ान भरी और बिना किसी घटना के अपनी पहली परीक्षण उड़ान पूरी की। एयरबस ने उल्लेख किया कि यह उत्पादन के बाद का परीक्षण विमान को IAF को सौंपने से पहले एक महत्वपूर्ण कदम है।
- IAF की खरीद (IAF procurement): IAF सामरिक एयरलिफ्ट (tactical airlift), सैन्य परिवहन (troop transport), चिकित्सा निकासी (medical evacuation) और विशेष अभियानों के लिए 56 C-295 परिवहन विमान प्राप्त कर रहा है। विमान 70 से अधिक यात्रियों या 9 टन कार्गो (cargo) को ले जा सकता है, छोटी, बिना तैयार की गई हवाई पट्टियों (unprepared airstrips) से काम कर सकता है और लगभग 5,000 किलोमीटर की सीमा तक पहुंच सकता है।
- मेक इन इंडिया माइलस्टोन (Make in India milestone): यह पहली बार है जब किसी निजी भारतीय कंपनी ने सैन्य विमान को असेंबल किया है। परियोजना भारत की एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखला (aerospace supply chain) को मजबूत करती है, रोजगार पैदा करती है और राज्य के स्वामित्व वाली फर्मों से परे क्षमता जोड़ती है। एयरबस ने कार्यक्रम को रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता (self‑reliance) के लिए भारत की खोज में एक "गेम चेंजर" के रूप में वर्णित किया।
- भविष्य की योजनाएं (Future plans): भारत में एक रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (maintenance, repair and overhaul - MRO) सुविधा स्थापित की जाएगी, और भारतीय नौसेना (Indian Navy) और तटरक्षक (Coast Guard) को C-295 वेरिएंट की आपूर्ति के लिए चर्चा चल रही है। स्थानीय असेंबली लाइन निर्यात के लिए विमान भी बना सकती है।
निष्कर्ष
पहले भारत-निर्मित C-295 की पहली परीक्षण उड़ान जटिल सैन्य विमानों का उत्पादन करने के लिए भारतीय उद्योग की क्षमता को प्रदर्शित करती है। जैसे-जैसे अधिक विमान सामने आएंगे, यह कार्यक्रम IAF की लिफ्ट क्षमता को बढ़ाएगा, रक्षा औद्योगीकरण (defence industrialisation) को बढ़ावा देगा और सामरिक स्वायत्तता (strategic autonomy) के लिए भारत की आकांक्षा को आगे बढ़ाएगा।